कैप्टन अमरिंदर सिंह के बाद क्या भूपेश बघेल और अशोक गहलोत का भी कटेगा पत्ता? कांग्रेस आलाकमान जल्द ले सकती है फैसला

    नई दिल्ली: देश की सबसे पुरानी राजनीतिक पार्टी कांग्रेस लगातार बिखरती जा रहा है। युवा और बुजुर्ग नेताओं में शुरू लड़ाई अब पार्टी के अस्तित्व पर आ गई है। इसी लड़ाई के वजह से मध्य प्रदेश की सरकार गंवाने वाली कांग्रेस ने बची सरकारों को बचाने के लिए कदम उठाना शुरू कर दिया है। इसी क्रम में शनिवार को पंजाब के मुख्यमंत्री अमरिंदर सिंह ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया। अमरिंदर के इस्तीफे के बाद अब चर्चा है कि अब कांग्रेस हाईकमान जल्द ही अपने दो और असंतुष्ट राज्य राजस्थान और छत्तीसगढ़ में भी बदलाव कर सकती है।

    छत्तीसगढ़ में बघेल की CM की कुर्सी खतरे में

    पिछले कई दिनों से छत्तीसगढ़ कांग्रेस में भी घमासान शुरू है। यहां मुख्यमंत्री भूपेश बघेल और राज्य के स्वास्थ्य नंत्री और कांग्रेस के कद्दावर नेता टीएस सिंहदेव में मतभेद शुरू है। सिंहदेव और उनके समर्थक लगातार कांग्रेस आलाकमान से बघेल को मुख्यमंत्री की कुर्सी से उतारकर उन्हें बिठाने की मांग कर रहे हैं। इस मामले में कांग्रेस आलाकमान ने दोनों नेताओं को दिल्ली भी बुलाया था। CM बघेल दो बार दिल्ली का दौरा कर चुके हैं। वहीं सिंहदेव भी दिल्ली में कांग्रेस आलाकमान से बैठक कर चुके हैं।

    गौरतलब है कि जब भूपेश बघेल को जब छत्तीसगढ़ का मुख्यमंत्री बनाने का फैसला किया था तब कांग्रेस आलाकमान और राहुल गांधी ने रोटेशन के आधार पर बघेल और सिंहदेव को मुख्यमंत्री रहने की बात कही थी। जिसके बाद सिंहदेव ने भी इसपर सहमति जताई थी और बघेल को मुख्यमंत्री बनाया गया था।

    वहीं अब CM बघेल के ढाई साल के कार्यकाल के बाद अब सिंहदेव ने उनके खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। हालांकि दोनों नेताओं की कांग्रेस आलाकमान से बैठक के बाद भी यह मामला अभी तक सुलझा नहीं है। आलाकमान इस मामले में जल्द फैसला ले सकता है।

    राजस्थान में सचिन बनाम अशोक

    राजस्थान में सचिन पायलट और मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के बीच लड़ाई किसी से छुपी नहीं है। 2020 में पायलट और उनके समर्थक विधायकों ने गहलोत के खिलाफ बगावत कर दी थी। दोनों नेताओं के बीच कड़वाहट कितनी बढ़ गई थी, इससे समझा जा सकता है कि, तब गहलोत ने जिस तरह सचिन के खिलाफ शब्दों का प्रयोग किया वह किसी से छुपा नहीं है।

    हालांकि, काफी मान-मनौवल के बाद पायलट माने, जिससे गहलोत की सरकार बच सकी। भले ही केंद्रीय आलाकमान ने बगावत को रोक दी थी, दोनों नेताओं के बीच सब सही नहीं कर सके। बीते डेढ़ साल से दोनों नेता और उनके समर्थक लगातार एक-दूसरे पर हमला करते रहते हैं।

    सचिन और उनके समर्थक विधायकों को अब तक गहलोत मंत्रिमंडल और संगठन में वह सम्मानजनक पद नहीं मिला है, जो उन्हें मिलना  चाहिए था। बीते कई दिनों से पायलट के बगावती तेवर फिर दिखाई दे रहे हैं। जिसके बाद कांग्रेस आलाकमान के लिए बड़ी मुश्किल खड़ी  हो सकती है। इस बगावत को रोकने के लिए जल्द ही यहां भी नेतृत्व को बदल सकती है।