नागरिकता संशोधन विधेयक: सदन से वाकआउट पर शिवसेना ने दी सफाई

मुंबई, बुधवार को महाराष्ट्र में हाल ही में कांग्रेस और एनसीपी के समर्थन से सरकार बनाने वाली शिवसेना ने बीच का रास्ता चुना। शिवसेना ने राज्यसभा की वोटिंग प्रक्रिया से दूर रहने काफैसला लिया और

मुंबई, बुधवार को महाराष्ट्र में हाल ही में कांग्रेस और एनसीपी के समर्थन से सरकार बनाने वाली शिवसेना ने बीच का रास्ता चुना। शिवसेना ने राज्यसभा की वोटिंग प्रक्रिया से दूर रहने का फैसला लिया और सदन से वॉकआउट कर लिया। यहां आपको यह भी बता दें कि लोकसभा में शिवसेना ने सिटिजनशिप अमेडमेंट बिल का समर्थन किया था। जहाँ लोकसभा में इस विधेयक के पक्ष में 311 वोट पड़े, वहीं विपक्ष में 80 वोट पड़े थे वहीं, राज्यसभा इसके पक्ष में 125 और विरोध में सिर्फ 99 मत पड़े थे । पड़े ऐसे में शिवसेना का यह कदम सबके लिए चौंकाने वाला था।

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इस पूरी प्रक्रिया में देखने वाली बात ये थी कि शिवसेना इस विधेयक पर राजयसभा में क्या रुख अपनाती है। आपको बता दें कि हाल ही में शिवसेना ने महाराष्ट्र में कांग्रेस-एनसीपी के साथ गठबंधन सरकार बनायी है। सोमवार को जहाँ शिवसेना ने नागरिकता संशोधन विधेयक का समर्थन किया और लोकसभा में इसको समर्थन भी दिया था। जिसके चलते कांग्रेस अध्यक्षा सोनिया गाँधी शिवसेना से नाराज हो गई। साथ ही ये खबर भी सामने आयी की कांग्रेस ने स्पष्ट शब्दों में शिवसेना को कहा की उनका ये रुख गठबंधन के लिए हानिकारक साबित हो सकता है और साथ ही कुछ मंत्रालय उनके लिए कोई अहमियत नहीं रखते। हालाँकि बाद में शिवसेना प्रमुख और महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे को स्वयं क्षतिपूर्ति के लिए मैदान में उतरना पड़ा। उन्होंने कहा की "सारी चीजें साफ होने तक इस बिल का समर्थन नहीं करेंगे। अगर किसी नागरिक को इस विधेयक से डर लग रहा है तो उसकी शंका को दूर किया जाना चाहिए। वे सभी हमारे नागरिक हैं और उन्हें अपने सवालों का जवाब मिलना चाहिए"। 

वैसे देखा जाए तो शिवसेना ने भले ही कुछ दिन पहले दो धर्म-निरपेक्ष पार्टियों के साथ मिलकर महाराष्ट्र में सरकार बनाई हो। लेकिन उसकी विचारधारा, बालासाहेब के जमाने से ही हमेशा हिन्दूवादी रही है। लिहाजा राज्यसभा में इस बिल का विरोध करना शिवसेना के लिए मुश्किल हो रहा था। लेकिन इस विधेयक के चलते जहाँ कांग्रेस-शिवसेना में मतैक्य हो रहा था फिर सोनिया गाँधी भी अपनी नाराज़गी इस पर दर्शा चुकी थी। मजबूरन इस उठापटक के चलते शिवसेना ने 24 घंटों के भीतर विधेयक पर अपना रुख बदल लिया। जिसके चलते कल उसने वोटिंग प्रक्रिया से दूर रहने का फैसला लिया और सदन से वॉकआउट भी कर गयी। 

इस पुरे प्रकरण पर शिवसेना नेता और सांसद संजय राउत ने सफाई देते हुए कहा कि "चूँकि इस विधेयक पर उठ रहे सवालों का जवाब सही ढंग से नहीं दिया गया है। इसलिए यह सही नहीं होगा कि की हम इसविधेयक का समर्थन करते या विरोध। हमने ये कभी भी नहीं कहा कि शरणार्थियों को नागरिकता न दी जाए, उन्हें नागरिकता मिलनी चाहिए। लेकिन जैसा की कहा जा रहा है कि अगर वोट बैंक की राजनीति के लिए साजिश हुई है तो उन्हें अगले 25 सालों तक वोटिंग का अधिकार भी नहीं दिया जाना चाहिए"। 

चाहे जो हो लेकिन कल राज्यसभा में वोटिंग प्रक्रिया से शिवसेना ने वाक-आउट करके फिलहाल तो अपने युति मित्रों को खुश कर लिया है।लेकिन ये देखना भी आगे प्रासंगिक होगा कि आगे क्या शिवसेना इसी तरह गठबंधन को बचाने के लिए अपने हिंदूवादी आदर्शो से समझौता करती रहेगी या सहस का परिचय देते हुए अपने मत पर अड़िग रहेगी।