Supreme court

नयी दिल्ली. केन्द्र ने बुधवार को उच्चतम न्यायालय (Supreme Court) को सूचित किया कि सुदर्शन टीवी (Sudarshan TV) के ‘बिन्दास बोल’ कार्यक्रम (Bindas Bol Program) को पहली नजर में कार्यक्रम संहिता का उल्लंघन (violates program code) करने वाला पाया गया है और चैनल को कारण बताओ नोटिस (Show Cause Notice) जारी किया गया है न्यायमूर्ति धनंजय वाई चंद्रचूड़, न्यायमूर्ति इन्दु मल्होत्रा और न्यायमूर्ति के एम जोसेफ की पीठ को सॉलिसीटर जनरल तुषार मेहता ने यह जानकारी दी और कहा कि सुदर्शन टीवी को कारण बताओ नोटिस का जवाब 28 सितंबर तक देना है और जवाब नहीं मिलने पर उसके खिलाफ एकपक्षीय निर्णय लिया जायेगा।

मेहता ने वीडियो कॉन्फ्रेंस से मामले की संक्षिप्त सुनवाई के दौरान कहा कि कार्यक्रम संहिता के उल्लंघन के बारे में सुदर्शन टीवी को भेजे गये चार पन्ने के कारण बताओ नोटिस का लिखित जवाब मांगा गया है। यह नोटिस केबल टेलीविजन नेटवर्क कानून, 1995 के तहत आज ही दिया गया है। सरकार के अनुसार इस कार्यक्रम में दर्शाये गये तथ्य पहली नजर में कार्यक्रम संहिता के अनुरूप नहीं हैं। मेहता ने सुझाव दिया कि इस मामले की सुनवाई चैनल का जवाब आने तक के लिये स्थगित कर दी जाये।

पीठ ने टिप्पणी की कि अगर इस मामले की सुनवाई नहीं हो रही होती तो इसकी सारी कड़ियों का प्रसारण हो गया होता। पीठ ने सुनवाई पांच अक्ट्रबर के लिये स्थगित करते हुये कहा कि केन्द्र इस मामले में लिये गये निर्णय के बारे में एक रिपोर्ट दाखिल करेगा। पीठ ने कहा कि इस कार्यक्रम की शेष कड़ियों के प्रसारण पर रोक लगाने संबंधी 15 सितंबर का आदेश उस समय तक प्रभावी रहेगा। इससे पहले, सुनवाई शुरू होते ही न्यायालय ने इसमें हस्तक्षेप के लिये आवेदन करने वालों से कहा कि वे लिखित दलीलें पेश करें। न्यायालय ने 21 सितंबर को नौकरशाही में मुस्लिमों की कथित घुसपैठ के बारे में सुदर्शन टीवी के कार्यक्रम ‘बिन्दास बोल’ को नियंत्रित करने के स्वरूप को लेकर काफी माथापच्ची की थी और कहा था कि वह बोलने की आजादी में कटौती नहीं करना चाहता है क्योंकि यह ‘विदेशी फंडिंग’ और ‘आरक्षण’ से जुड़े मुद्दों का जनहित का कार्यक्रम है।

न्यायालय नफरत फैलाने वाले भाषण जैसे कई मुद्दों को लेकर दायर याचिका पर सुनवाई के दौरान पहले ही ‘यूपीएससी जिहाद’ की कड़ियों के प्रसारण पर रोक लगा चुका है। परंतु वह इस बात से नाराज है कि चैनल ने अपने हलफनामे में एक अंग्रेजी समाचार चैनल के उन दो कार्यक्रमों का क्यों उल्लेख किया जो ‘हिन्दू आतंकवाद’ के बारे में थे। पीठ ने सुदर्शन न्यूज चैनल से सवाल किया था, ‘‘आपने अंग्रेजी न्यूज चैनल के कार्यक्रमों के बारे में क्यों कहा। आपसे किसने कार्यक्रम के बारे में राय मांगी थी।” चैनल के प्रधान संपादक सुरेश चव्हाण के अधिवक्ता विष्णु शंकर जैन ने कहा कि उनके हलफनामे में ‘हिन्दू आतंकवाद’ पर अंग्रेजी चैनल के कार्यक्रम का जिक्र है क्योंकि उनसे पहले पूछा गया था कि ‘यूपीएससी जिहाद’ कड़ियों में क्यों मुस्लिम व्यक्तियों को टोपी और हरा रंग धारण किये दिखाया गया है।

पीठ ने सवाल किया था, ‘‘क्या इसका मतलब यह है कि हर बार जब न्यायाधीश सवाल पूछेंगे तो आप अपना दृष्टिकोण बतायेंगे? अगर यही मामला है तो न्यायाधीश सवाल पूछना बंद कर देंगे। आपसे उन सभी सवालों का जवाब दाखिल करने की अपेक्षा नहीं की जाती है, जो न्यायाधीश पूछते हैं। न्यायाधीश तो बेहतर जानकारी प्राप्त करने लिये सवाल करते हैं।” (एजेंसी)