Gehlot Pilot

जयपुर. राजस्थान (Rajasthan) में मुख्यमंत्री अशोक गहलोत (Ashok Gahlot) और सचिन पायलट (Sachin Pilot) के बीच बढ़ा विवाद फिलहाल थम गया सा दिखता है। लेकिन इस बात से भी इनकार नहीं किया जा सकता है कि राजस्थान कांग्रेस पार्टी (Congress) में दोनों के बीच वर्चस्व की लड़ाई पूरी तरह से खत्म हो गई है। वहीं राजनीति के जानकार मानते हैं कि दोनों नेताओं के बीच टकराव के हालात आगे शायद फिर से देखने को मिल सकते हैं। जहाँ यह कहा गया कि सचिन पायलट मुख्यमंत्री अशोक गहलोत पर भारी पड़े हैं तो वहीं अनेक मान-मन्नोवल के बाद सचिन पायलट की कांग्रेस में वापसी हुई और गहलोत सरकार ध्वनिमत से विश्वासमत जीती और बीजेपी (BJP) का राजस्थान में सरकार बनाने का सपना टुटा ।

Rajasthan politics

क्या थी घटना: 

गौरतलब है कि 2 जुलाई 2020 को, राजस्थान के तत्कालीन उपमुख्यमंत्री, सचिन पायलट और उनके 18 वफादार विधायक जयपुर से दिल्ली गए थे। उनका दावा था कि  उनके पास कुल 30 विधायकों का समर्थन है और वे राजस्थान में अशोक गहलोत के नेतृत्व वाली कांग्रेस सरकार को गिरा सकते हैं । वहीं गहलोत ने भी स्थिति को संभालने के लिए कांग्रेस के वरिष्ठ नेता राहुल गांधी और कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधीसे विचार विमर्श किया और उनकी सरकार को अस्थिर करने की कोशिश करने के लिए BJP की खिंचाई भी की। जहाँ BJP नेताओं ने दावा किया कि यह कांग्रेस पार्टी का आंतरिक मामला है और वे इसके लिए जिम्मेदार नहीं हैं। इसके अतिरिक्त, वरिष्ठ नेता रणदीप सिंह सुरजेवाला, अजय माकन और अविनाश पांडे अशोक गहलोत से मिलने जयपुर पहुंचे। 

कांग्रेस के आला हुक्मरान आए आगे:

स्थिति को सम्हालने के लिए कांग्रेस विधायक दल ने अपने सभी विधायकों को बैठक में उपस्थित रहने के लिए एक व्हिप जारी किया। इस बीच, सचिन पायलट ने पुष्टि की कि वह BJP में शामिल नहीं होंगे। भाजपा के वरिष्ठ नेता और पूर्व कांग्रेस अध्यक्ष, ज्योतिरादित्य सिंधिया 13 जुलाई को उनके दिल्ली निवास पर उनसे मिले। इधर मुख्यमंत्री अशोक गहलोत और अन्य नेताओं के साथ कांग्रेस विधायकों ने विश्वास प्रस्ताव के लिए बैठक की। इसके बाद एक छोटी वीडियो क्लिप सोशल मीडिया पर पोस्ट की गई थी, जिसमें दिखाया गया था कि सचिन पायलट को 19 कांग्रेस विधायकों और 3 निर्दलीय विधायकों का समर्थन प्राप्त है। सचिन पायलट और उनके समर्थक विधायकों को भी इस मुद्दे पर चर्चा के लिए आमंत्रित किया गया था, लेकिन उन्होंने इस पर इनकार कर दिया। फिर उन्होंने राजस्थान के मुख्यमंत्री के पद की मांग की। इसके फलादेश में  14 जुलाई 2020 को उन्हें राजस्थान के उपमुख्यमंत्री और राजस्थान प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष के साथ उनके 2 विधायकों को मंत्री पद से हटा दिया गया ।

भाजपा- सचिन होंगे हमारे साथ : 

