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    नयी दिल्ली/ बेंगलुरु. प्रवर्तन निदेशालय (Enforcement Directorate) ने कर्नाटक के पूर्व मंत्री आर रोशन बेग (Roshan Beg) और कांग्रेस के एक विधायक के खिलाफ बृहस्पतिवार को छापेमारी की। अधिकारियों ने बताया कि 4,000 करोड़ रुपये के आईएमए पॉन्जी घोटाले में धन शोधन की जांच के सिलसिले में यह छापेमारी की गई। उन्होंने बताया कि धनशोधन रोकथान कानून (पीएमएलए) के प्रावधानों के तहत बेग और उनके सहयोगियों के कई परिसरों पर एजेंसी ने छापेमारी की।

    बेंगलुरु के शिवाजीनगर में उनके और बेंगलुरु के चामराजपेट से कांग्रेस विधायक बी जी जमीर अहमद खान के दो परिसर और उनसे जुड़ी यात्रा कंपनी पर छापेमारी की गई। मुंबई में भी कुछ स्थानों पर छापेमारी की गई। कहा जाता है कि कांग्रेस विधायक का आईएमए ग्रुप के तत्कालीन प्रबंध निदेशक मंसूर खान के साथ संपत्ति का कथित तौर पर लेन-देन हुआ था। जमीर अहमद खान ने चुनावी हलफनामे में इस लेन-देन की घोषणा की है। बेग जिन्हें इससे पहले केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) ने मामले में गिरफ्तार किया था उन्हें कथित घोटाला सामने आने के बाद कांग्रेस से निलंबित कर दिया गया था।

    बेग फिलहाल जमानत पर हैं। ईडी की यह कार्रवाई 4,000 करोड़ रुपये के आई-मॉनेटरी एडवाइजर (आईएमए) के कथित पॉन्जी घोटाले मामले में सीबीआई प्राथमिकी और आरोप-पत्र का संज्ञान लेकर की जा रही उसकी जांच से जुड़ा है। सीबीआई ने अप्रैल में बेंगलुरु में सीबीआई की विशेष अदालत के समक्ष आरोप-पत्र दायर किया था और बेग, मंसूर खान, आईएमए ग्रुप और बेग की कंपनी दानिश पब्लिकेशन्स और अन्य को नामजद किया था।

    सीबीआई प्रवक्ता ने आरोप-पत्र दायर करने से पहले एक बयान में कहा, “यह आरोप लगाया कि पूर्व मंत्री ने चुनावी खर्च केलिए आईएम कोष से कई करोड़ रुपये लिए।” बयान में कहा गया, “यह भी आरोप लगाया कि आरोपी दिन प्रतिदिन के खर्च के लिए उक्त निधि का भी इस्तेमाल कर रहा था, जिसमें उसकी कंपनी के कर्मचारियों को वेतन देना भी शामिल है। यह भी आरोप था कि आरोपी ने अपनी लोकप्रियता बढ़ाने के लिए अपने निर्वाचन क्षेत्र में विभिन्न सामाजिक एवं सांस्कृतिक गतिविधियों पर पैसा खर्च किया।”

    कथित घोटाला आईएमए समूह द्वारा इस्लामी तरीकों से निवेश पर आकर्षक रिटर्न प्रदान करने के नाम पर एक लाख से अधिक भोले-भाले निवेशकों से एकत्र किए गए 4,000 करोड़ रुपये से अधिक से संबंधित है। सीबीआई अधिकारियों ने बताया था कि आरोप था कि यह पैसा सिद्धरमैया नीत पूर्ववर्ती कांग्रेस सरकार में मंत्री, बेग को भेज दिया गया ताकि आईएमए समूह अपनी अवैध गतिविधियां जारी रख सके।

    सीबीआई ने घोटाले के सिलसिले में चार मामले दर्ज किए थे और खान, कंपनी के निदेशकों, कई राजस्व और पुलिस के कई अधिकारियों समेत 33 आरोपियों के खिलाफ कई आरोप-पत्र दायर किए थे। आरोप लगाया था कि समूह ने अनधिकृत तरीके से पैसे जमा किए और लोगों को मूल धन के साथ ही वादे किए गए रिटर्न भी न लौटा कर लोगों के साथ धोखा किया। सीबीआई ने कहा, “इन निधियों का कथित तौर पर संपत्ति हासिल करने, रिश्वत की रकम चुकाने आदि के लिए इस्तेमाल किया गया था। सक्षम प्राधिकरण द्वारा कई संपत्तियों -चल और अचल- की पहचान की गई और केपीआईडीएफई (वित्तीय प्रतिष्ठानों में जमाकर्ताओं के हितों का कर्नाटक संरक्षण) कानून, 2004 के तहत कुर्क की गई।”