सुरक्षा एजेंसियो का बड़ा खुलासा, जम्मू-कश्मीर में रोहिंग्या को बसाने की पीछे बड़ी साजिश

  • 1999 से जम्मू में बसाने का काम शुरू हुआ
  • पाकिस्तान, सऊदी अरब और यूएई ने इसके लिए की फंडिंग
  • म्यांमार में 2015 में शुरू हुई थी नस्लीय भेदभाव और हिंसा

नई दिल्ली: देश की सुरक्षा एजेंसियों (Security Agencies) ने रोहिंग्या मुसलमानों (Rohingya Muslim) को लेकर एक बड़ा खुलासा किया है। एजेंसियो को जांच पड़ताल में पता चला है कि म्यांमार (Myanmar) से रोहिंग्या मुसलमानों को लाकर जम्मू (Jammu) में बसाने के पीछे एक बड़ी साजिश है। इस साजिस को रचने और उसे सफल बनाने के लिए पाकिस्तान (Pakistan) ने बड़े पैमाने पर पैसा लगाया है। जिसका मकसद कश्मीर की तरह इस क्षेत्र में भी मुसलमानों की जनसंख्या बढ़ाई जा सके। 

दरअसल, रोहिंग्या मुसलमानों को बसाने को लेकर की पिछले साल जांच शुरू की गई है। जिसमें सुरक्षा एजेंसियों को पता चला है कि, म्यांमार में नस्लीय भेदभाव और हिंसा के पहले से ही रोहिंग्यों को जम्मू में बसाने का काम किया जारहा है। इस जांच में दो दर्जन से ज्यादा परिवार ऐसे मिले हैं, जिन्हे 1999 में फारुख अब्दुल्ला (Farooq Abdullah) की सरकार के समय बसाया गया है। 

सऊदी, पाकिस्तान और यूएई से फंड

जांच एजेंसी से जुड़े एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया, “जम्मू कश्मीर में रोहिंग्या को बसने के पीछे म्यांमार में हुई हिंसा कारण नहीं है। एक बड़ी साजिस के तहत इन लोगों को यहां बसाया गया है।”

उन्होंने बताया कि, “जिस समय कश्मीर में आतंकवाद चरम पर था, उस समय को देखते हुए जम्मू-कश्मीर की एक एनजीओ ने पाकिस्तान, सऊदी अरब और यूएई के साथ मिलकर बड़े पैमाने पर रोहिंग्यों  को बसाने का काम किया। इसके लिए इन देशों से एनजीओ को बड़ी संख्या में पैसे मिलने की बात पता चली है।

घुसपैठियों ने बनवाए आधार कार्ड और राशन कार्ड 

एजेंसियो द्वारा की गई जांच में पकड़े गए परिवारों ने एनजीओ द्वारा बसाने की बात कबुल की है। एजेंसियो ने आशंका जताई है कि जैसे-जैसे जांच आगे बढ़ेगी वैसे- वैसे इन लोगों की संख्या में भी बढ़ोतरी होगी। जांच में यह भी पता चली है कि, इन लोगों ने स्थानीय अधिकारियों के साथ मिलकर आधार कार्ड और राशन कार्ड भी बनवा लिया है।