उधर राजस्थान BJP के अध्यक्ष सतीश पूनिया ने कहा कि अगर सचिन पायलट बीजेपी में शामिल होना चाहते हैं, तो हम उनके लिए हमेशा तैयार हैं। BJP ने यह भी कहा कि कांग्रेस को अपना बहुमत साबित करने के लिए राजस्थान विधानसभा में फ्लोर टेस्ट होना चाहिए । दूसरी ओर, सचिन पायलट ने राजस्थान के उपमुख्यमंत्री और राजस्थान प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष के रूप में हटाए जाने के बाद कदम उठाने के लिए 15 जुलाई 2020 को एक संवाददाता सम्मेलन बुलाया । लेकिन फिर इस प्रेस कॉन्फ्रेंस को रद्द कर दिया गया था। बाद में, उन्हें राजस्थान विधानसभा के अध्यक्ष , सीपी जोशी द्वारा विधानसभा से उनकी सदस्यता भंग करने के बारे में नोटिस भेजा गया था । इधर मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने लगातार BJP पर ‘हॉर्स ट्रेडिंग’ का आरोप लगाया। लेकिन, BJP नेता और केंद्रीय मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत ने इस आरोप से इनकार करते हुए कहा कि कांग्रेस के इस आंतरिक मामले में, भाजपा का कोई संबंध नहीं है। वहीं कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने मीडिया से कहा कि, “अगर कोई नेता कांग्रेस छोड़ना चाहता है, तो वह कर सकता है। हम उन्हें रोकने वाले नहीं हैं।”

SATISH-PUNIA

क्या हुआ परिणाम: 

जब उपमुख्यमंत्री सचिन पायलट द्वारा कांग्रेस और मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के नेतृत्व को मानने से इनकार कर दिया तब, राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने सचिन पायलट को राजस्थान के उपमुख्यमंत्री के पद से बर्खास्त कर दिया । इसके साथ ही उन्हें राजस्थान प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष पद से भी हटा दिया गया और शिक्षा मंत्री गोविंद सिंह डोटासरा को राजस्थान प्रदेश कांग्रेस कमेटी का अध्यक्ष बनाया गया । सचिन पायलट का समर्थन कर रहे कैबिनेट मंत्री विश्वेंद्र सिंह और रमेश चंद मीणा को भी मंत्री पद से बर्खास्त किया गया। वहीं राजस्थान प्रदेश युवा कांग्रेस और राजस्थान प्रदेश कांग्रेस सेवादल के प्रदेश अध्यक्षों को भी भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस द्वारा बर्खास्त कर दिया गया । इसका साफ मंतव्य था कि पार्टी के अनुशासन के ऊपर और सचिन पायलट का समर्थन करने पर सजा अवश्य मिलेगी।

राज्यपाल कलराज मिश्र और मुख्यमंत्री अशोक गहलोत में ठनी:

इसके साथ, राजस्थान विधानसभा के सत्र शुरू करने के मुद्दे पर राजस्थान के राज्यपाल कलराज मिश्र और मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के बीच एक अलग राजनीतिक लड़ाई शुरू हो गई। जहाँ राजस्थान सरकार लघु सूचना पर सत्र बुलाना चाहती थी, लेकिन राज्यपाल चाहते थे कि सत्र शुरू होने से पहले कम से कम 21 दिन का नोटिस दिया जाए। हालाँकि, यह गतिरोध भी 14 अगस्त 2020 को राजस्थान विधान सभा सत्र बुलाने की अनुमति के साथ ही समाप्त हुआ ।

सचिन की हुई कांग्रेस में वापसी और गहलोत जीते विश्वास मत:  

इसके बाद, मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने अपने विधायकों को जयपुर से जैसलमेर स्थानांतरित करने का फैसला किया । बीते 10 अगस्त को इस घटना में भारी बदलाव आया, जब सचिन पायलट राहुल गांधी और प्रियंका गांधी से मिले। उसी दिन, बागी विधायक भंवर लाल शर्मा जयपुर पहुंचे और मुख्यमंत्री अशोक गहलोत से मुलाकात की। सचिन पायलट ने मुख्यमंत्री अशोक गहलोत से मुलाकात की और आखिरकार, राजस्थान प्रदेश कांग्रेस कमेटी के दोनों धड़े फिर से मिल गए। फिर 14 अगस्त को, अशोक गहलोत के नेतृत्व वाली राजस्थान सरकार ने राजस्थान विधानसभा में ध्वनि मत के माध्यम से विश्वास मत जीता। राजस्थान सरकार के सभी विधायक मौजूद थे, हालांकि भाजपा के 4 विधायक उस समय मौजूद नहीं थे।