Silence in the streets and markets during the first weekend lockdown in Maharashtra

    नई दिल्ली: भारत में कोरोना (Coronavirus Pandemic) का तांडव कम होने का नाम नहीं ले रहा है। कोविड-19 (COVID-19) से संक्रमित मामले लगातार बढ़ रहे हैं। इसी बीच सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) ने केंद्र की मोदी सरकार (Modi Govt) और राज्य सरकारों से लॉकडाउन पर विचार करने के लिए कहा है। देश की सबसे बड़ी अदालत ने कहा कि लोक कल्याण को ध्यान में रखकर कोविड की दूसरी लहर पर लगाम लगाने के मद्देनजर लॉकडाउन लगाने पर विचार करें।  

    बता दें कि सुप्रीम कोर्ट ने भले ही लॉकडाउन लगाने पर विचार करने के लिए कहा हो।  लेकिन कोर्ट ने यह भी कहा कि इस बात का विशेष ध्यान रखें कि सामजिक और आर्थिक प्रभाव लोगों पर इसका कम पड़े। सर्वोच्य न्यायालय ने कहा कि कोरोना के चलते जिन लोगों पर इसका असर पड़ सकता है उनके लिए खास इंतजाम की व्यवस्था की जाए।  

    वहीं कोरोना तांडव के बीच सुप्रीम कोर्ट ने ऐसे मामलों का भी संज्ञान लिया है जहां लोगों को अस्पताल में भर्ती न करने के जो सामने आए हैं। कोर्ट ने सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेश को कहा कि स्थानीय पता या आईडी प्रूफ न होने के बावजूद भी इसे अस्पताल में भर्ती करने और दवाइयां देने से मना नहीं कर सकते हैं। 

    उल्लेखनीय है कि इससे पहले कोरोना तांडव के चलते सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र को दिल्ली में ऑक्सीजन की कमी पर कहा था कि तीन मई की मध्यरात्रि से पहले आपूर्ति कर दी जाए।  साथ ही सुप्रीम कोर्ट ने दो सप्ताह के भीतर अस्पतालों में एंट्री को लेकर राष्ट्रीय नीति बनाने के लिए भी कहा है।