नोटबंदी को हुए 3 साल पूरे, पीएम मोदी ने बंद किए थे 500 और 1000 के नोट

नई दिल्ली, 8 नवंबर 2016 इसी दिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रात 8 बजे 500 और 1000 के पुराने नोट बंद करने की घोषणा की थी. इस खबर से देश में मानो भूचाल सा आ गया था. बैंक और एटीएम के बाहर लोगो की लाइने

नई दिल्ली, 8 नवंबर 2016 इसी दिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रात 8 बजे 500 और 1000 के पुराने नोट बंद करने की घोषणा की थी. इस खबर से देश में मानो भूचाल सा आ गया था. बैंक और एटीएम के बाहर लोगो की लाइने लग गई थी. आम जनता की रातों की निंद गायब हो गई थी. नोटबंदी का उद्देश्य केवल काले धन पर नियंत्रण ही नहीं बल्कि जाली नोटों से छुटकारा पाना भी था. पीएम मोदी के इस फैसले का विपक्ष ने जमकर विरोध किया. सियासी बयानबाजी भी खूब हुई. नोटबंदी का प्रभाव संगठित और असंगठित क्षेत्रों के कारोबार पर पड़ा था. नोटबंदी के बाद करीब 99.30% पुराने नोट बैंक में जमा हुए थे.

आज नोटबंदी को 3 साल पूरे हुए. 3 साल बाद आम जनता अपनी जिन्दगी सवारने की कोशिश में है. तो वही विपक्ष नोटबंदी को लेकर मोदी सरकार की जमकर आलोचना  कर रहे है.  
 
नोटबंदी के तीन साल पूरे होने पर कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने मोदी सरकार पर हमला बोला. राहुल गांधी ने ट्वीट करते हुए कहा, नोटबंदी आतंकी हमले को तीन साल गुजर गए हैं जिसने भारतीय अर्थव्यवस्था को तबाह कर दिया, कई लोगों की जान ले ली, कई छोटे कारोबार खत्म कर दिए और लाखों भारतीयों को बेरोजगार कर दिया.
 

 
 
कांग्रेस के प्रमुख प्रवक्ता रणदीप सुरजेवाला ने भी नोटबंदी को लेकर पीएम मोदी पर निशाना साधा. उन्होंने ट्वीट कर कहा कि सुल्तान मोहम्मद बिन तुगलक ने 1330 में देश की मुद्रा को अमान्य करार दिया था. आज के तुगलक ने भी आठ नवंबर, 2016 को यही किया था.उन्होंने कहा कि तीन साल गुजर गए और देश भुगत रहा है क्योंकि अर्थव्यवस्था ठप हो चुकी है, रोजगार छिन गया है. न ही आतंकवाद रुका और न ही जाली नोटों का कारोबार थमा है. सुरजेवाला ने पूछा कि इसके लिए जिम्मेदार कौन है.

 
 
युवा कांग्रेस ने भारतीय रिजर्व बैंक मुख्यालय के सामने विरोध प्रदर्शन किया. हंगामे को देखते हुए पुलिस ने कई कार्यकर्ताओं को हिरासत में ले लिया.

 
 
कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा ने कहा कि नोटबंदी एक आपदा साबित हुई है जिसने देश की अर्थव्यवस्था को बर्बाद कर दिया. उन्होंने ट्वीट कर लिखा कि नोटबंदी को तीन साल हो गए. सरकार और इसके नीम-हकीमों द्वारा किए गए, ‘नोटबंदी सारी बीमारियों का शर्तिया इलाज’ के सारे दावे एक-एक करके धराशायी हो गए. नोटबंदी एक आपदा साबित हुई जिसने हमारी अर्थव्यवस्था बर्बाद कर दी. इस ‘तुग़लकी’ कदम की जिम्मेदारी अब कौन लेगा?

 
पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने ट्वीट करते हुए लिखा कि आज ‘नोटबंदी आपदा’ की तीसरी वर्षगांठ है. इसकी घोषणा के कुछ ही मिनटों के भीतर मैंने कहा था कि यह अर्थव्यवस्था और लाखों लोगों के जीवन को बर्बाद कर देगा. प्रसिद्ध अर्थशास्त्री, आम लोग और सभी विशेषज्ञ अब इससे सहमत हैं. रिजर्व बैंक के आंकड़ों से यह भी पता चला है कि यह एक निरर्थक अभ्यास था.