rakesh tikait

    नई दिल्ली: देश में कृषि कानूनों (Agriculture Bill) को लेकर किसानों का आंदोलन (Farmer Protest) पिछले सात महीने से शुरू है। लेकिन किसानों के नाम से शुरू यह आंदोलन अब जम्मू-कश्मीर (Jammu & Kashmir) में धारा 370 (Article 370) की बहाली पर आ गई है। भारतीय किसान यूनियन के नेता और आंदोलन के प्रमुख चेहरा राकेश टिकैत (Rakesh TIkait) ने फिर से बहाली की मांग कर दी है। जिसके बाद अब यह सवाल उठने लगा है कि, धारा 370 का कृषि कानूनों से क्या संबंध है। 

    दरअसल, शुक्रवार को एक निजी समाचार चैनल से बात टिकैत ने जम्मू-कश्मीर से धारा 370 हटाने के फैसले पर सवाल उठाया। बीकेयू नेता ने कहा, “अनुच्छेद 370 हटने के कारण कश्मीर के किसान बड़े परेशान है।  370 के हटने के वजह से घाटी के किसानों की नहीं, बल्कि कुछ उद्योगपतियों को फायदा हुआ है। वहीं अगर कोई किसान अनुच्छेद 370 हटने का विरोध कर रहा उसे आतंकी बता दिया जा रहा है।”

    वहीं जम्मू-कश्मीर के नेताओं के साथ हुए प्रधानमंत्री मोदी की बैठक पर भी टिकैत ने तंज कसा है। बीकेयू नेता ने कहा, “जब गर्मी बढ़ने लगी तो इनको कश्मीर याद आया है।”

    सोशल मीडिया पर हो रहा विरोध 

    कश्मीर पर राकेश टिकैत बयान पर वह लोगों के निशाने पर आ गए हैं। सोशल मीडिया पर लोग राकेश टिकैत से सवाल पूछने लगे हैं कि, किसान के नाम पर आंदोलन करते करते कांग्रेस और विपक्षी दलों की भाषा बोलने लगे। एक यूज़र ने लिखा, “टिकैत को किसानों की असली परेशानियों से मतलब नहीं है, वह केवल अपनी राजनीतिक जमीन तैयार करने में जुटे हैं।”

    एक अन्य यूजर ने लिखा, ‘370 हटाए जाने का भारतीय किसानों की समस्या से क्या लेना-देना है, इसे मैं समझ नहीं पा रहा हूं। राकेश टिकैत सिर्फ अपने दूषित और बीमार विचारों को फैला रहे हैं।’

    संयुक्त किसान मोर्चा ने खुद को किया अलग 

    राकेश टिकैत के दिए बयान से संयुक्त किसान मोर्चा ने खुद को अलग कर लिया है। किसान नेता शिवकुमार काकाजी ने मीडिया में बयान देते हुए कहा, “राकेश टिकैत संयुक्त किसान मोर्चा के सदस्य नहीं, इसलिए उनके द्वारा दिया बयान किसान संगठन का नहीं उनका निजी बयान है। हम कश्मीर पर दिए उनके इस बयान का समर्थन नहीं करते हैं।”