शिवसेना: चुनाव में CM पद का चेहरा बनाकर सिंधिया का फायदा उठाना कांग्रेस की बड़ी गलती

मुंबई: मध्यप्रदेश में कांग्रेस का हाल बेहाल हो रखा हैं। 16 मार्च को यह साफ़ हो जाएगा कि कौन सी पार्टी मध्यप्रदेश में बहुमत हासिल कर अपनी सरकार बनाने में कामयाब होगी। लेकिन हाल फिलहाल सबकी नज़र

मुंबई. मध्यप्रदेश में कांग्रेस का हाल बेहाल हो रखा हैं। 16 मार्च को यह साफ़ हो जाएगा कि कौन सी पार्टी  मध्यप्रदेश में बहुमत हासिल कर अपनी सरकार बनाने में कामयाब होगी। लेकिन हाल फिलहाल सबकी नज़र मध्यप्रदेश कि कमलनाथ सरकार पर हैं। एक के बाद एक बयान दिए जा रहे है। शिवसेना के अपने मुखपत्र सामना में कमलनाथ सरकार पर व्यंग करते हुए कहा कि  मध्यप्रदेश की सरकार अगर गिरती है तो उसकी वजह कांग्रेस का अंहकार है।

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सामना में यह साफ़ तौर पर कहा गया है कि ‘कमलनाथ सरकार कि ऐसी हालत का कारण कांग्रेस का घमंड, लापरवाही और नई पीढ़ी को कम आंकने की प्रवृत्ति है। कमलनाथ मध्यप्रदेश के पुराने नेता हैं।  उनकी आर्थिक शक्ति अधिक है इसलिए बहुमत के मुहाने पर रहते हुए यहां-वहां से विधायकों को इकट्ठा करके समर्थन प्राप्त किया था। ये सच भले ही हो फिर भी मध्यप्रदेश में ज्योतिरादित्य सिंधिया को नजरअंदाज कर राजनीति नहीं की जा सकती।’ 

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सामना में यह भी कहा गया कि भले ही पूरे मध्यप्रदेश में सिंधिया का असर न हो परंतु ग्वालियर और गुना जैसे बड़े क्षेत्रों में सिंधियाशाही का प्रभाव है। विधानसभा चुनाव के पहले ज्योतिरादित्य सिंधिया ही कांग्रेस की ओर से मुख्यमंत्री का चेहरा थे। लेकिन जीत के बाद उन्हें एक तरफ कर दिया गया और आलाकमान ने कुछ नहीं किया। 

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शिवसेना ने सामना में लिखा है, सिंधिया शुरू से ही नाखुश थे। वही कांग्रेस के वरिष्ठ नेता अपने गुरुर में चूर थे। सिंधिया ने बहुत कुछ नहीं केवल प्रदेश अध्यक्ष पद मांगा था लेकिन कांग्रेस यह भी देने में असमर्थ थी। उसके बाद उन्होंने राज्यसभा की उम्मीदवारी मांगी लेकिन कांग्रेस ने उनकी एक न सुनी और इसका अंत ज्योतिरादित्य के इस्तीफे और भाजपा में शामिल होकर हुआ।

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