bipin rawat
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    नई दिल्ली: तमिलनाडु के कन्नूर में बुधवार को एक बड़ा हादसा हुआ है। भारत के पहले चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ (सीडीएस) बिपिन रावत (Bipin Rawat) को ले जा रहा सेना का एक हेलीकॉप्टर दुर्घटनाग्रस्त हो गया। जिसमें सीडीएस बिपिन रावत , उनकी पत्नी और अन्य सैन्याधिकारी सवार थे। खबर के जानकारी मिलते ही रक्षामंत्री राजनाथ सिंह जनरल रावत के घर पहुंचे और उनकी बेटी से बातचीत की।

    कुछ समय बाद भारतीय वायुसेना ने सीडीएस जनरल बिपिन रावत, उनकी पत्नी और 11 अन्य लोगों की हेलीकॉप्टर दुर्घटना में मौत की पुष्टि की। इस बात की जानकारी मिलते ही रक्षा मंत्री सहित देश के कई बड़े मंत्रियों ने शोक व्यक्त किया। आइये जानते है बिपिन रावत का कार्यकाल और उनके बारें में। 

    सीडीएस बिपिन रावत का जन्म 16 मार्च 1958 को देहरादून में हुआ था। उनके पिता एलएस रावत भी सेना में थे और उन्हें लेफ्टिनेंट जनरल एलएस रावत के नाम से जाना जाता था। सीडीएस रावत सेंट एडवर्ड स्कूल, शिमला और राष्ट्रीय रक्षा अकादमी, खड़कशाला के पूर्व छात्र थे। उन्होंने मद्रास विश्वविद्यालय से रक्षा अध्ययन में एम.फिल की डिग्री और प्रबंधन और कंप्यूटर अध्ययन में डिप्लोमा प्राप्त किया था। दिसंबर 1978 में, उन्हें देहरादून में भारतीय सैन्य अकादमी से ग्यारह गोरखा राइफल्स की 5 वीं बटालियन में तैनात किया गया। जहां उन्हें ‘स्वॉर्ड ऑफ ऑनर’ से भी नवाजा गया था।

    आतंकवाद विरोधी और ऊंचाई युद्ध अभियानों के विशेषज्ञ

    जनरल बिपिन रावत ने मिलिटरी मीडिया स्ट्रॅटेजिक स्टडी पर अपना शोध पूरा किया और 2011 में चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय, मेरठ से डॉक्टरेट ऑफ फिलॉसफी से सम्मानित किया गया। उन्होंने ‘राष्ट्रीय सुरक्षा’ और ‘नेतृत्व’ पर कई लेख भी लिखे, जो विभिन्न पत्रिकाओं और प्रकाशनों में प्रकाशित हुए थे।

    बता दें कि  जनरल बिपिन रावत को ऊंचाई वाले युद्धक्षेत्रों और उग्रवाद विरोधी अभियानों का अनुभव है। उन्होंने 1986 में चीन के साथ नियंत्रण रेखा पर एक पैदल सेना बटालियन के प्रमुख के रूप में कार्य किया। उन्होंने कश्मीर घाटी में राष्ट्रीय राइफल्स और 19वीं इन्फैंट्री डिवीजन के क्षेत्र का भी नेतृत्व किया। उन्होंने कांगो में संयुक्त राष्ट्र शांति मिशन का भी नेतृत्व किया था।

    सीडीएस बिपिन रावत के नेतृत्व में भारतीय सेना ने भी कई ऑपरेशन किए हैं। पूर्वोत्तर में आतंकवाद को कम करने में इनकी अहम भूमिका रही है। जून 2015 में मणिपुर में हुए आतंकी हमले में 18 जवान शहीद हो गए थे। इसके बाद 21 पैरा कमांडो ने सीमा पार म्यांमार में एनएससीएन आतंकवादी संगठन के कई सदस्यों को मार गिराया। 21 पारा तब थर्ड कॉर्प्स के अधीन था, जिसके कमांडर बिपिन रावत थे।

    इसके अलावा, 29 सितंबर 2016 को भारतीय सेना ने पीओके में एक सर्जिकल स्ट्राइक किया, जिसमें कई आतंकवादी शिविरों और आतंकवादियों का सफाया किया गया। उरी में एक सैन्य अड्डे और पुलवामा में एक सीआरपीएफ बेस पर हमले में कई सैनिकों के मारे जाने के बाद भारतीय सेना ने ऑपरेशन को अंजाम दिया।

    चार दशकों तक की देश की सेवा 

    प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी ने साल  2019 में 15 अगस्त के दिन देश की तीनों सेनाओं के बीच समन्वय को और बेहतर बनाने के लिए लाल किले की प्राचीर से चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ (CDS) के एक नए पद के निर्माण की घोषणा की। उसके कुछ ही समय बाद, भारतीय सेना के प्रमुख के पद से सेवानिवृत्त होने के बाद, बिपिन रावत ने रक्षा बलों के प्रमुख के रूप में पदभार संभाला।

    अपनी चार दशकों की सेवा में जनरल रावत ने ब्रिगेड कमांडर, जनरल ऑफिसर कमांडिंग-इन-चीफ (जीओसी) दक्षिणी कमान, जनरल स्टाफ ऑफिसर ग्रेड 2 सैन्य संचालन निदेशालय, सैन्य सचिव शाखा में कर्नल सैन्य सचिव और उप सैन्य सचिव के रूप में कार्य किया। उन्होंने कमांड विंग में वरिष्ठ कोच के रूप में भी काम किया।