kedarnath-modi
File Pic

    देहरादून. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Narendra Modi)) के पांच नवंबर को होने वाले उत्तराखंड दौरे (Uttrakhand Tour) से पहले एक पुरोहित ने केदारनाथ धाम (Kedarnath Dham) में चल रहे पुनर्निर्माण के कार्यों में सरकारी धन के दुरूपयोग का आरोप लगाया है । केदारनाथ धाम में पिछले 31 वर्षों से पूजा पाठ करवा रहे पुरोहित बृज बल्लभ बग्वाड़ी उस समय चर्चा में आए जब वह पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस महासचिव हरीश रावत के साथ केदारनाथ में एक वीडियो में ऐसे आरोप लगाते देखे गए । कांग्रेस नेता रावत मंगलवार को केदारनाथ आए थे और इस दौरान उनकी बग्वाड़ी तथा अन्य तीर्थ पुरोहितों से मुलाकात हुई थी ।

    बग्वाड़ी ने ‘पीटीआई भाषा’ से बृहस्पतिवार को फोन पर बातचीत में कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के केदारपुरी ‘ड्रीम प्रोजेक्ट’ की आधारशिला तब रखी गई थी जब हरीश रावत राज्य के मुख्यमंत्री थे। उन्होंने आरोप लगाया कि वर्तमान सरकार ने पिछली सरकार के कामों को मटियामेट कर अरबों रूपये की बर्बादी की है । बग्वाड़ी ने कहा ‘‘प्रधानमंत्री मोदी ने यहां जो ड्रीम प्रोजेक्ट शुरू किया है, हरीश रावत उसके संस्थापक थे ।” बहरहाल, भारतीय जनता पार्टी (BJP) के प्रदेश प्रवक्ता मनवीर चौहान ने कहा कि सब जानते हैं कि केदारनाथ धाम का पुनर्निर्माण प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का ‘ड्रीम प्रोजेक्ट’ है ।

    उन्होंने कहा, ‘‘यह जगजाहिर है कि केदारनाथ में चल रहे पुनर्निर्माण कार्य प्रधानमंत्री की ही देन हैं । कांग्रेस ने कोई कार्य नहीं किए थे ।” वर्ष 2013 में प्राकृतिक आपदा में तबाह हो गए केदारनाथ धाम में पुनर्वास और पुनर्निर्माण के लिए तत्कालीन मनमोहन सिंह नीत संप्रग सरकार ने 7500 करोड रूपये का पैकेज घोषित किया था जिसके बाद प्रदेश में सत्तारूढ़ कांग्रेस सरकार ने काम शुरू कराए । वर्ष 2017 में प्रदेश में भाजपा की सरकार बनने के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने केदारनाथ धाम के पुनर्निर्माण को अपनी प्राथमिकता में लेते हुए ‘‘भव्य और दिव्य केदारपुरी” बनाने का संकल्प व्यक्त किया और इस दौरान वह कभी स्वयं आ कर और कभी वीडियो कांफ्रेंस के जरिए वहां चल रहे कार्यों की प्रगति की समीक्षा करते रहे हैं ।

    बग्वाड़ी ने आरोप लगाया कि हैलीपैड पर उत्तरकाशी स्थित नेहरू पर्वतारोहण संस्थान (नेहरू इंस्टीट्यूट ऑफ माउंटेनियरिंग) द्वारा करोडों रूपये की लागत से बनाए गए विश्राम गृह को हैलीपैड का स्वरूप बडा़ करने के लिए मटियामेट कर दिया गया । उन्होंने यह भी कहा कि इसके अलावा, नदी के किनारे करीब बीस करोड़ रूपये की लागत से बने एक अत्यंत सुंदर घाट को उजाड़ दिया गया । पुरोहित ने कहा ‘‘सोलर लाइट वाला आस्था-पथ केदारनाथ की भव्यता में चार चांद लगा रहा था लेकिन उसे भी उखाड़ कर वहां कुछ और बनाया जा रहा है । मुख्य मार्ग पर बहुत अच्छे पत्थर लगाये गये थे लेकिन उसे भी कभी बिजली की लाइन के लिए और कभी यात्रियों के लिए रेन शेल्टर बनाने के नाम पर बार-बार खोदा जा रहा है ।” बग्वाड़ी ने आरोप लगाया कि इस सरकार के पास कोई योजना नहीं है और धन का दुरूपयोग हो रहा है । उन्होंने कहा, ‘‘ इतने में तो एक और केदारनाथ बस जाता । इनके लिए केदारनाथ एक दूध देने वाली गाय बन गया है ।”

    उन्होंने यह भी आरोप लगाया ‘‘ आदि गुरू शंकराचार्य की समाधि को न केवल भूमिगत बनाया गया है बल्कि उसे मूल स्थान से हटाकर कहीं और बना दिया गया । तीर्थ पुरोहित समाज ने कई बार प्रशासन और सरकार के सामने इन मुद्दों को उठाया लेकिन स्थानीय लोगों की बात को कोई महत्व नहीं दिया जा रहा है ।” देवस्थानम बोर्ड के बारे में उन्होंने कहा कि वर्तमान सरकार का अभी इस बारे में रूख ही स्पष्ट नहीं है जबकि तीर्थ पुरोहितों का मानना है कि आदि गुरू शंकराचार्य द्वारा स्थापित धार्मिक परंपराओं और मर्यादाओं से छेड़छाड़ नहीं की जानी चाहिए । वर्ष 2013 की प्राकृतिक आपदा में अपने परिवार के 15 सदस्यों को खो चुके बग्वाड़ी ने कहा कि आपदा के बाद 2016 में तत्कालीन मुख्यमंत्री हरीश रावत ने लोगों को दोबारा बसाने की एक अच्छी पहल की थी ताकि लोग बसें और यात्रा चले, लेकिन यह भी पूरी नहीं हो पाई ।

    इस बारे में पूछे जाने पर प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष गणेश गोदियाल ने कहा कि वह पहले से ही यह कहते आ रहे हैं कि केदारनाथ में केंद्र और राज्य की भाजपा सरकारों ने कांग्रेस सरकार के समय में शुरू हुए कार्यों के शिलान्यास के पत्थरों को बदलकर उन पर अपने नाम लिख दिए हैं । उन्होंने कहा, ‘‘उन्होंने कोई नया काम नहीं किया है । पुराने कार्यों को ही तोड़ मरोड़ कर नई टाइलें लगाकर, नया कलेवर देकर उन्होंने अपनी मुहर लगाने का काम किया है ।” पुरोहित बग्वाड़ी के आरोप ऐसे समय में आए हैं जब पांच नवंबर को प्रधानमंत्री मोदी केदारनाथ के दौरे पर आ रहे हैं जहां वह आदि शंकराचार्य की प्रतिमा का अनावरण करने के साथ ही 400 करोड रूपये से अधिक लागत के विकास कार्यों का लोकार्पण और शिलान्यास भी करेंगे ।