PTI Photos
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    नयी दिल्ली. कांग्रेस नेता कीर्ति आजाद, हरियाणा प्रदेश कांग्रेस कमेटी के पूर्व अध्यक्ष अशोक तंवर और जनता दल (यूनाइटेड) के पूर्व महासचिव पवन वर्मा मंगलवार को तृणमूल कांग्रेस में शामिल हो गए। तीनों नेताओं ने तृणमूल कांग्रेस की प्रमुख और पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की मौजूदगी में पार्टी की सदस्यता ग्रहण की। तृणमूल कांग्रेस में शामिल होने के बाद आजाद ने कहा, ‘‘मैं ममता बनर्जी के नेतृत्व में काम करूंगा और मैं जमीन पर काम शुरू करूंगा। भाजपा की राजनीति विभाजनकारी है और हम इसका मुकाबला करेंगे। आज ममता बनर्जी जैसे व्यक्तित्व की देश को जरूरत है, जो इसे सही दिशा दिखा सकती हैं।”

    जद(यू) के पूर्व महासचिव पवन वर्मा भी तृणमूल कांग्रेस में शामिल हुए। बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के पूर्व सलाहकार तथा राज्यसभा के पूर्व सदस्य वर्मा को 2020 में जद(यू) से निष्कासित कर दिया गया था। वर्मा ने कहा, ‘‘मौजूदा राजनीतिक हालात और ममता बनर्जी में सामर्थ्य को देखते हुए मैं आज तृणमूल कांग्रेस में शामिल हुआ हूं।”

    हरियाणा प्रदेश कांग्रेस कमेटी के पूर्व अध्यक्ष अशोक तंवर भी तृणमूल कांग्रेस में शामिल हुए। ममता ने तंवर के समर्थकों को संबोधित भी किया। उन्होंने कहा कि वे तंवर के साथ मिलकर काम करें और वह जल्द ही हरियाणा का दौरा भी करेंगी। ममता ने तंवर के समर्थकों से कहा, ‘‘आप लोग अभी से काम शुरू कर सकते हैं। आप लोग मिलजुलकर काम करिये। जितनी जल्दी अशोक जी मुझे बुलाएंगे, उतनी जल्दी मैं हरियाणा का जाऊंगी।”

    तंवर ने कहा कि मौजूदा समय में ममता बनर्जी ही विपक्ष की सबसे बड़ी नेता हैं और उनके नेतृत्व में ही भाजपा के खिलाफ राष्ट्रीय स्तर पर लड़ाई लड़ी जा सकती है।

    सूत्रों का कहना है कि तृणमूल कांग्रेस में शामिल होने के बाद अब जल्द ही तंवर को हरियाणा में पार्टी के नेतृत्व की जिम्मेदारी सौंपी जा सकती है। ममता बनर्जी अभी दिल्ली आई हुई हैं। वह दिल्ली आने पर हमेशा कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी से मुलाकात करती हैं। हालांकि, तृणमूल कांग्रेस के सूत्रों ने संकेत दिया कि पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री इस बार शायद सोनिया गांधी से नहीं मिलें।

    कीर्ति आजाद 1983 की विश्व कप विजेता भारतीय क्रिकेट टीम के सदस्य थे। दिसंबर 2015 में दिल्ली और जिला क्रिकेट संघ में कथित अनियमितताओं तथा भ्रष्टाचार को लेकर तत्कालीन केन्द्रीय वित्त मंत्री अरुण जेटली को खुले तौर पर निशाना बनाने के लिए उन्हें भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) से निलंबित कर दिया गया था।

    वह 2018 में कांग्रेस में शामिल हो गए थे। आजाद, बिहार की दरभंगा संसदीय सीट से तीन बार लोकसभा के लिए चुने गए। साल 2014 में उन्होंने भाजपा के टिकट पर आम चुनाव लड़ा था। अशोक तंवर 2019 के हरियाणा विधानसभा चुनाव से पहले टिकट वितरण में पैसे के लेनदेन का आरोप लगाया था, जिसके बाद उन्हें कांग्रेस से अलग होना पड़ा था।

    कांग्रेस छोड़ने के बाद इस साल फरवरी में उन्होंने अपनी पार्टी ‘‘अपना भारत मोर्चा” बनाई थी। वह हरियाणा की सिरसा लोकसभा सीट से सांसद भी रह चुके हैं और किसी समय राहुल गांधी के करीबी माने जाते थे। कांग्रेस की पृष्ठभूमि वाले कई अन्य नेता पिछले कुछ महीनों में तृणमूल कांग्रेस में शामिल हुए हैं। इनमें सुष्मिता देव, लुईजिन्हो फालेरियो और अभिजीत मुखर्जी प्रमुख हैं। (एजेंसी)