Farmers Delhi Chalo march SKM leader demands release of 'detained' farmers

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चंडीगढ़/ नई दिल्ली: संयुक्त किसान मोर्चा (SKM) ने गुरुवार (22 फरवरी) को पंजाब और हरियाणा के बीच शंभू तथा खनौरी सीमा बिंदुओं पर स्थिति के बारे में चर्चा करने के लिए बैठक की। इस बैठक में कई फैसले लिए गए। बैठक के बाद राकेश टिकैत ने कहा कि शंभू बॉर्डर पर एक किसान की मौत के विरोध में मोर्चा कल यानी शुक्रवार को आक्रोश दिवस मनाएगा। इसके साथ ही 26 फरवरी को ट्रैक्टर मार्च करके विरोध जताएगा। यह नहीं 14 मार्च को इस मामले में दिल्ली में महापंचायत करके किसानों की मांगों को जोरशोर से उठाया जाएगा। इस बैठक के बाद सब तक किसान आंदोलन से खुद को दूर रख रही संयुक्त किसान मोर्चा की आखिरकार आंदोलन में एंट्री हो गई है। संयुक्त किसान मोर्चा ने किसान की कथित मौत के मामले में गृह मंत्री अमित शाह और हरियाणा के सीएम मनोहरलाल का इस्तीफा भी मांगा। इसने कहा कि किसान पुलिस कार्रवाई की भर्त्सना करने के लिए केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और हरियाणा के गृह मंत्री अनिल विज के पुतले फूंकेंगे। 

एसकेएम नेता बलबीर सिंह राजेवाल ने संवाददाताओं से कहा कि खनौरी सीमा पर एक किसान की मौत के सिलसिले में हत्या का मामला दर्ज किया जाना चाहिए तथा उसके परिवार को एक करोड़ रुपये की अनुग्रह राशि दी जानी चाहिए। बठिंडा जिले के शुभकरण सिंह को संगरूर-जींद सीमा पर खनौरी से एक अस्पताल में मृत अवस्था में ले जाया गया था। खनौरी सीमा पर पुलिस के साथ कथित झड़प में उसकी मौत हो गई थी। इस झड़प में 12 पुलिसकर्मी भी घायल हुए थे। 

किसानों का दिल्ली चलो मार्च 

जानकारी के लिए बता दें कि सीमा बिंदुओं पर हजारों किसान अपने संगठनों द्वारा किए गए “दिल्ली चलो” के आह्वान के तहत डेरा डाले हुए हैं। पंजाब के किसान अपनी फसलों पर न्यूनतम समर्थन मूल्य के लिए केंद्र से कानूनी गारंटी की मांग कर रहे हैं। एसकेएम ‘दिल्ली चलो’ मार्च का हिस्सा नहीं है लेकिन वह इसका समर्थन कर रहा है। एसकेएम ने 2020-21 में केंद्र सरकार के तीन कृषि कानूनों के खिलाफ आंदोलन का नेतृत्व किया था जिन्हें बाद में निरस्त कर दिया गया। बैठक के लिए पंजाब, हरियाणा, उत्तर प्रदेश, पश्चिम बंगाल और अन्य राज्यों से कई एसकेएम नेता यहां पहुंचे थे।

इससे पहले भारती किसान यूनियन (लाखोवाल) के महासचिव हरिंदर सिंह लाखोवाल ने कहा कि एसकेएम इस बात पर चर्चा करेगा कि बुधवार को शंभू और खनौरी सीमा बिंदुओं पर क्या हुआ। उन्होंने कहा कि किसान संगठन इस बात पर भी निर्णय लेगा कि जारी आंदोलन का समर्थन किस तरह से किया जाए। संयुक्त किसान मोर्चा (गैर-राजनीतिक) और किसान मजदूर मोर्चा (केएमएम) फसलों के न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) पर कानूनी गारंटी और कृषि ऋण माफी सहित अपनी मांगों को स्वीकार कराने के लिए भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार पर दबाव बनाने के लिए “दिल्ली चलो” आंदोलन का नेतृत्व कर रहे हैं। एसकेएम ”दिल्ली चलो” आंदोलन का हिस्सा नहीं है।

किसानों ने दो दिनों के लिए रोका दिल्ली कूच 

खनौरी में हुई झड़प में एक आंदोलनकारी की मौत और लगभग 12 पुलिस कर्मियों के घायल होने के बाद किसान नेताओं ने बुधवार को दो दिनों के लिए कूच रोक दिया। मृतक किसान की पहचान पंजाब के बठिंडा जिले के बल्लो गांव के निवासी शुभकरण सिंह (21) के रूप में हुई है। पुलिस ने आंदोलनकारियों को तितर-बितर करने के लिए दोनों सीमा बिंदुओं पर कई बार आंसू गैस के गोले दागे। यह कार्रवाई किसानों द्वारा राष्ट्रीय राजधानी की ओर उनके कूच को रोकने के लिए लगाए गए अवरोधकों को पार करने के प्रयास के बाद की गई। हजारों किसान अपने ट्रैक्टर-ट्रॉली और ट्रकों के साथ खनौरी और शंभू में डेरा डाले हुए हैं। किसान नेता सरवन सिंह पंधेर ने बुधवार को कहा कि वे शुक्रवार शाम को आगे की रणनीति तय करेंगे।

क्या है किसानों की मांग 

पंजाब के किसान भी स्वामीनाथन आयोग की सिफारिशों को लागू करने, किसानों और खेत मजदूरों के लिए पेंशन, कृषि ऋण माफी, बिजली दरों में कोई बढ़ोतरी नहीं करने, पुलिस में दर्ज मामलों को वापस लेने, 2021 की लखीमपुर खीरी हिंसा के पीड़ितों के लिए ‘न्याय’, भूमि अधिग्रहण अधिनियम 2013 को बहाल करने और 2020-21 के आंदोलन के दौरान मारे गए किसानों के परिवारों को मुआवजा देने की मांग कर रहे हैं।