महामारी के चपेट में आ सकते हैं कुपोषित

    दिल्ली. भारत में 9.2 लाख से अधिक बच्चे गंभीर रूप से कुपोषित (Malnourish) हैं। उत्तर प्रदेश में सबसे अधिक बच्चे कुपोषित हैं। इसके बाद बिहार का नंबर आता है जहां कुपोषित बच्चों की संख्या सबसे ज्यादा है। केंद्र सरकार ने एक आरटीआई के जवाब में यह जानकारी दी। इस पर चिंता जतायी गयी है कि कोविड महामारी की वजह से गरीबी रेखा से नीचे आने वाले लोगों के बीच स्वास्थ्य और पोषण संकट बढ़ सकता है। महिला एवं बाल विकास मंत्रालय ने एक आरटीआई के जवाब में कहा कि पिछले साल नवंबर तक देशभर में 6 महीने से 6 साल तक के अनुमानित 9,27,606 गंभीर रूप से कुपोषित बच्चों की पहचान की गयी थी। मंत्रालय द्वारा साझा किये गये आंकड़ों के अनुसार इनमें से उत्तर प्रदेश में 3,98,359 और बिहार में 2,79,359 बच्चे कुपोषण के शिकार हैं। लद्दाख, लक्षद्वीप, नगालैंड, मणिपुर और मध्य प्रदेश ने गंभीर रूप से कुपोषित बच्चों की सूचना नहीं दी। 

    विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) (World Health Organization (WHO) गंभीर तोत्र कुपोषण (एसएएम) को बहुत कम वजन के लिए ऊंचाई या मध्य-ऊपरी बांह परिधि 115 मिमी से कम या पोषण संबंधी एडिमा की उपस्थिति से परिभाषित करता है। एसएएम से पीड़ित बच्चों का वजन उनकी ऊंचाई के हिसाब से बहुत कम होता है और कमजोर प्रतिरक्षा प्रणाली के कारण बीमारियों के मामले में उनके मरने की संभावना नौ गुना अधिक होती है, महिला एवं बाल विकास मंत्रालय ने पिछले साल सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों से कहा था कि वे एसएएम बच्चों की पहचान करें ताकि उन्हें अस्पतालों में जल्द से जल्द रेफर किया जा सके। उस प्रैक्टिस के बाद 9,27,606 का आंकड़ा आया। चिंता की बात यह है कि यह संख्या न केवल कम करके आंकी जा सकती है बल्कि इस आशंका के साथ चल रही महामारी को देखते हुए भी बढ़ सकती है कि तीसरी लहर बच्चों को दूसरों की तुलना में अधिक प्रभावित कर सकती है। 

    एचएक्यू सेंटर फॉर चाइल्ड राइट्स के सह संस्थापक एनाक्षी गांगुली (Enakshi Ganguly) ने बताया कि बेरोजगारी में वृद्धि हुई है, आर्थिक संकट में वृद्धि हुई है। उन्होंने कहा कि इसका भूख पर असर होना तय है और जब भूख होगी तो कुपोषण होगा। सरकार के पास एक स्पष्ट प्रोटोकॉल है और उन्हें इसे सुधारने की जरूरत है। इसे सुधारने में आंगनबाड़ी केंद्रों की भूमिका अहम होगी। 

    राज्यों में कितनी है बच्चों की जनसंख्या 

    उत्तर प्रदेश और बिहार गंभीर रूप से कुपोषित बच्चों की सूची में शीर्ष पर हैं। ऐसा इसलिए भी है क्योंकि देश में सबसे अधिक बच्चे इन दो राज्यों में हैं। 2011 की जनगणना के आंकड़ों के अनुसार उत्तर प्रदेश में 0-6 साल की उम्र के 2,97,28,235 बच्चे हैं जबकि बिहार में 1,85,82,229 बच्चे हैं।  उत्तर प्रदेश में 3,98,359 बच्चे गंभीर रूप से कुपोषित पाये गये और उसके पड़ोसी राज्य बिहार में इनकी संख्या 2,79,359 है।