अनिल विज का ममता पर तंज, कहा – उसके सामने ‘जय श्रीराम’ बोलना मतलब सांड को…..

नई दिल्ली: नेताजी शुभास चंद्र बोस (Netaji Shubhas chandra Bose) की 125 वीं जयंती के मौके पर ‘जय श्री राम’ का नारा लगाने पर पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बैनर्जी (Mamata Bainarjee) नाराज़ होगई और भाषण देने से इनकार कर दिया। बैनर्जी के इस रवैये को लेकर भारतीय जनता पार्टी (Bhartiya Janta Party) उनपर हमलावर हो गई है। हरियाणा (Haryana) के गृहमंत्री अनिल विज (Anil Vij) ने टीएमसी (TMC) प्रमुख पर तंज कसा है. उन्होंने कहा, “ममता बैनर्जी के सामने जय श्री राम का  नारा लगाना मतलब सांड को लाल कपड़ा दिखा, तभी तो विक्टोरिया मेमोरियल में उन्होंने भाषण  नहीं दिया।”

ज्ञात हो कि, कोलकाता के विक्टोरिया मेमोरियल पर नेताजी की जयंती पर केंद्र सरकार ने कार्यक्रम आयोजित किया गया था। इसदौरान मुख्यमंत्री ममता बैनर्जी जैसे ही बोलने के लिए खड़ी हुई सामने बैठे लोगों ने जय श्री राम और भारत माता की जय के नारे लगाने  शुरू कर दिए। लोगों के इस नारे से वह नाराज़ हो गईं और मंच से बोलने से इनकार कर दिया। जिस समय नारे लगे उस समय प्रधानमंत्री मोदी(PM Narendra Modi), राज्यपाल जगदीप धनगड (Jagdeep Dhangad), केंद्रीय मंत्री बाबुल सुपियों (Babul Supriyo) मंच पर उपस्थित थे।

कार्यक्रम में गरिमा होनी चाहिए

बोलने से पहले लगे नारों पर बैनर्जी ने कहा, “मुझे लगता है कि सरकार के कार्यक्रम में गरिमा होनी चाहिए। यह कोई राजनीतिक कार्यक्रम नहीं है यह ऑल पार्टी और सरकार का कार्यक्रम है।” उन्होंने अपनी नाराजगी दिखाते हुए कहा, “मैं प्रधानमंत्री मोदी और संस्कृति मंत्री की आभारी हूँ जिन्होंने यह कार्यक्रम कोलकाता में रखा, लेकिन किसी को आमंत्रित करने के बाद अपमान करने के लिए यह आपको सूट नहीं करता है। विरोध के रूप में, मैं कुछ भी नहीं बोलूंगी।”

चुनाव को देखते हुए राजनैतिक एजेंडा सेट किया

बंगाल प्रदेश प्रभारी और भाजपा महासचिव कैलाश विजयवर्गीय ने टीएमसी प्रमुख पर एक बार फिर तुष्टिकरण करने का आरोप लगाया ह। उन्होंने ट्वीट करते हुए लिखा, “जय श्रीराम के नारे से स्वागत को ममताजी अपमान मानती है।कैसी राजनीति है!”

एक अन्य ट्वीट में उन्होंने कहा, “ममताजी ने आज बहुत ही पवित्र मंच पर ‘जय श्रीराम’ के नारे पर राजनैतिक एजेंडा सेट किया। हम इसकी निंदा करते है, नेताजी की 125वीं जयंती के मंच जहाँ प्रधानमंत्री उपस्थित हो। वहाँ चुनाव को देखते हुए राजनैतिक एजेंडा सेट करना। अल्पसंख्यक लोगों को खुश करने की तुष्टिकरण की नीति है।”