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    खूंटी. झारखंड (Jharkhand) का अति नक्सल प्रभावित जिला खूंटी (Khunti) इन दिनों बिजली बिल के भयंकर करंट से हलकान है। जी हाँ, खूंटी के मुरहू प्रखंड में कई ऐसे आदिवासी बहुल गांव हैं, जहां बिजली बिल (Electric Bill) के झटकों ने ग्रामीणों की जैसे कमर ही तोड़ दी है। आपको ये जानकर हैरानी होगी की ऐसे तमाम आदिवासी परिवार बिजली बिल चुकाने के लिए अब अपने पशु धन को बेचने को मजबूर हैं।

    इन बढ़ते बिजली के बिल चुकाने के लिए कोई अपना बछड़ा बेच रहा है तो कोई बैल तो कोई बकरी और सुअर बेचने को भी बुरी तरह मजबूर है। अब तो हालात कुछ ऐसे हैं कि अब गांव के लोगों ने बिजली के प्रयोग से ही तौबा कर लिया है। वहीं अब तक कई ग्रामीण अपने बिजली का मीटर सरेंडर कर चुके हैं। और यह कोई हवाबाजी नहीं, बल्कि खूंटी के मुरहू प्रखंड के को योंगसार पंचायत के गांवों की यह जमीनी हकीकत है।

    जानवरों को बेच कर भरा बिजली बिल

    बात करें पौलुस हेरहंज की, इनकी उम्र करीब 75 साल है। जब बिजली विभाग की ओर से जब बिल जमा करने को लेकर दबाव बढ़ाया गया तो पौलुस को अपना बछड़ा ही  बेचना पड़ा। उन्‍होंने 15 हजार रुपये में अपने बछड़े को बेच कर बिजली जमा किया। पौलुस का कहना है कि, अब उन्‍हें बिजली नहीं चाहिए। वहीं बिजली का मीटर भी पौलुस ने खूंटी बिजली विभाग के कार्यालय में जमा करा दिया है। पौलुस की एक बेटी है जो सुन नहीं सकती। घर की माली हालात बहुत ही दयनीय है। बुजुर्ग पौलुस किसी तरह खुद का और परिवार का पेट भर कर जीवन यापन कर रहा है।

    ऐसे ही यहाँ के रिजान केरकेट्टा ने बिजली बिल का भुगतान करने के लिए अपना 1 सुअर और 2 बकरी बेच डाली। उन्‍होंने सुअर और बकरी बेचकर कैसे भी करके करीब साढ़े 8 हजार रुपये जमा किए। इस परिवार को बिजली की जरूरत है, पर अब उनके पास पैसे नहीं हैं। रिजान के पुत्र बताते हैं कि आगे भी बिजली बिल जमा करने के लिए उन्हें फिर से अपना कुछ न कुछ बेचना पड़ेगा, क्‍योंकि इसके और अलावा कोई दूसरा विकल्‍प भी नहीं है। यह परिवार बिजली विभाग से कुछ छूट चाहता है, पर अधिकारी कोई भी बात मनाने को तैयार नहीं हैं।

    कनेक्‍शन नहीं, पर मिल रहे बिल

    इसी प्रकार संतोष हेरहंज के घर बिजली नहीं है, पर उनके घर बिजली का बिल उन्हें लगातार आ रहा है। वह अब तक तो 4 हजार रुपये से ज्यादा का बिजली बिल का भी भुगतान कर चुके हैं, फिर भी बिल लगातार उनके घर पहुँच रहा है। उन्‍होंने अब लाह बेचकर जैसे-तैसे बिजली बिल का भुगतान किया। संतोष कहते हैं कि उन्हें अब कोई बिजली नहीं चाहिए, मिट्टी तेल से ही अपना काम चला लेंगे।

    हर महीने आ रहे हैं 2-2 बिजली बिल

    इधर खूंटी में कुछ ऐसे भी घर हैं जहां हर महीने दो-दो बिजली बिल भेजे जा रहे हैं। विजय डाहन और उनकी पत्नी पिंकी के नाम से भी दो बिजली बिल भेजे जा रहे हैं। दिचास्प ये है कि एक साल का बिल एकमुश्त भेज दिया गया है। इसी प्रकार चामू और उनकी पत्नी फुलमनी के नाम से भी एक ही घर में दो बार बिजली बिल भेजा गया है। इस पारकर अब गांव के लोग बिजली विभाग के इस कारनामे से हैरान और परेशान हैं और साथ ही बहुत थक भी गए हैं। हालाँकि बिजली विभाग को उपभोक्ताओं ने आवेदन भी किया, लेकिन उस पर कोई करवाई तो कभी नहीं होती है।

    यह है बिजली विभाग का कहना

    इधर घटना पर बिजली विभाग के कार्यपालक अभियंता ओम शंकर मेहता कास्पष्ट तौर पर कहना है कि बकाया राशि का भुगतान हर उपभोक्ता को करना जरुरी और अनिवार्य है। राज्य सरकार ने DPS चार्ज में छूट देने के साथ-साथ किश्त का भी प्रावधान किया है। ग्रामीण उपभोक्‍ता इसका लाभ भी उठा सकते हैं। वहीं एक से अधिक किश्त में बिजली उपभोक्ता बकाया राशि का भुगतान कर सकते हैं। वहीं, वैसे उपभोक्ता जिनके घर एक से ज्यादा बिल आ रहे हैं, वो आवेदन देकर इस समस्या से जल्द ही छुटकारा पा सकते हैं। इस प्रकार बिजली विभाग सारी गलती इन गरीब उपभोक्ता पर डाल कर चैन की बंसी बजा रहा है।