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नई दिल्ली. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वीडियो कॉन्फ्रेंस के माध्यम आज बिहार में नौ राजमार्ग परियोजनाओं की आधारशिला रखी और ऑप्टिकल फाइबर इंटरनेट सेवाओं का भी उद्घाटन किया, जिसके माध्यम से राज्य के सभी 45,945 गाँवों को जोड़ा जाएगा। इन नौ राजमार्ग परियोजनाओं में 14,258 करोड़ रुपये की लागत से लगभग 350 किलोमीटर की सड़क की लंबाई शामिल है। देखें लाइव…

शिलान्यास के बाद PM मोदी ने कहीं ये खास बातें-

  • उन्होंने कहा “मैं देश के प्रत्येक किसान को इस बात का भरोसा देता हूं कि MSP की व्यवस्था जैसे पहले चली आ रही थी, वैसे ही चलती रहेगी। इस साल रबी में गेहूं, धान, दलहन और तिलहन को मिलाकर, किसानों को 1लाख 13हजार करोड़ रु. MSP पर दिया गया है। ये राशि भी पिछले साल के मुकाबले 30% से ज्यादा है।”
  • अब देश के किसान, बड़े-बड़े स्टोरहाउस में, कोल्ड स्टोरेज में इनका आसानी से भंडारण कर पाएंगे। जब भंडारण से जुड़ी कानूनी दिक्कतें दूर होंगी तो हमारे देश में कोल्ड स्टोरेज का भी नेटवर्क और विकसित होगा, उसका और विस्तार होगा।
  • ये भी जगजाहिर रहा है कि कृषि व्यापार करने वाले हमारे साथियों के सामने एसेन्शियल कमोडिटी एक्ट के कुछ प्रावधान हमेशा आड़े आते रहे हैं। बदलते हुए समय में इसमें भी बदलाव किया है। दालें, आलू, खाद्य तेल, प्याज जैसी चीजें अब इस एक्ट के दायरे से बाहर कर दी गई हैं।
  • बहुत पुरानी कहावत है कि संगठन में शक्ति होती है। आज हमारे यहां ज्यादा किसान ऐसे हैं जो बहुत थोड़ी सी जमीन पर खेती करते हैं। जब किसी क्षेत्र के ऐसे किसान अगर एक संगठन बनाकर यही काम करते हैं, तो उनका खर्च भी कम होता है और सही कीमत भी सुनिश्चित होती है।
  • कृषि मंडियों के कार्यालयों को ठीक करने के लिए, वहां का कंप्यूटराइजेशन कराने के लिए, पिछले 5-6 साल से देश में बहुत बड़ा अभियान चल रहा है। इसलिए जो ये कहता है कि नए कृषि सुधारों के बाद कृषि मंडियां समाप्त हो जाएंगी, तो वो किसानों से सरासर झूठ बोल रहा है।
  • मैं यहां स्पष्ट कर देना चाहता हूं कि ये कानून, ये बदलाव कृषि मंडियों के खिलाफ नहीं हैं। कृषि मंडियों में जैसे काम पहले होता था, वैसे ही अब भी होगा। बल्कि ये हमारी ही एनडीए सरकार है जिसने देश की कृषि मंडियों को आधुनिक बनाने के लिए निरंतर काम किया है।
  • हमारे देश में अब तक उपज बिक्री की जो व्यवस्था चली आ रही थी, जो कानून थे, उसने किसानों के हाथ-पांव बांधे हुए थे। इन कानूनों की आड़ में देश में ऐसे ताकतवर गिरोह पैदा हो गए थे जो किसानों की मजबूरी का फायदा उठा रहे थे। आखिर ये कब तक चलता रहता।
  • कल देश की संसद ने, देश के किसानों को नए अधिकार देने वाले बहुत ही ऐतिहासिक कानूनों को पारित किया है। मैं देश के लोगों को, देश के किसानों को इसके लिए बहुत-बहुत बधाई देता हूं। ये सुधार 21वीं सदी के भारत की जरूरत है।
  • पहले सड़कों का, हाईवे का, रेल नेटवर्क से कोई वास्ता नहीं रहता था, रेल का पोर्ट से और पोर्ट का एयरपोर्ट से भी कम ही नाता रहता था। 21वीं सदी का भारत, 21वीं सदी का बिहार, अब इन सारी पुरानी कमियों को पीछे छोड़कर आगे बढ़ रहा है।
  • बिहार की लाइफलाइन के रूप में मशहूर महात्मा गांधी सेतु आज नए रंगरूप में सेवाएं दे रहा है। लेकिन बढ़ती आबादी और भविष्य की ज़रूरतों को देखते हुए, अब महात्मा गांधी सेतु के समानांतर चार लेन का एक नया पुल बनाया जा रहा है। नए पुल के साथ 8-लेन का ‘पहुंच पथ’ भी होगा।
  • बिहार की कनेक्टिविटी में सबसे बड़ी बाधा बड़ी नदियों के चलते रही है। यही कारण है कि जब पीएम पैकेज की घोषणा हो रही थी तो पुलों के निर्माण पर विशेष ध्यान दिया गया था। पीएम पैकेज के तहत गंगाजी के ऊपर कुल 17 पुल बनाए जा रहे हैं, जिसमें से अधिकतर पूरे हो चुके हैं।
  • भारत में दशकों तक ऐसा रहा कि इंफ्रास्ट्रक्चर के बड़े और व्यापक बदलाव लाने वाले प्रोजेक्ट्स पर उतना ध्यान नहीं दिया गया। ये अटल जी की सरकार थी जिसने सबसे पहले इंफ्रास्ट्रक्चर को राजनीति का, विकास की योजनाओं का प्रमुख आधार बनाया था।
  • कनेक्टिविटी देश के हर गांव तक पहुंचाने के लक्ष्य के साथ देश आगे बढ़ रहा है। जब गांव-गांव में तेज़ इंटरनेट पहुंचेगा तो गांव में पढ़ाई आसान होगी। गांव के बच्चे, युवा भी एक क्लिक पर दुनिया की किताबों तक, तकनीक तक आसानी से पहुंच पाएंगे।

