tikait
File Pic

    नयी दिल्ली, आज जहाँ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Narendra Modi) ने पिछले करीब एक वर्ष से अधिक समय से विवादों में घिरे तीन कृषि कानूनों (Farm Laws) को वापस लिए जाने की घोषणा की और कहा कि इसके लिए संसद के आगामी सत्र में विधेयक लाया जाएगा। वहीं अब इस पर अनेक नेताओं ने अपने वक्तव्य भी साझा करने शुरू कर दिए हैं।  इधर इस मुद्दे पर BKU के राकेश टिकैत (Rakesh Tikait) ने कहा कि, “आंदोलन तत्काल वापस नहीं होगा, हम उस दिन का इंतजार करेंगे जब कृषि कानूनों को संसद में रद्द किया जाएगा ।सरकार अब MSP के साथ-साथ किसानों के दूसरे मुद्दों पर भी बातचीत करें। “

    गौरतलब है कि प्रधानमंत्री ने आज यानी शुक्रवार को गुरु नानक जयंती के अवसर पर राष्ट्र के नाम संबोधन में इस बड़े आशय की घोषणा की। उन्होंने कहा, “पांच दशक के अपने सार्वजनिक जीवन में मैंने किसानों की मुश्किलों, चुनौतियों को बहुत करीब से अनुभव किया है।” PMमोदी ने कहा कि उनकी सरकार तीन नये कृषि कानून के फायदों को किसानों के एक वर्ग को समझाने में नाकाम रही। उन्होंने घोषणा की कि इन तीनों कानूनों को निरस्त किया जाएगा और इसके लिए संसद के आगामी सत्र में विधेयक लाया जाएगा। 

    आइये देखें कि इस आशय पर विभिन्न राजनेताओं का क्या कहना है,

    जहाँ पंजाब के पूर्व मुख्यमंत्री अमरिंदर सिंह (Amrinder Singh) ने तीन कृषि कानूनों को निरस्त करने की घोषणा के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का आभार जताया है। वहीं कांग्रेस की पंजाब इकाई के प्रमुख नवजोत सिंह सिद्धू (Navjot Singh Sidhu) ने कहा कि, ‘काले’ कानूनों को निरस्त करना सही दिशा में उठाया गया कदम है।  इसके साथ ही कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी ने तीनों केंद्रीय कृषि कानूनों को वापस लिए जाने की प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की घोषणा के बाद शुक्रवार को कहा कि देश के अन्नदाताओं ने सत्याग्रह से अहंकार का सिर झुका दिया है।

    गौरतलब है कि इसके साथ ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राष्ट्र को संबोधित करते हुए छोटे किसानों को लाभ पहुंचाने के लिए अपनी सरकार द्वारा उठाए कदमों को रेखांकित किया था। उन्होंने कहा कि कृषि बजट में पांच गुना बढ़ोतरी की गई है, हर साल 1। 25 लाख करोड़ रुपए से अधिक राशि खर्च की जा रही है। इसके साथ ही PM मोदी ने कहा कि उनकी सरकार तीन नये कृषि कानून के फायदों को किसानों के एक वर्ग को तमाम प्रयासों के बावजूद समझाने में नाकाम रही।