राजस्थान: कोटा में बच्चों की मौतों का सिलसिला 104 पर पहुंचा

कोटा, राजस्थान के कोटा शहर में बच्चों की मौत का खुला ताण्डव अब भी थमने का नाम नहीं ले रहा है। ख़बरों के अनुसार ये आंकड़ा अब 104 पर आ गया है। जहाँ 1 जनवरी 2020को 3 बच्चे काल के ग्रास में

कोटा, राजस्थान के कोटा शहर में बच्चों की मौत का खुला ताण्डव अब भी थमने का नाम नहीं ले रहा है। ख़बरों के अनुसार ये आंकड़ा अब 104 पर आ गया है।  जहाँ 1 जनवरी 2020 को 3 बच्चे काल के ग्रास में समाये थे वही बीते गुरूवार को भी एक बच्चा और ख़त्म हो गया। आपको बता दें की कोटा के जे के लोन अस्पताल में पिछले  कुछ दिनों से बच्चों की मौतों का सिलसिला सा चल पड़ा है।  इन बच्चों में से कुछ की मौत गंभीर निमोनिया,  मेनिंगोएनसेफेलाइटिस, जन्मजात निमोनिया,सेप्सिस और सांस संबंधी बीमारी के कारण भी हो रहीं हैं। 

खबरों के अनुसार आज  कोटा के प्रभारी मंत्री प्रताप सिंह खाचरियावास और स्वास्थ्य मंत्री रघु शर्मा भी आज कोटा पहुँचने वाले हैं और इसके अलावा  केंद्र की हाई लेवल टीम के भी जल्द ही पहुँचने का अनुमान है। इस बीच इन मौतों पर दलगत राजनीति आरम्भ हो चुकी है। जहाँ बीजेपी  ने शिशुओं की मौत के लिए राजस्थान की  कांग्रेस शासित सरकार को निशाना बनाया है।  वहीं बीजेपी के ही  कार्यकारी अध्यक्ष जे पी नड्डा ने इस मामले की जांच के लिए अपने चार सांसदों की एक समिति भी बनाई है। इसके पहले बीजेपी नेताओं और पूर्व स्वास्थ्य मंत्रियों राजेंद्र सिंह राठौड़ और कालीचरण सराफ ने विगत सोमवार को अस्पताल का दौरा किया था। इसी बीच बीजेपी नेताओं के दौरे को लेकर कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने अस्पताल के बाहर प्रदर्शन किया और आरोप लगाया कि बीजेपी  मामले का राजनीतिकरण कर रही है। कोटा से सांसद एवं लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने शिशुओं की मौत पर रविवार को चिंता व्यक्त की थी और राज्य सरकार से इस मामले में संवेदनशीलता के साथ कार्रवाई करने की अपील की थी।
 
इधर राजस्थान सरकार ने कल गुरुवार को भारत सरकार के स्वास्थ्य मंत्रालय की रिपोर्ट जारी की है जिसमें यह बताया गया है कि खराब प्रदर्शन वाले 10 एनआईसीयू में से तो 9 बीजेपी शासित राज्यों में हैं।  इनमें से उत्तर प्रदेश के तीन अस्पताल हैं जिसमें लखनऊ भी शामिल है। वहीं  बिहार के चार हैं, झारखंड और गुजरात का एक न्यू मेटल आईसीयू भी है। आपको बता दें कि इसके पहले कोटा में इस प्रकार का तांडव हो चूका है और  मौतों का यह आंकड़ा नया नहीं है। जहां 2014  में 15719 बच्चे भर्ती हुए, जिसमें 1198 बच्चों को बचाया नहीं जा सका.  अगले साल यानी 2015 में 17579 बच्चे भर्ती हुए जिसमें 1260 बच्चों की मौत हुई थी। वहीं  साल 2018 और 2019 में भी यही सिलसिला चला आ रहा है। 
 
केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री डॉ. हर्ष वर्धन ने सूचित किया है कि उन्होंने इस बारे में राजस्थान के मुख्यमंत्री से बात की है। उनके मुताबिक, केंद्र सरकार ने राजस्थान सरकार को बच्चों के इलाज में हर संभव मदद देने का भरोसा दिया है। डॉ. हर्ष वर्धन ने राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत  को यह भी स्पष्ट किया है कि  जे.के. लोन हॉस्पिटल को वित्त वर्ष 2019-20 में अग्रिम राशि के तौर पर पर 91 लाख रुपये पहले ही दिए जा चुके हैं। यह राशि नेशनल हेल्थ मिशन के तहत दी गई है। वहीं अगर कोटा जिले की बात करें तो वित्त वर्ष 2019 -20 के लिए इस जिले को 27 करोड़ 45 लाख रुपये आवंटित किए गए हैं।