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  • बाबा बौखनाग की नाराजगी को स्थानीय लोगों ने बताया हादसे की वजह

नवभारत डिजिटल डेस्क: उत्तरकाशी के सिलक्यारा सुरंग से सभी 41 मजदूरों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया है। उसके बाद से देश में जश्न का माहौल है। पीएम मोदी, उत्तराखंड के सीएम और बॉलीवुड के कई स्टार्स ने इस रेस्क्यू ऑपरेशन की सफलता पर जमकर बधाई दी। सिलक्यारा सुरंग से सभी 41 मजदूर अब खुली हवा में सांस ले रहे हैं। 17 दिनों तक सुरंग के अंदर फंसे मजदूरों के परिजनों के चेहरे पर अब एक ऐसी मुस्कान फैली है जो बताती है कि उम्मीद पर दुनिया कायम है। इस रेस्क्यू ऑपरेशन की सफलता का श्रेय एक ऐसे शख्स को भी जाता है जिसका जिक्र न करना एक तरह से बेईमानी होगी। हम बात कर रहे हैं अर्नोल्ड डिक्स की, जो रेस्क्यू ऑपरेशन को सफलता से अंजाम दे चुके हैं। चलिए जानते हैं अर्नोल्ड डिक्स बारे में..

कौन हैं अर्नोल्ड डिक्स
अर्नोल्ड डिक्स ऑस्ट्रेलिया के सिटीजन हैं। उन्हें अंडरग्राउंड सुरंग और परिवहन बुनियादी ढांचे में महारत हासिल है। इसके साथ ही अर्नोल्ड डिक्स इंटरनेशनल टनलिंग एंड अंडरग्राउंड स्पेस एसोसिएशन के प्रेसिडेंट भी हैं। ब्रिटिश इंस्टीट्यूट ऑफ इन्वेस्टिगेटर्स में अर्नोल्ड डिक्स बैरिस्टर भी हैं। अर्नोल्ड डिक्स को अमेरिका के नेशनल फायर प्रोटेक्शन एसोसिएशन ने साल 2022 में विशेष अवॉर्ड से सम्मानित किया था। तीन दशकों से उन्होंने अपने करियर में कई अहम भूमिका निभाई है। भूमिगत निर्माण के दौरान किस तरह की समस्या आ सकती है और उन समस्याओं का हल कैसे तलाशा जाए और आने वाले खतरों में भी कैसे काम को सफल बनाया जाए इन सभी में अर्नोल्ड डिक्स ने महारत हासिल की है।    

 
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    रेस्क्यू ऑपरेशन की सफलता पर बोले अर्नोल्ड डिक्स
    “हम शांत थे और हम जानते थे कि वास्तव में हमें क्या करना है। हमने एक अद्भुत टीम के रूप में काम किया। भारत के सर्वश्रेष्ठ इंजीनियर, सेना, सभी एजेंसियां… इस सफल मिशन का हिस्सा बनना खुशी की बात है…”

     

    12 नवंबर से फंसे थे 41 मजदूर
    12 नवंबर को हुए इस हादसे के बाद से मजदूरों को बचाने के लिए युद्धस्तर पर रेस्क्यू ऑपरेशन चलाया गया। इस दौरान कई अड़चने आई और उन्हें दूर करने के लिए आधुनिक तकनीक से लेकर भगवान का भी सहारा लिया गया। इस ऑपरेशन के दौरान ऑगर मशीन ने दम तोड़ दिया तो ऑपरेशन की सफलता के लिए अर्नोल्ड डिक्स ने बाबा बौखनाग का पूजा किया। वहीं ऑपरेशन को सफल बनाने का जिम्मा रैट माइनर्स को सौंपा गया और उसके बाद सिलक्यारा सुरंग में गत 17 दिन से फंसे 41 श्रमिकों को निकालने की कोशिश में मंगलवार को बड़ी सफलता मिली और सभी मजदूरों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया।
     

    बाबा बौखनाग की नाराजगी को स्थानीय लोगों ने बताया हादसे की वजह

    इस ऑपरेशन के दौरान कई ऐसी बातें भी सामने आईं जो स्थानीय लोग कह रहे थे, जैसे सुरंग के निर्माण के दौरान बाबा बौखनाग के मंदिर की अनदेखी की गई। जिसके बाद स्थानीय लोगों ने मांग की है कि बाबा बौखनाग का स्थाई मंदिर बनाया जाए।फिलहाल हादसे के पीछे की असली वजह अभी तक सामने नहीं आई है। क्योंकि हादसे के बाद सबसे बड़ी चुनौती थी कि मजदूरों को बाहर कैसे निकाला जाए? रेस्क्यू ऑपरेशन की सफलता के बाद सरकार हादसे की खामियों का पता लगाने में जुटी है, ताकि भविष्य में ऐसे हादसे दोबारा न हों।