Gujarat worst in dealing with Kovid-19 crisis

मुंबई, महाराष्ट्र में एक बार फिर राजनीतिक भूचाल अपने चरम पर है। इसका केंद्रबिंदु अब फडणवीस सरकार के दौरान हुए फोन टैपिंग मामला है जिसमे शिवसेना अध्यक्ष और वर्तमान मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे, एनसीपी

मुंबई, महाराष्ट्र में एक बार फिर राजनीतिक भूचाल अपने चरम पर है। इसका केंद्रबिंदु अब फडणवीस सरकार के दौरान हुए फोन टैपिंग मामला है जिसमे शिवसेना अध्यक्ष और वर्तमान मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे, एनसीपी प्रमुख शरद पवार और शिवसेना के कद्दावर नेता संजय राउत शामिल है। ताजा समाचार के अनुसार अब इस मामले में उद्धव सरकार ने जांच के आदेश दे दियें हैं। 

आपको बता दें कि मीडिया रिपोर्ट के अनुसार फडणवीस सरकार के कार्यकाल के दौरान मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे, संजय राउत और शरद पवार के फ़ोन टैप किये गए थे।कहा जा रहा है ये फोन टैपिंग तब भी जारी थी, जब वर्तमान विधानसभा चुनाव के बाद सरकार गठन को लेकर इन सभी प्रमुख पार्टियों की बैठकें चल रहीं थीं। वहीं इसके खुलासे के बाद संजय राउत ने कहा है कि वह इन फोन टैपिंग से डरते नहीं और जो भी करते हैं, खुल्रे आम करते हैं। अपने ट्वीटर हैंडल पर उन्होंने बीजेपी पर कटाक्ष करते हुए लिखा की "मैं बाल ठाकरे का चेला हूं, जो कुछ करता हूं, खुले तौर पर करता हूं और इसके लिए मुझे कहीं छुपने या कुछ छुपाने की जरुरत नहीं है"। इधर संजय राउत ने यह भी कहा है कि एक वरिष्ठ बीजेपी नेता ने उन्हें पहले ही इस बारे में आगाह किया गया था। 

वहीं दूसरी तरफ महाराष्ट्र के कैबिनेट में मंत्री अनिल देशमुख ने इस बारे में जानकारी देते हुए कहा कि यह सच है कि महाराष्ट्र चुनाव के दौरान बीजेपी और अन्य दलों के नेताओं के फोन टैप किए जा रहे थे। उन्होंने यह भी कहा कि इस गंभीर मसले में जांच के आदेश दे दिये हैं। इस गंभीर विषय पर महाराष्ट्र के गृहमंत्री अनिल देशमुख ने कल कहा कि अगर फोन टैपिंग की बात में थोड़ी भी सच्चाई है तो यह सरकारी मशीनरी का सरासर दुरुपयोग है। उन्होंने कहा कि इस मामले की गंभीरता को देखते हुए मुंबई साइबर सेल को जांच के आदेश दिए जा चुकें हैं।साथ ही इस बात की भी जांच होगी की इस दौरान किन अन्य विपक्षी नेताओं की फोन टैपिंग की जा रही थी। अपने वक्तव्य में उन्होंने बीजेपी को आड़े हाथों लेते हुए कहा कि इसमें कोई दोराय नहीं कि पिछली सरकार के दौरान विपक्ष के नेताओं के फोन टैपिंग के लिए, व्यवस्था को तोडा मरोड़ा गया था। जिसके लिए पिछले साल देवेंद्र फडणवीस सरकार के 5 अधिकारी, इसमें प्रयुक्त होने वाले सॉफ्टवेयर लेनें के लिए इजराइल गए थे। 

चाहे जो हो, ये देखना भी अब प्रासंगिक होगा कि फोन टैपिंग का यह मामला बीजेपी और देवेंद्र फडणवीस के लिए कितना बड़ा सरदर्द साबित हो सकता है ? साथ ही यह भी देखना बड़ा रोचक होगा की महाविकास अघाड़ी, फोन टैपिंग के इस मुद्दे को कितने अच्छे से राजनीतिक परिदृश्य में अपने लिए भुनाती है। फिलहाल यह मुद्दा महाराष्ट्र के राजनीतिक धरातल में पुरी तरह पैठ बना चुका है।