सावरकर के मुद्दे पर शिवसेना-कांग्रेस आमने सामने

मुंबई, महाराष्ट्र में चुनावी द्वन्द अपने चरम पर है। जहाँ राहुल गाँधी ने अपने वक्तव्य में विनायक दामोदर सावरकर पर कथित टिपण्णी की वहीं अब बीजेपी भी इस मुद्दे पर शिवसेना से जवाब मांग रही है। बीजेपी अब

मुंबई, महाराष्ट्र में चुनावी द्वन्द अपने चरम पर है। जहाँ राहुल गाँधी ने अपने वक्तव्य में विनायक दामोदर सावरकर पर कथित टिपण्णी की वहीं अब बीजेपी भी इस मुद्दे पर शिवसेना से जवाब मांग रही है। बीजेपी अब शिवसेना के हिंदुत्व अजेंडे पर भी सफाई मांग रही है। विदित हो कि राहुल गाँधी ने हाल ही में बयान दिया था कि वे अपने ‘रेप इन इंडिया’ वाले बयान पर माफी नहीं मांगेगे क्यूंकि वे राहुल गांधी है, राहुल सावरकर नहीं। लेकिन उनका ये बयां कहीं न कहीं शिवसेना को भी नहीं पटा है। 

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जहाँ शिवसेना के कद्दावर नेता संजय राउत ने कहा है कि राहुल गाँधी का बयान बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है और उन्हें सावरकर का बलिदान समझने के लिए कोंग्रेसी अपने नेता को कुछ किताबें भेंट करें। संजय राउत ने मराठी में ये भी कहा , "हम पंडित नेहरू, महात्मा गांधी को भी मानते हैं, आप वीर सावरकर का अपमान ना करें, बुद्धिमान लोगों को ज्यादा बताने की जरूरत नहीं होती." दूसरे ट्वीट उनका कहना था कि "अगर आज भी आप वीर सावरकर का नाम लेते हैं तो देश के युवा उत्तेजित और उद्वेलित हो जाते हैं, आज भी सावरकार देश के नायक हैं और आगे भी नायक बने रहेंगे, वीर सावरकर हमारे देश का गर्व हैं। "

संजय राउत ने ये भी कहा कि राहुल इतिहास को नहीं बदल सकते हैं। वहीं कांग्रेस के साथ इस मुद्दे पर बढ़ते गतिरोध के बीच शिवसेना ने कहा है कि सावरकर पर पार्टी अपने पुराने स्‍टैंड पर कायम है। राउत ने यह भी स्पष्ट किया कि सावरकर विवाद से महाराष्‍ट्र में उद्धव ठाकरे सरकार को कोई खतरा नहीं है।इधर बीजेपी के नेता और महाराष्ट्र के पूर्व सीएम देवेंद्र फडणवीस ने राहुल गांधी के बयान और सावरकर के मुद्दे को लेकर शिवसेना पर तीखा हमला किया है। उन्होंने कहा है कि महाराष्ट्र और देश सावरकर का अपमान बर्दाश्त नहीं कर सकता है। फडणवीस ने शिवसेना को भी आड़े हाथों लेते हुए कहा कि वो सत्ता में रहने के लिए कैसे-कैसे लोगों के साथ समझौते कर रही है ये साफ हो गया है। 

जो भी हो लेकिन राहुल गाँधी के इस विवादस्पद वक्तव्य ने शिवसेना और कांग्रेस के बीच वैचारिक लकीर खींच दी है। शिवसेना एक तरह से तिलमिला गई है। क्यूंकि ये तो उनके नायक का अपमान था, जिसके नाम पर पार्टी वर्षों से सियासत करती आई है। आपको बता दें की इस वक़्त महाराष्ट्र में शिवसेना, कांग्रेस और एनसीपी सत्ता में साझीदार हैं। वहीं राहुल गांधी का सावरकर पर टिप्पणी एक तरह से शिवसेना की दुखती रग पर हाथ धरने जैसा हो गया है। अब देखना ये है कि सावरकर पर ये राजनीति शिवसेना -कांग्रेस को कितना दूर ले जाती है।