बिहार विधानसभा चुनाव से पहले मोदी ने हाल ही में राज्य में रेलवे, बुनियादी ढांचे, पुलों, पेयजल और स्वच्छता से संबंधित कई विकास परियोजनाओं का शिलान्यास किया है। प्रधानमंत्री कार्यालय ने एक बयान में कहा कि प्रस्तावित राजमार्ग राज्य के विकास का मार्ग प्रशस्त करेंगे क्योंकि वे बेहतर कनेक्टिविटी, सुविधा और आर्थिक विकास को बढ़ाएंगे। इसमें लोगों और सामानों की आवाजाही में भी काफी सुधार होगा।

पीएमओ ने कहा, मोदी ने वर्ष 2015 में बिहार के महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे के विकास के लिए एक विशेष पैकेज की घोषणा की थी। इस पैकेज में 54,700 करोड़ रुपये की 75 परियोजनाएँ शामिल थीं, जिनमें से 13 परियोजनाएँ पूरी हो चुकी हैं, और 38 पर काम चल रहा है और अन्य को लॉन्च करने की प्रक्रिया चल रही है। इन परियोजनाओं के पूरा होने के साथ, बिहार की सभी नदियों में 21 वीं सदी के विनिर्देशों के अनुरूप पुल होंगे और सभी प्रमुख राष्ट्रीय राजमार्ग चौड़े और मजबूत होंगे।

ऑप्टिकल फाइबर इंटरनेट सेवा कार्यक्रम का विवरण देते हुए, पीएमओ ने इसे बिहार के सभी 45,945 गांवों को कवर करने वाली एक प्रतिष्ठित परियोजना के रूप में वर्णित किया जो राज्य के दूरस्थ कोने तक “डिजिटल क्रांति” को पहुंचाने में सक्षम होगी। यह परियोजना दूरसंचार विभाग, इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय और कॉमन सर्विस सेंटर (CSC) के संयुक्त प्रयासों द्वारा निष्पादित की जाएगी।

पीएमओ ने कहा कि बिहार की लंबाई और चौड़ाई में कॉमन सर्विस सेंटर (CSC) के 34,821 केंद्र हैं, और यह इस परियोजना को लागू करने के लिए न केवल इस कार्यबल का उपयोग करेगा, बल्कि हर गांव में आम नागरिकों के लिए ऑप्टिकल फाइबर इंटरनेट सेवाएं प्रदान करने के लिए इसे पेशेवर रूप से चलाएगा।

यह परियोजना प्राथमिक विद्यालयों और अन्य जैसे आंगनवाड़ी केंद्रों और सरकारी संस्थानों में एक वाई-फाई और पांच नि: शुल्क कनेक्शन के कार्यान्वयन को भी पूरा करेगी। पीएमओ ने कहा कि इससे ई-एजुकेशन, ई-एग्रीकल्चर, टेली-मेडिसिन, टेली-लॉ और अन्य सामाजिक सुरक्षा योजनाओं जैसी डिजिटल सेवाएं बिहार के सभी नागरिकों को आसानी से उपलब्ध होंगी।