पुण्यतिथि विशेष: आज पूर्व PM अटल बिहारी वाजपेयी की पुण्यतिथि, जानें ‘अटल के अचल’ व्यक्तित्व के बारे में

    नयी दिल्ली. भारत के वरिष्ठ नेता और पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी (Atal Bihari Vajpayee) की आज तीसरी पुण्यतिथि (Death Anniversary) है। इस मौके पर राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री से लेकर पूरा देश आज उन्हें श्रद्धांजलि दे रहा है। गौरतलब है कि 3 बार देश के प्रधानमंत्री रहे अटल बिहारी वाजपेयी का लंबी बिमारी के बाद 16 अगस्त 2018 को दिल्ली के एम्स अस्पताल में निधन हो गया था। 

    शानदार व्यक्तित्व और कर्मठ जीवन 

    उनके निधन के बाद दिल्ली में ही अटल समाधि स्थापित की गई थी। पता हो कि अटल बिहारी वाजपेयी पहले ऐसे गैर-कांग्रेसी प्रधानमंत्री थे, जिन्होंने अपना कार्यकाल पूरा किया था। वह 1996 में 13 दिन, 1998 में 13 महीने और फिर 1999 में पूरे 5 साल तक देश के प्रधानमंत्री रहे थे।अटल बिहारी वाजपेयी की गिनती देश की राजनीति के उन चंद नेताओं में होती है जो कभी दलगत राजनीति के बंधन में नहीं बंधे। उन्हें हमेशा ही सभी राजनीतिक पार्टियों से भरपूर प्यार व स्नेह मिला था। अगर बात करें 80 और 90 के दशक में पैदा या बड़े हुए हर शख्स के मनपसंद नेता की तो इस सूची में आपको अटलजी का नाम सबसे ऊपर मिलेगा।

    बचपन और जीवन परिचय

    यूँ तो अटल बिहारी वाजपेयी का पैतृक गांव यूपी के बटेश्वर में था, हालांकि उनका जन्म 25 दिसंबर 1924 को ग्वालियर में हुआ था। फिर ग्वालियर के ही विक्टोरिया कॉलेज से उन्होंने पढ़ाई की। अगर उनके पूरे जीवन पर नजर डालें तो वो राजनीति, कविता और सादगी के बीच एक बेहतरीन समय बीता। 

    श्री वाजपेयी जी अपने छात्र जीवन के दौरान पहली बार राष्ट्रवादी राजनीति में तब आये थे जब उन्होंने वर्ष 1942 में भारत छोड़ो आंदोलन जिसने ब्रिटिश उपनिवेशवाद का अंत किया, में भाग लिया था। वह राजनीति विज्ञान और विधि के मेधावी छात्र थे और कॉलेज के दिनों में ही उनकी रुचि विदेशी मामलों के प्रति बढ़ी। उनकी यह रुचि फिर आगे के वर्षों तक बनी रही एवं विभिन्न बहुपक्षीय और द्विपक्षीय मंचों पर भारत का प्रतिनिधित्व करते हुए उन्होंने अपने इस कौशल का भरपूर परिचय भी दिया था।

    पत्रकार वाजपेयी, संगीत सुनने और खाना बनाने का था शौक 

    बहुत ही कम लोगों को पता होगा कि श्री वाजपेयी जी ने अपना करियर पत्रकार के रूप में शुरू की थी और 1951 में भारतीय जन संघ में शामिल होने के बाद उन्होंने पत्रकारिता छोड़ भी दी थी। आज की भारतीय जनता पार्टी को पहले भारती जन संघ के नाम से जाना जाता था जो राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन का अभिन्न अंग भी रहा है। उन्होंने कई कवितायेँ भी लिखी जिसे समीक्षकों द्वारा खूब सराहा गया। वह राजनीतिक मामलों से समय निकालकर संगीत सुनने और खाना बनाने जैसे अपने शौक भी पूरे कर लेते थे।

    सक्रिय राजनीति से हुए विदा 

    वे हिंदी कवि, पत्रकार व एक प्रखर वक्ता थे। इसके साथ ही वे भारतीय जनसंघ के संस्थापकों में एक थे, और 1968 से 1973 तक उसके अध्यक्ष भी रहे थे। उन्होंने लंबे समय तक राष्‍ट्रधर्म, पाञ्चजन्य और वीर अर्जुन आदि राष्ट्रीय भावना से ओत-प्रोत अनेक पत्र-पत्रिकाओं का संपादन भी किया था। वह चार दशकों से भारतीय संसद के सदस्य रहे थे, लोकसभा, निचले सदन में 10 बार, और 2 बार राज्य सभा, ऊपरी सदन में चुने गए थे। इतना ही नहीं उन्होंने लखनऊ के लिए संसद सदस्य के रूप में भी कार्य किया था,2009 तक उत्तर प्रदेश जब स्वास्थ्य संबंधी चिंताओं के कारण सक्रिय राजनीति से सेवानिवृत्त हुए थे। उन्हें भारत के प्रति उनके निस्वार्थ समर्पण और पचास से अधिक वर्षों तक देश और समाज के प्रति निष्ठावान सेवा करने के लिए भारत का दूसरा सर्वोच्च नागरिक सम्मान पद्म विभूषण भी दिया गया। 1994 में उन्हें भारत का ‘सर्वश्रेष्ठ सांसद’ चुना गया था।

    एक महान और ओजस्वी व्यक्तित्व 

    अटलजी जनता की बातों को हमेशा ही ध्यान से सुनते थे और उनकी आकाँक्षाओं को पूरा करने का प्रयास भी भलीभांति करते थी । इसका प्रमाण है उनके कार्य, जो राष्ट्र के प्रति उनके समर्पण को भलीभांति और पूरी तन्मयता से दिखाते हैं। लेकिन अफ़सोस कि लंबी बिमारी के बाद 16 अगस्त 2018 को भारत के इस वीर सपूत का निधन हो गया।  लेकिन अपने ओजस्वी व्यक्तिव और प्रखर निष्कपट देश सेवा के कारण वे आज भी देशवासियों के ह्रदय में विराजमान हैं।