Rupees

    नई  दिल्ली. आगामी एक अप्रैल से नए वित्तीय वर्ष की शुरुआत होने के साथ ही देश में श्रम कानून के नियमों (EPFO)में भी बदलाव लागू होंगे। जिसमें पीएफ (PF Account) से जुड़े नियमों में भी बदलाव किए जाएंगे। पीएफ के नए नियमों का उन लोगों पर अधिक असर पड़ेगा जिनकी इनकम ज्‍यादा है और ईपीएफ में अधिक कॉन्ट्रिब्‍यूट करते हैं। बता दें कि, इस साल के बजट में यह घोषणा की गई थी कि, जिन लोगों का वित्तीय वर्ष में सालाना पीएफ योगदान 2.5 लाख रुपये से ज्यादा है, उन्हें इसके ब्याज पर टैक्स छूट नहीं मिलेगी। 

    इन कर्मचारियों को नहीं देना होगा टैक्स 

    तत्कालीन नियमानुसार, कंपनी और कर्मचारी के वेतन से 12 % पैसे पीएफ खाते में जमा किए जाते हैं। जिसपर किसी प्रकार का टैक्स नहीं लगता, परंतु नए नियम के अनुसार, यदि कर्मचारी का वेतन आय अधिक है और जिनके खाते में पीएफ (2.5 लाख रुपये) से ज्यादा है उन्हें टैक्स चुकाना होगा।   

     

    वित्त मंत्री ने बजट में क्या कहा ? 

    सीतारमण ने 2021-21 (Budget 2021) के अपने बजट भाषण में कहा, ‘‘उच्च आय प्राप्त करने वाले कर्मचारियों द्वारा अर्जित आय पर से दी जाने वाली छूट को युक्तिसंगत बनाने के लिए अब यह प्रस्ताव किया गया है कि विभिन्न भविष्य निधियों में कर्मचारियों के अंशदान पर अर्जित ब्याज की आय पर कर छूट की सीमा को 2.5 लाख रुपये के वार्षिक अंशदान तक सीमित रखा जाए।’’ यह एक अप्रैल से प्रभाव में आएगा।’’

    वहीं बजट के बाद एक मंत्री ने संवाददाता सम्मेलन में कहा, ‘‘हम किसी कर्मचारियों के अधिकारों को कम नहीं कर रहे हैं।    लेकिन अगर कोई एक करोड़ रुपये खाते में जमा कर 8 प्रतिशत ब्याज लेता है, मुझे लगता है कि यह यह सही नहीं हो सकता। और इसीलिए हमने सीमा तय की हैं। “

    एक प्रतिशत कर्मचारी होंगे प्रभावित

    सरकार ने दावा किया है कि, इस बदवाल से एक प्रतिशत से भी कम कर्मचारी प्रभावित होंगे। व्यय सचिव टी वी सोमनाथन ने बताया कि, 2.5 लाख से अधिक का योगदान करने वाले कर्मचारियों की संख्या ईपीएफ में योगदान करने वालों की कुल संख्या के एक प्रतिशत से भी कम है। वहीं कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (ईपीएफओ) के अंशधारकों की संख्या छह करोड़ हैं।