Supermoon

    अगर आप नहीं जानते हैं तो बता दें कि आज इस साल का दूसरा और पहला पूर्ण चंद्रग्रहण (Lunar Eclipse) है। पिछले साल के जनवरी महीने के बाद ऐसा पहली बार हो रहा है। छह साल में पहली बार सुपरमून और चंद्रग्रहण (Super Moon and Lunar Eclipse) का अनूठा संयोग बना है। यानी आसमान में चांद आज ज्यादा बड़ा और चमकीला दिखाई देगा। आज चांद धरती के सबसे नजदीक है।

    क्या होता है सुपरमून?

    जब चांद पृथ्वी के सबसे नजदीक होता है तो वह हमें बड़ा और चमकीला नजर आता है। इसी घटना को सुपरमून कहते हैं। इस दौरान सामान्य चंद्रग्रहण से तुलना में चांद 30 प्रतिशत अधिक बड़ा और 14 प्रतिशत अधिक चमकदार दिखाई देता है। 

    नासा के अनुसार, सुपरमून तब होता है जब चांद की कक्षा पृथ्वी के सबसे नजदीक होती है और पूर्णिमा का समय होता है। नासा के अनुसार, वर्ष 1979 में एस्ट्रोलॉजर रिचर्ड नोल ने प्रथम बार सुपरमून शब्द का इस्तेमाल किया था। उनके मुताबिक एक नॉर्मल वर्ष में दो से चार सुपरमून हो सकते हैं।

    क्या भारत में दिखेगा?

    भारत के अधिकांश लोग चंद्रग्रहण नहीं देख पाएंगे क्योंकि ग्रहण के समय भारत के अधिकांश हिस्सों में चांद पूर्वी क्षितिज से नीचे होगा। केवल भारत के कुछ पूर्वी हिस्सों में लोग चंद्रग्रहण का आखिरी हिस्सा देख सकेंगे। इन हिस्सों में अगरतला, आइजोल, कोलकाता, चेरापूंजी, कूचबिहार, डायमंड हार्बर, दीघा, गुवाहाटी, इंफाल, ईटानगर, कोहिमा, लुमडिंग, मालदा, उत्तर लखीमपुर, पुरी, सिलचर शामिल हैं। यह ग्रहण खासकर दक्षिण अमेरिका, उत्तरी अमेरिका, एशिया, ऑस्ट्रेलिया, अंटार्कटिका, प्रशांत महासागर और हिंद महासागर क्षेत्र में भी देखा जा सकेगा। 

    समय

    चंद्र ग्रहण दोपहर 2 बजकर 17 मिनट पर शुरू होगा और शाम 7 बजकर 19 मिनट पर खत्म होगा। भारत के पूर्वोत्तर राज्यों के कुछ हिस्से, पश्चिम बंगाल के कुछ हिस्सों, ओडिशा के कुछ हिस्सों और अंडमान और निकोबार द्वीप समूह के कुछ हिस्सों में कुछ समय के लिए दिखाई देगा। 

    कितने प्रकार के होते हैं चंद्रग्रहण 

    पूर्ण चंद्रग्रहणः इसमें चांद और सूर्य के बीच में धरती आ जाती है और अर्थ चांद को पूरी तरह से ढक लेता है। 

    आंशिक चंद्रग्रहणः ऐसे चंद्रग्रहण में सूरज और चांद के बीच में पृथ्‍वी पूरी तरह से नहीं आ पाती और पृथ्‍वी की शैडो चांद के कुछ हिस्‍से पर ही पड़ती है।

    उपच्‍छाया चंद्रग्रहणः यह उपच्‍छाया चंद्रग्रहण, पृथ्‍वी की छाया वाला चंद्रग्रहण माना जाता है। इसमें चांद के आकार पर साइज किसी प्रकार का असर नहीं पड़ता है। इसमें चांद की रोशनी धुंधली हो जाती है और उसका रंग मटमैला हो जाता है। इस ग्रहण में चांद, पृथ्वी और सूरज तीनों एक लाइन में नहीं होते हैं इसलिए इसे पेनुमब्रल या उपच्छाया चंद्रग्रहण कहा जाता है।