राष्ट्रपति ने दिल्ली विश्वविद्यालय के कुलपति को क्यों किया सस्पेंड, जानें पूरा मामला

नयी दिल्ली. दिल्ली विश्वविद्यालय के कुलपति योगेश त्यागी (Delhi University Vice Chancellor Yogesh Tyagi) को बुधवार को राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद (President Ram Nath Kovind) के आदेश पर निलंबित कर दिया गया। साथ ही कर्तव्य में लापरवाही के आरोपों में त्यागी के खिलाफ जांच के भी आदेश दिए गए। यह जानकारी शिक्षा मंत्रालय (एमओई) के अधिकारियों ने दी। त्यागी दिल्ली विश्वविद्यालय के संभवत: पहले कुलपति हैं जिन्हें निलंबित किया गया है। विश्वविद्यालय के अधिकारियों ने कहा कि कम से कम तीन दशकों में इस तरह की कार्रवाई किसी कुलपति के खिलाफ नहीं की गई थी। केंद्रीय विश्वविद्यालय में वर्चस्व की लड़ाई के बीच यह कदम उठाया गया है। मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि विश्वविद्यालय के कुलाधिपति राष्ट्रपति ने त्यागी को निलंबित कर दिया है ताकि सुनिश्चित किया जा सके कि जांच निष्पक्ष हो और वह साक्ष्यों से छेड़छाड़ करने या गवाहों को प्रभावित नहीं कर सकें।

त्यागी के खिलाफ कर्तव्यहीनता के जो आरोप लगे हैं उनमें खाली पदों को नहीं भरना, यौन उत्पीड़न के मामलों के समाधान में विलंब करना, अस्थायी शिक्षकों के मुद्दे से ठीक से नहीं निपटना जिस कारण व्यापक प्रदर्शन हुए, इंस्टीट्यूट ऑफ इमिनेंस (आईओई) को लागू करने के लिए विस्तृत योजना नहीं सौंपना तथा हाल में चिकित्सा छुट्टी पर रहने के दौरान कुछ नियुक्तियां करना शामिल है। शिक्षा मंत्रालय के संयुक्त सचिव चंद्रशेखर कुमार ने बताया, ‘‘भारत के राष्ट्रपति ने विश्वविद्यालय के कुलाधिपति के तौर पर उपलब्ध साक्ष्यों एवं तथ्यों को ध्यान में रखते हुए कर्तव्य में लापरवाही के आरोपों की जांच करने के आदेश दिए हैं। राष्ट्रपति ने उन्हें तत्काल प्रभाव से निलंबित भी कर दिया है क्योंकि वह गवाहों को प्रभावित कर सकते हैं और विश्वविद्यालय के साक्ष्यों से छेड़छाड़ कर सकते हैं।” उन्होंने कहा, ‘‘चिकित्सीय आधार पर योगेश त्यागी के अनुपस्थित रहने के दौरान उनकी तरफ से जारी सभी आदेशों को दरकिनार कर दिया गया है और उन्हें खारिज माना जाएगा।” त्यागी दो जुलाई को आपातकालीन चिकित्सा स्थिति में एम्स में भर्ती हुए थे ओर तब से वह छुट्टी पर हैं। सरकार ने त्यागी के पदभार ग्रहण करने तक प्रति कुलपति पी. सी. जोशी को कुलपति का प्रभार दिया था।

कुमार ने कहा, ‘‘मंत्रालय की तरफ से स्पष्ट संदेश था कि समयबद्ध तरीके से शैक्षणिक पदों को भरा जाए लेकिन भर्ती की प्रक्रिया को विलंबित किया गया। सतर्कता की कुछ शिकायतें और विश्वविद्यालय में यौन उत्पीड़न के कुछ मामले भी संबंधित कानूनों के प्रावधानों के उल्लंघन में दो वर्ष से अधिक समय से लंबित हैं, जबकि मंत्रालय नियमित रूप से इसे फॉलो-अप करता है। यह कुलपति की तरफ से संवेदनहीनता को दर्शाता है।” मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि कुलपति प्रावधानों के मुताबिक विश्वविद्यालय का प्रशासन नहीं चला रहे थे… जिससे दिल्ली विश्वविद्यालय में कुप्रशासन का आलम था और कामकाज सही तरीके से नहीं हो रहा था। यह विश्वविद्यालय के शैक्षणिक एवं प्रशासनिक माहौल के लिए उपयुक्त नहीं था। पिछले हफ्ते विवाद तब छिड़ गया जब त्यागी ने बृहस्पतिवार को जोशी को प्रति कुलपति के पद से हटा दिया और गीता भट्ट (Geeta Bhatt) को विश्वविद्यालय के नॉन कॉलेजिएट वूमेंस एजुकेशन बोर्ड का निदेशक बना दिया।

इस बीच जोशी ने नये रजिस्ट्रार विकास गुप्ता की नियुक्ति की अधिसूचना जारी कर दी जिनका बुधवार को कार्यकारी परिषद् ने साक्षात्कार किया और नियुक्ति को मंजूरी दे दी। बहरहाल, इसी दिन त्यागी ने पी. सी. झा को कार्यवाहक रजिस्ट्रार और साउथ कैंपस का निदेशक नियुक्त करने की अधिसूचना को मंजूरी दे दी। मंत्रालय ने कुलपति और प्रति कुलपति के बीच चल रही इस वर्चस्व की लड़ाई में दखल दिया और कहा कि त्यागी द्वारा की गई नियुक्तियां ‘‘वैध” नहीं हैं क्योंकि वह छुट्टी पर हैं। वर्चस्व की लड़ाई तब और तेज हो गई जब झा ने मंत्रालय को पत्र लिखकर खुद को ‘‘कार्यवाहक रजिस्ट्रार”बताया और कहा कि त्यागी द्वारा लिए गए सभी निर्णय विश्वविद्यालय के नियमों के मुताबिक हैं। मंत्रालय ने पत्र पर आपत्ति जताई और विश्वविद्यालय को उनके खिलाफ कड़ी कार्रवाई करने के निर्देश दिए। इस बीच दिल्ली विश्वविद्यालय ने बृहस्पतिवार को कार्यकारी परिषद् की जरूरी बैठक बुलाई है। त्यागी के पूर्ववर्ती दिनेश सिंह की भी सरकार से तनातनी चली थी और उन्हें हटाने की लगातार मांग हुई लेकिन उन्होंने अपना कार्यकाल पूरा किया।