महाराष्ट्र: विभाग बंटवारे से शिवसेना नाखुश, कांग्रेस-एनसीपी ले गए प्रमुख पद

मुंबई, महाराष्ट्र में आखिरकार लम्बे घमासान के बाद महा विकास अघाड़ी में मंत्री विभागों का बंटवारा हो ही गया है। राज्यपाल भगत सिंह कोश्यारी ने भी मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे द्वारा प्रस्तावित विभागों

मुंबई, महाराष्ट्र में आखिरकार लम्बे घमासान के बाद महा विकास अघाड़ी में मंत्री विभागों का बंटवारा हो ही गया है। राज्यपाल भगत सिंह कोश्यारी ने भी  मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे द्वारा प्रस्तावित विभागों के आवंटन को मंजूरी दे दी है। जहाँ शिवसेना के कई दिग्गज नेता इस बंटवारे से खुश नहीं है। वहीं एनसीपी-कांग्रेस कहीं ना कहीं संतुष्ट है। लेकिन यह बंटवारा शायद शिवसेना के भीतर प्रचंड घमासान होने का अंदेशा देता है। विगत शनिवार को इसी के चलते शिवसेना  के नेता अब्दुल सत्तर ने अपना इस्तीफा दे दिया था। वही शिवसेना के कई नेताओं का मानना है कि उन्हें कम वरीयता वाली कुर्सी प्राप्त हुई है। उधर कांग्रेस-एनसीपी को गृह, वित्त, रेवेन्यू, हाउसिंग, पब्लिक वर्क और वाटर रिसोर्स जैसे विभाग सौंपे गए हैं। 

एनसीपी के जयंत पाटिल ने स्पष्ट किया था कि मंत्रियों को आवंटित वाले विभागों की सूची राज्यपाल को शनिवार शाम सौंप दी गई थी। वहीं राजभवन से  राज्यपाल ने भी  विभागों के आवंटन को मंजूरी दे दी है। अगर हम विभागों के बंटवारे को एक नजर देखें तो आवंटन के तहत उपमुख्यमंत्री एवं वरिष्ठ एनसीपी  नेता अजित पवार को वित्त एवं नियोजन विभाग दिया गया है वहीं  उनके पार्टी सहयोगी अनिल देशमुख राज्य का नया गृह मंत्री बनाया गया है । इनके अलावा, मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे के बेटे और पहली बार विधायक बने शिवसेना के आदित्य ठाकरे को पर्यावरण, पर्यटन एवं प्रोटोकॉल विभागों का प्रभार सौंपा गया है। वहीं कांग्रेस के वरिष्ठ नेता बालासाहेब थोराट को राजस्व मंत्रालय मिला है। इससे ये साफ़ प्रतीत हो रहा कि विभागों के इस आवंटन के साथ ही अधिकतर ‘महत्वपूर्ण’ मंत्रालय शरद पवार के नेतृत्व वाली एनसीपी  को मिले है।

देखा जा रहा है कि इस बंटवारे से शिवसेना के बहुत से  विधायक बिल्कुल भी खुश नहीं हैं। जहाँ करीब दर्जनभर शिवसेना विधायक मंत्रिमंडल पद नहीं मिलने से क्षुब्ध हैं। वहीं, कई विधायकों ने तो  कम ओहदे के कारण भी आपत्ति जताई है। देखा जाए तो शिवसेना से कुल 14 मंत्री बनाए गए हैं। लेकिन इनमें से 3 के पास स्वतंत्र प्रभार है, वहीं आदित्य ठाकरे को पुरे पर्यावरण मंत्रालय की जिम्मेदारी दी गई है। आपको बता दें की अपने भाई सुनील राउत को भी मंत्री पद नहीं मिलने से पार्टी के कद्दावर नेता संजय राउत थोड़े खिन्न हैं। यही नहीं देवेंद्र फडणवीस सरकार में मंत्री रहे शिव सेना के ही  तानाजी सावंत इस बार भी मंत्री के रेस में पहले नंबर पर थे।लेकिन उनका नाम भी कट गया है।जिसके चलते पिछले हफ्ते  उन्हें उद्धव ठाकरे से मिलकर अपनी नाराजगी भी जाहिर की थी। वही अब खबर ये भी आयी है कि अब्दुल सत्तार को उनके कल के ड्रामे के बाद  राजस्व, ग्रामीण विकास, बंदरगाह भूमि विकास और विशेष सहायता राज्य मंत्री (MoS) का दर्जा दिया है।  ऐसा शायद इसीलिए क्यूंकि मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे मुसलमानों  के बीच अपनी पैठ बनाना चाहते हैं। 

जो तस्वीर अब बनके आ रही है उसके अनुसार,

कांग्रेस से नितिन राउत को ऊर्जा, बालासाहेब थोराट को राजस्व, वर्षा गायकवाड़ को स्कूली शिक्षा, यशोमति ठाकुर को महिला और बाल कल्याण, केसी पाडवी को आदिवासी विकास, सुनील केदार को  डेयरी विकास व पशुसंवर्धन, विजय वड्डेटीवार को  ओबीसी कल्याण, असलम शेख को  कपड़ा, बंदरगाह और अमित देशमुख  को स्वास्थ्य, शिक्षा और संस्कृति। 

शिवसेना से आदित्य ठाकरे  को पर्यावरण-पर्यटन , एकनाथ शिंदे को  नगरविकास (MSRDC), सुभाष देसाई को उद्योग , संजय राठोड़ को वन,  वनदादा भुसे को  कृषि , अनिल परब को परिवहन और संसदीय कार्य, संदीपान भुमरे को रोजगार हमी (EGS),  शंकरराव गडाख को जल संरक्षण, उदय सामंत को  उच्च व तकनीकी शिक्षा और गुलाब राव पाटिल को  जलापूर्ति

एनसीपी से अनिल देशमुख को गृह विभाग, अजित पवार को वित्त व नियोजन, जयंत पाटिल को  जल संसाधन (सिंचाई), छगन भुजबल को फूड और सिविल सप्लाई, दिलिप वाल्से पाटिल को  एक्साइज एंड लेबर,  जितेंद्र अवहाद को आवास, राजेश तोपे  को स्वास्थ्य,  राजेंद्र शिंगने को  खाद्य एवं औषधि प्रशासन और धनंजय मुंडे को  सामाजिक न्याय