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    केंद्रपाड़ा. बात हो रही है शेख हैदर (Sheikh Hyder) की,ओडिशा को वो कुख्यात और खतरनाक गैंगस्टर (Gangster) जिसने हाल ही में अस्पताल के वार्ड से सरेआम भागकर सुर्खियां बटोरी थी।  हालांकि, उसके 6 दिनों बाद ही उसे तेलंगाना से फिर पुलिस ने अपने गिरफ्त में ले लिए था। लेकिन कम ही लोग यह जानते होंगे कि हत्या (Murder) और अपहरण जैसे अपराधों के जरिए आतंक मचाने वाला ये यह खतरनाक शख्स कभी पेट पालने के लिए रिक्शा भी चलाता था। जेल पहुंचने से पहले एक अच्छी और बेहतरीन  जिंदगी  जीने वाले हैदर के पास ये सुविधाएं अपराध के रास्ते ही तो आई थीं।  

    रिक्शेवाले से बना कुख्यात  गैंगस्टर: 

    अगर हैदर कि जिंदगी देखें तो वह ओडिशा के केंद्रपाड़ा में 1980 के समय रिक्शा चलाने का काम करता था।   इसी केंद्रपाड़ा शहर के 66 साल के एक रिटायर्ड टीचर राबी पाटी बताते है कि, “शेख हैदर गरीब था और उसे परिवार को पालने और पैसा कमाने के लिए रिक्शा खींचना पड़ता था, लेकिन इसके बाद उसके स्थानीय अपराधी साथी रबिन के साथ हुए उसके संपर्क ने उसे अपराध की दुनिया में दाखिला दिला दिया  और गैंगस्टर्स के बीच उसका कद बढ़ने लगा।  ‘

    जी हाँ वो रबिन ही था, जिसने टीटो (सैयद उस्मान अली), सुलेमान और हैदर को यह काम सिखाया था।   ये तीनों आगे जाकर बड़े गैंगस्टर बने।  फिलहाल टीटो कई सालों से जेल में है।  इस पर केंद्रपाड़ा के वरिष्ठ वकील प्रदीप दास का कहना है कि, “जब टीटो, सुलेमान और हैदर, रबिन से अपराध के हर तरीके सीख रहे थे, तो उनके आपसी में ही दुश्मनी हुई, जो रबिन के घर के पास ही उसकी हत्या का एक प्रमुख कारण बनी।   यहीं  से टीटो गैंग का मुखिया बना।   बाद में इन तीनों के बीच दुश्मनी के फलस्वरूप सुलेमान की भी हत्या हुई।  “

    तब तक तो हैदर और कुख्यात हो गया, जब उसने 1991 में अपराधी बुल्ला सेठी को केंद्रपाड़ा में दिनदहाड़े कोर्ट परिसर में ही मार गिराया।   बाद में वह खुद 1997 में वो पुलिस के साथ हुए एनकाउंटर में घायल हो गया।   इसके बाद वो और टीटो साल 1999 में एक बार फिर साथ आए, लेकिन फिर सरकारी ठेकों को लेकर हुए आपसी विवाद के चलते  2 साल के अंदर ही ये फिर अलग हो गए।   इसके बाद मई 2005 में हैदर के कुछ साथियों ने सुलेमान के छोटे भाई की भी हत्या कर दी।   इस मामले में हैदर को जेल हो गयी और फिर मार्च 2011 में उसे उम्र कैद की सजा भी सुनाई गई।  

    पुलिस को बार-बार बदलनी पड़ती थी जेल: 

    इसके बाद तो हालात ऐसे हो गए थे कि पुलिस और जेल विभागों को भी हैदर को समय-समय पर अलग-अलग जेलों में रखना पड़ता था।   इसके पीछे प्रमुख कारण हैदर का नेटवर्क तोडना था।   वहीं फिर उसे बीते मार्च महीने के अंत में दर्द की शिकायत के चलते कटक स्थित एससीबी मेडिकल कॉलेज और अस्पताल लाया गया था।   यहां से वो अपने साथ आये पुलिसकर्मियों को बिरयानी में नशीली दवा मिलाकर खिलाने के बाद बीते 10 अप्रैल को भाग गया था।   इस लापरवाही के मामले में 6 पुलिसकर्मी सस्पेंड भी हुए थे।   इसके बाद हैदर को पकड़ने के लिए ओडिशा और तेलंगाना पुलिस ने मिलकर एक ऑपरेशन चलाया।   जिसके फलस्वरूप उसे 16-17 अप्रैल कि दर्मयानी पकड़ लिया गया।