Jairam Thakur
जयराम ठाकुर (फाइल फोटो)

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नवभारत डिजिटल डेस्क: हिमाचल राज्यसभा चुनाव (Himachal Rajya Sabha Elections) के बाद प्रदेश के सियासी माहौल में उथल पुथल मची हुई है। जहां बीजेपी (BJP) के प्रत्याशी हर्ष महाजन की जीत से पार्टी में  उत्सा है तो वहीं हार के बाद कांग्रेस (Congress) का बुरा हाल है। इसी बीच पूर्व सीएम और विपक्ष के नेता जयराम ठाकुर (Jairam Thakur) राज्यपाल शिव प्रताप शुक्ला (Governor Shiv Pratap Shukla) से मिलने पहुंचे जिसके बाद अटकले लगाई जा रही हैं की वे सरकार से बहुमत साबित करने की मांग कर सकते हैं। 

राज्यपाल से विपक्षीय नेता जयराम ठाकुर की मुलाकात अब चर्चा में बनी हुई है क्यूंकि हिमाचल विधानसभा में आज बजट पेश होना है इस बीच बीजेपी की ओर से दावा किया गया है कि कांग्रेस सरकार अपने विधायकों का भरोसा खो चुकी है। कयास लगाए जा रहे हैं की बीजेपी डेलीगेशन आज राज्यपाल से मिलकर वोटिंग के जरिए बजट पास कराने की मांग कर सकती है। 

राज्यपाल से मुलाकात पर बोले जयराम ठाकुर 

वहीं राज्यपाल से मुलाकात से पहले जयराम ठाकुर ने सफाई रखी, उन्होंने कहा कि वो सरकार बनाने का दावा पेश करने नहीं बल्कि राजपाल से विधानसभा में जो कुछ हुआ उसे अवगत कराने जा रहे है। उन्होंने कहा जो घटनाक्रम हाल ही में हुआ है, उससे साबित होता है कि कांग्रेस की सरकार अपना जनादेश खो चुकी है। 

जयराम ठाकुर ने मीडिया से बात करते हुए कहा कि हम बजट पेश होने से पहले डिविजन वोटिंग चाहते हैं, लेकिन स्पीकर इसकी अनुमति नहीं दे रहे है। हम चाहते हैं कि फाइनेंशियल इमरजेंसी से बचने के लिए बजट पारित किया जाए। हम वोटिंग के लिए मांग इसलिए कर रहे हैं क्योंकि सरकार ने बहुमत खो दिया है। 

हिमाचल राज्यसभा चुनाव में क्या हुआ?

दरअसल, हिमाचल प्रदेश की एक सीट पर हुए चुनाव में बीजेपी प्रत्याशी हर्ष महाजन की जीत हुई, जबकि सत्तारूढ़ पार्टी कांग्रेस के उम्मीदवार अभिषेक मनु सिंघवी की क्रॉस वोटिंग की वजह से हार हुई है। हिमाचल प्रदेश में बीजेपी के पास बहुमत नहीं था, लेकिन कांग्रेस के छह विधायकों ने क्रॉस वोटिंग की। इसके अलावा तीन निर्दलीय विधायकों ने भी कांग्रेस का साथ नहीं दिया, जिसकी वजह से कांग्रेस और बीजेपी दोनों के उम्मीदवारों को बराबर-बराबर वोट मिले। 

आपको बता दें, ऐसा पहली बार हुआ है जब राज्यसभा चुनाव में दो उम्मीदवारों में बराबर-बराबर वोट मिलने की वजह से पर्ची से हार जीत का फैसला किया गया। हालांकि इस पर्ची के फैसले में भी कांग्रेस को किस्मत का साथ नहीं मिला और इसमें बीजेपी जीत गई।