देशव्यापी हड़ताल में 15 संगठन हुए शामिल

  • केन्द्र की कामगार विरोधी नीतियों के खिलाफ उतरे मजदूर संगठन
  • नौकरी में परमानेंट होने का अधिकार छीनने की कोशिश

जलगांव. देश के 10 राष्ट्रीय तथा महाराष्ट्र के 5 राज्य स्तरीय मजदूर संगठनों ने नरेंद्र मोदी सरकार की मजदूर विरोधी, जनता विरोधी नीति के खिलाफ देशव्यापी हड़ताल की घोषणा की थी. घोषणा के अनुसार इस हड़ताल में जलगांव के विभिन्न संगठनों ने अपनी सहभागिता दर्ज कराई.

महाराष्ट्र सेल्स एंड मेडिकल रिप्रेजेंटेटिव एसोसिएशन जलगांव यूनिट ने बताया कि नरेंद्र मोदी सरकार ने संसद के पिछले अधिवेशन के दौरान मजदूर विरोधी श्रम संहिता मंजूर की. मजदूर आंदोलन से प्राप्त किए 29 कानून भी रद्द कर दिए. डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर द्वारा राज्य घटना में दिए गए कानून का भी इसमें समावेश है. इससे मजदूरों को यूनियन बनाने, हड़ताल करने, नौकरी में कायम होने का अधिकार, सेवा शर्तों में सुधार के लिए संघर्ष करने के अधिकार का भी समावेश है.

यूनियन भी नहीं बना सकेंगे कामगार

मोदी सरकार की नई नीति के चलते इसके बाद कोई भी युवक-युवती नौकरी में कायम नहीं रहेंगे. असंगठित मजदूरों के लिए किसी भी तरह की कोई ठोस योजना लागू नहीं होगी. बड़ी कार्पोरेट कंपनियों का मुनाफा बढ़ाने के लिए मजदूरों को गुलामी की जंजीरों में बांधा जा रहा है. इन्हीं कारणों को लेकर आयोजित देशव्यापी हड़ताल में जलगांव के विभिन्न संगठनों ने शामिल होकर अपना रोष जलाया.

मजदूरों को गुलाम बनाने की कोशिश

एमआर संगठन की कई मांगों का समावेश किया गया है. मजदूरों को गुलाम बनाने वाली मजदूर संहिता रद्द की जाए. किसान विरोधी कानून रद्द करें, सार्वजनिक उद्योगों का निजीकरण रोका जाए. औषधियों का ऑनलाइन प्रमोशन रोका जाए, उस पर जीरो प्रतिशत जीएसटी लगाई जाए. सेल्स प्रमोशन एम्प्लाई एक्ट 1976 पर कड़ाई से अमल किया जाए. इन तमाम मांगों का ज्ञापन वैद्यकीय व विक्री संगठन की जलगांव शाखा द्वारा प्रधानमंत्री के लिए जिलाधिकारी को सौंपा गया. इस समय अजहर शेख, रवींद्र अहलूवालिया, चेतन पाटिल, चंपालाल पाटिल, मनीष चौधरी, महेश चौधरी, विशाल चौधरी, दिनेश जगताप, शाम पाटिल और विजय पाटिल मौजूद थे.

बैंककर्मियों ने भी की हड़ताल

18 सूत्रीय मांगों के समर्थन में श्रमिक संगठनों के साथ बैंककर्मियों ने भी गुरुवार को हड़ताल की. बैंकिंग स्ट्राइक के चलते बैंकों में ताले लटके रहे. कोई लेन-देन नहीं हुआ, जिससे करोड़ों के नुकसान का अनुमान लगाया जा रहा है. वहीं आम उपभोक्ताओं को भी इस हड़ताल के चलते कठिनाई का सामना करना पड़ा.

विभिन्न संगठनों के बैनर तले हुआ प्रदर्शन 

केंद्र सरकार की नीतियों के खिलाफ धुलिया में आक्रोश व्यक्त किया गया. केंद्र सरकार के खिलाफ बैंक, शिक्षक, मेडिकल, बीमा, केंद्र, राज्य, बीएसएनएल एवं अन्य संस्थानों समेत केंद्रीय श्रमिक संगठनों में कार्यरत ट्रेड यूनियनों ने 26 नवंबर को हड़ताल कर दावा किया है कि देश भर के 25 करोड़ से ज्यादा कामगार केंद्र सरकार की जनविरोधी आर्थिक नीतियों, कामगार विरोधी श्रम नीतियों एवं किसान विरोधी कानूनों के खिलाफ एक साथ खड़े हैं. 

बैंकों का निजीकरण रोका जाए

बैंकों के निजीकरण को रोका जाए. आयकर के अधीन नहीं आने वाले सभी परिवारों को 6 महीने के लिए 7500 रुपए प्रतिमाह की आर्थिक सहायता दी जाए और प्रत्येक व्यक्ति को 10 किलोग्राम मुफ्त खाद्यान्न दिया  जाए.  राशन प्रणाली को मजबूत करें. केरोसिन और चीनी सहित सभी आवश्यक चीजों की आपूर्ति करें.  पेट्रोल और डीजल पर लगे करों को कम करने के लिए कदम उठाकर मुद्रास्फीति पर अंकुश लगाएं.  एमजीएनआरईजीए के तहत 200 दिनों के काम या बेरोजगारी भत्ते के लिए 600 रुपए प्रतिदिन, शहरी क्षेत्रों के लिए रोजगार की गारंटी को लागू किया जाए,. सभी को नौकरी या बेरोजगारी भत्ता दिया जाए.  राष्ट्रीय डिजिटल स्वास्थ्य अभियान और नई शैक्षिक नीति को वापस लिया जाए.  निजीकरण को रोका जाए. सभी के लिए नि:शुल्क सार्वभौमिक स्वास्थ्य देखभाल प्रदान करें.