जानें, 17 साल और 516 करोड़ के खर्च से बने कोसी-मिथिलांचल महासेतु के बारे

नयी दिल्ली.  बिहार (Bihar) में विधान सभा चुनाव (Vidhan Sabha Elections) के ठीक पहले केंद्र सरकार वहां  कई योजनाओं को शुरू कर रही है. आज इसी कड़ी में PM नरेन्द्र मोदी (NarendraModi) आज 12 बजे वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिये मिथिलांचल को जोड़ने वाले कोसी रेल महासेतु का उद्घाटन  करने वाले हैं . वहीं इसके साथ ही  समस्तीपुर रेलमंडल के कई योजनाओं का भी उद्घाटन और पौल से आसनपुर कुपहा डेमू ट्रेन के परिचालन को हरी झंडी PM मोदी दिखायेंगे.

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आईये आज आपको कोसी-मिथिलांचल को जोड़ने वाले महासेतु का इतिहास और इसकी जरुरत के उद्देश्यों के बारे में बताते हैं:

इतिहास की सुनिए 

विदित हो कि वर्ष 887 में निर्मली और भपटियाही (सरायगढ़) के बीच मीटर गेज लिंक भी बनाया गया था जो कि 1934 में विनाशकारी भूकंप से नष्ट हो गया था। जिसके चलते  कोसी और मिथिलांचल दो भागों में विभक्त हो  गया था। वहीं इसके बाद 6 जून 2003 को तत्कालीन PM अटल बिहारी वाजपेयी ने निर्मली के एक कॉलेज में आयोजित समारोह में कोसी मेगा ब्रिज लाइन परियोजना की आधारशिला रखी थी। 

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उदेश्य और फायदे 

अब यही कोसी रेल महासेतु जो अब तैयार हो गया है और  1।9 किलोमीटर लंबा है। वहीं इसके निर्माण में 516 करोड़ रुपये की लागत आई है। इससे फायदा यह होगा कि  सुपौल से सरायगढ़ होते हुए कोसी महासेतु से गुजर कर ट्रेन असानपुर कुपहा हॉल्ट तक चलेगी. असानपुर कुपहा हाल्ट से झंझारपुर स्टेशन तक कार्य प्रगति पर है इन दोनों स्टेशनों के बीच हालाँकि  पांच और छोटे पुलों का निर्माण किया जाना है इस कार्य के पूर्ण होते ही कोसी से मिथिलांचल का दरभंगा स्टेशन से जुड़ जाएगा.

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बता दें कि इस पुल का इंतजार करीब 80 साल से हो रहा था और अब जब यह दुबारा बनकर तैयार है तो अब करीब 300 किमी. की दूरी 22 किमी. में सिमट कर रह जाने वाली है.