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नई दिल्ली/शिमला: जहां एक तरफ राज्यसभा चुनाव के बाद हिमाचल प्रदेश (Himachal Pradesh) में फिलहाल राजनीतिक घमासान जारी है। वहीं इससे पहले राज्यसभा चुनाव में पार्टी के उम्मीदवार की हार के बाद अब कांग्रेस सरकार (Congress) फिर संकट में फंसती दिख रही है। यहां राज्य सरकार मंत्री और पूर्व सीएम वीरभद्र सिंह के बेटे विक्रमादित्य सिंह (Vikramaditya Singh) ने बगावत कर दी है। इधर आज हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू (Sukhvinder Singh Sukkhu) ने शिमला में कैबिनेट बैठक भी की है।

हालांकि वहीं कांग्रेस से मन उचटने के बाद खुद विक्रमादित्य सिंह भी BJP में शामिल होने को लेकर दुविधा में हैं। दरअसल इसकी वजह ये है कि ऐसा करने पर वीरभद्र सिंह की सियासी विरासत एक तरह से खत्म हो जाएगी। ऐसे में अब दूसरा विकल्प यह है कि विक्रमादित्य “वीरभद्र कांग्रेस” जैसी नई पार्टी का ऐलान कर सकते हैं। 

अब अगर हिमाचल विधानसभा के मौजूदा संख्याबल को देखें तो विक्रमादित्य सिंह के साथ तीन और विधायक टूटे तो सुक्खू सरकार गिर जाएगी। वहीं, स्पीकर द्वारा अयोग्य घोषित किए गए कांग्रेस के छह पूर्व विधायकों को यदि कोर्ट से फौरी राहत मिल जाती है तो फिर सदन में अकेले विक्रमादित्य ही सरकार गिराने के लिए काफी होंगे। इस बीच खुद CM सुक्खू विक्रमादित्य के करीबी विधायकों को अपने पाले में करने में जुटे हैं। 

इधर 6 कांग्रेस विधायकों की सदस्यता रद्द किए जाने पर हिमाचल प्रदेश कांग्रेस प्रमुख और सांसद प्रतिभा सिंह ने कहा, ” जब आपको(सुखविंदर सिंह सुक्खू) एक साल से ज्यादा समय हो गया है, फिर भी आप उनके मसलों का संज्ञान नहीं ले रहे, उनकी बात नहीं सुन रहे तो उनका नाराज होना जायज है। अगर वे उन्हें बैठाकर बात करते तो आज यह स्थिति नहीं होती।” इस पर मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने कहा कि, “जिसके साथ 80% विधायक जुड़े हों उससे बड़ा और क्या साथ होगा। मुझे नहीं पता कि उन्होंने यह सवाल क्यों उठाया?” फिलहाल कांग्रेस आलाकमान भी शिमला पर नजर बनाए हुए है।