कृषि मंत्री तोमर से मिला किसानों का प्रतिनिधि मंडल, कहा- कानून किसान हितैषी, ना हो बदलाव

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नई दिल्ली: कृषि कानूनों (Agriculture Bill) के विरोध में किसानों का आंदोलन (Farmers Protest) 26वे दिन भी जारी है, हजारों की संख्या में किसान दिल्ली-हरियाणा (Delhi-Haryana) के सिंघु और टिकरी सीमा (Singhu & Tikri Border) पर बैठे हैं। वहीं कई किसान संगठन (Farmer Organization) इस कानून का समर्थन कर रहे हैं। इसी को लेकर मंगलवार को किसान संगठनों के दो प्रतिनिधि मंडल कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर (Narendra Singh Tomar) से मिले है। इन सभी किसान नेताओं ने कृषि कानूनों का समर्थन करते हुए इसे किसान हितैषी बताया, साथ ही इसमें कोई बदलाव नहीं करने का आग्रह किया।

कृषि कानून के समर्थन में आए किसान संगठन में भारतीय किसान यूनियन और किसान संघर्ष समिति के किसान नेता शामिल थें. विज्ञान भवन में कानून को लेकर कृषि मंत्री और प्रतिनिधि मंडल के बीच कई घंटे तक बात हुई. जिसके बाद सभी नेताओं ने अपना समर्थन सरकार को दिया. 

कृषि कानून में ना हो संशोधन 

बैठक के बाद कृषि मंत्री तोमर ने कहा, “आज अनेक किसान यूनियन के पदाधिकारी आए और उनकी ये चिंता है कि सरकार बिलों में कोई संशोधन करने जा रही है। उन्होंने कहा है कि ये बिल किसानों की दृष्टि से बहुत कारगर हैं, किसानों के लिए फायदे में हैं और बिल में किसी भी प्रकार का परिवर्तन नहीं किया जाना चाहिए।” उन्होंने कहा, “मुझे आशा है कि जल्दी उनका विचार-विमर्श पूरा होगा, वो चर्चा करेंगे और हम समाधान निकालने में सफल होंगे।”

90 प्रतिशत किसानों ने कानून नहीं पढ़ा

कृषि मंत्री के साथ बैठक के बाद इंडियन किसान यूनियन के राष्ट्रीय अध्यक्ष चौधरी राम कुमार वालिया ने कहा, “कानून ठीक हैं लेकिन जो भ्रांतियां फैलाई जा रही हैं उनको दूर करने की जरूरत है, 90 प्रतिशत किसानों ने कानून नहीं पढ़ा है। मेरा प्रदर्शनकारियों से आग्रह है कि आंदोलन में राजनीति हावी न होने दें।”

कानून को वापस लेने राष्ट्रपति को सौंपा जाएगा पत्र  

कांग्रेस नेता केसी वेणुगोपाल ने कहा, “तीन कृषि कानूनों को वापस लेने का आग्रह करने के लिए पूरे भारत से लगभग 2 करोड़ हस्ताक्षर लिए गए हैं। इसे 24 दिसंबर को राहुल गांधी के नेतृत्व में कांग्रेस नेताओं के प्रतिनिधिमंडल द्वारा भारत के राष्ट्रपति को सौंपा जाएगा।”