Vijay Mashal

    नई दिल्ली. 1971 के भारत-पाक युद्ध में भारत की ऐतिहासिक विजय के 50 वर्ष पूरे होने के कार्यक्रमों के हिस्से के रूप में माननीय प्रधान मंत्री द्वारा विजय दिवस (16 दिसंबर) 2020 को राष्ट्रीय युद्ध स्मारक नई दिल्ली से स्वर्णिम विजय मशाल को प्रज्ज्वलित कर राष्ट्र के विभिन्न हिस्सों के लिए रवाना किया गया था। आज दिनांक 25 नवंबर 2021 को यह उत्तर मध्य रेलवे मुख्यालय पहुंची।

    इस मशाल को सशस्त्र बलों की एक टुकड़ी द्वारा सजाए गए वाहन में उत्तर मध्य रेलवे  मुख्यालय लाया गया था। उत्तर मध्य रेलवे  के खिलाड़ियों और भारत स्काउट्स एंड गाइड्स के सदस्यों ने अपने हाथों में तिरंगा लहराते हुए स्वर्णिम विजय मशाल की आगवानी की। 

    मुख्य समारोह का आयोजन उत्तर मध्य रेलवे  मुख्यालय प्रांगण में मैदान में स्थापित 100 फीट ऊंचे राष्ट्रीय ध्वज की गोद में सम्पन्न हुआ। मैदान में वाहन से मशाल के उतरते ही उसका सेना के बैगपाइपर द्वारा सलामी स्थल की ओर ले जाया गया। परेड कमांडर योगेश राणा के नेतृत्व में आरपीएफ परेड ने स्वर्णिम विजय मशाल को गार्ड ऑफ ऑनर दिया। स्टेशन कमांडर और डिप्टी जनरल ऑफिसर कमॉंडिंग  पूर्वा यूपी और एमपी सब एरिया ब्रिगेडियर अजय पासबोला द्वारा मशाल को उत्तर मध्य रेलवे  के महाप्रबंधक प्रमोद कुमार को सौंपा गया। महाप्रबंधक द्वारा सलामी स्थल पर साहस और पराक्रम की प्रतीक इस मशाल की स्थापना की गई। सलामी स्थल पर महाप्रबंधक महोदय के साथ आईजी/आरपीएफ/उत्तर मध्य रेलवे रवींद्र वर्मा उपस्थित थे। रेल सुरक्षा बल गारद ने मशाल को सामान्य सलामी दी और उसके उपरांत राष्ट्रगान हुआ।

    महाप्रबंधक ने 1971 के भारत-पाक युद्ध में अपना सर्वोच्च बलिदान करने वाले हमारे बहादुर सैनिकों को श्रद्धांजलि अर्पित की और सेना के पराक्रम के साथ ही युद्ध में भारतीय रेल के योगदान को याद किया। कुमार ने यह बताया कि भारतीय रेल ने युद्ध के दौरान सुरक्षा बलों और उपकरणों के परिवहन के लिए 2000 से अधिक विशेष ट्रेनें चलाईं और संघर्ष विराम के बाद भी युद्धबंदिओं और शरणार्थियों को स्थानांतरित करने के लिए भी 800 विशेष ट्रेनें चलाई गईं।

    महाप्रबंधक उत्तर मध्य रेलवे  ने विशेष रूप से लेफ्टिनेंट कर्नल एमएल खन्ना के नेतृत्व में लगभग 1000 रेलकर्मियों से सुसज्जित टेरिटोरिअल आर्मी की एक बटालियन का जिक्र करते हुए बताया कि इस दल  को  थार रेगिस्तान के बीच की रेल लाइन जो उस समय दोनों देशों में फैली हुई थी उसको सक्रिय कर रेल संचालन प्रारंभ करने का आवश्यक कार्य दिया गया। यह कार्य बहुत जरूरी था क्योंकि हमारे आगे बढ़ने वाले सैनिकों के पास भोजन, पानी और गोला-बारूद पहुंचाने के लिए रेगिस्तान में कोई सड़क नहीं होने के कारण समस्या गंभीर होती जा रही थी।

    इस स्थिति में आपूर्ति हेतु गाड़ियों का चलना अनिवार्य था। 40 किलोमीटर लाइन स्थापना के इस कठिन कार्य को मात्र एक दिन में पूरा कर दिया गया था और ऑपरेशन के दौरान यूनिट के आगे बढ़ने के दौरान हुए बम विस्फोटों में  लोकोमोटिव चालक दुर्गा शंकर को चोटें आईं और उन्होंने अपनी कोहनी से रेलगाड़ी चलाई। लोकोपायलट को वीर चक्र से अलंकृत किया गया था, जबकि यूनिट को दो विशिष्ट सेवा पदकों से सम्मानित किया गया था।

    महाप्रबंधक ने नव विकसित राष्ट्र बांग्लादेश में युद्ध की समाप्ति पर संचार और रेलवे की बहाली में भारतीय रेलवे द्वारा किए गए अभूतपूर्व और त्वरित प्रयासों को भी याद किया।

    महाप्रबंधक ने भारतीय सैन्यबलों के साथ समन्वय में उत्तर मध्य रेलवे  द्वारा की जा रही विभिन्न गतिविधियों की जानकारी भी दी और सैन्य बलों के अधिकारियों को आश्वस्त किया कि जब भी आवश्यकता होगी, राष्ट्र की सेवा में उत्तर मध्य रेलवे  तत्पर रहेगी। 

    महाप्रबंधक के उदबोधन के बाद, रेल सुरक्षा बल  बैंड ने देशभक्ति के गीतों की धुन बजाकर अपने कौशल का प्रदर्शन किया, जिसको उपथित जनसमूह ने करतल ध्वनि से सराहा ।

    इसके बाद मशाल को महाप्रबंधक द्वारा उत्तर मध्य रेलवे  के खिलाड़ियों को सौंप दिया गया, जिन्होंने बाद में इसे सेना को वापस सौंपने के लिए रेल सुरक्षा बल सद्स्यों को सौंप दिया।

    सचिव, स्काउट्स एंड गाइड्स उत्तर मध्य रेलवे सुश्री कृष्णा तिवारी ने कार्यक्रम की लाइव कमेंट्री ने की, जबकि कार्यक्रम का संचालन मुख्य जनसंपर्क अधिकारी शिवम शर्मा ने किया। समारोह का सीधा प्रसारण यूट्यूब पर उत्तर मध्य रेलवे  के विभिन्न स्टेशनों पर लाइव स्ट्रीमिंग के साथ किया गया।

    वरिष्ठ मंडल सुरक्षा आयुक्त मनोज सिंह ने सेना के साथ पूरे कार्यक्रम का समन्वय किया। समारोह में भारतीय सेना के अधिकारी, उत्तर मध्य रेलवे के वरिष्ठ अधिकारी, डीआरएम/प्रयागराज और 970 रेलवे प्रादेशिक सेना, झांसी के अधिकारी उपस्थित थे।