‘अमृत’ योजना में 400 करोड़ का काम राम भरोसे

जलगांव. पानी व स्वच्छता यह मुलभुत सुविधाओं की दृष्टि से तत्कालीन केंद्र सरकार ने अमृत योजना (Amrit Yojana) शुरू की गई है। इसी योजना के तहत शहर में सीवरेज और जल आपूर्ति श्रृंखला बिछाने का कार्य कई सालों से चल रहा है। इस योजना में बड़े पैमाने पर गड़बड़ियों का आरोप विभिन्न लोगों ने लगाया है।

400 करोड़ रुपये के भारी भरकम बजट की इस योजना में पानी सप्लाई और ड्रेनेज लाइन बिछाने का यह काम आज कल नगर में विभिन्न हिस्सों में राम भरोसे ही चल रहा है। शहर की तकदीर बदलने वाली यह योजना पर महाराष्ट्र जीवन प्राधिकरण (MJP) और महानगर पालिका यंत्रणाओं के समन्वय के अभाव के चलते योजना का काम धीमी रफ़्तार से चल रहा है। योजना के लिए केंद्र 50 प्रतिशत, राज्य सरकार 25 और शेष निधि महानगर पालिका से लगनी है।

अवधि सिर्फ दो साल, तीन साल में भी पूरा नहीं हुआ काम

जलगांव शहर के लिए ‘अमृत ’अर्थात जल आपूर्ति और जल निकासी के लिए दो परियोजनाएं शुरू की गई हैं। जलापूर्ति योजना पर 253 करोड़ रुपये तो जल निकासी योजना पर 169 करोड़ रुपये खर्च की है। इसमें से तीन साल पहले जलापूर्ति योजना की प्रक्रिया शुरू होकर यह काम शुरू हुआ। इस काम को पूरा करने की अवधि सिर्फ दो साल थी पर यह काम तीन साल होने के बाद भी पूरा नहीं हुआ।

अमृत योजना के तहत दोनों योजनाओं का काम दो अलग-अलग ठेकेदारों को दिया गया है। पानी सप्लाई योजना का काम जैन एरिगेशन कम्पनी को सौंपा है तो ड्रेनेज लाइन का काम अहमदाबाद की एलसी इंफ्रास्ट्रक्चर को सौंपा गया है। ड्रेनेज काम की अवधि दो साल की है। यह काम के लिए अभी और एक साल बाकी है। पानी सप्लाई योजना का काम अभी तक अधर में पड़ा हुआ दिखाई दे रहा है। इसके पीछे ठेकेदार, मजिप्रा और महानगर पालिका का समन्वय अभाव बताया जा रहा है।

एक दूसरे पर आरोप प्रत्योरोप

 जैन एरिगेशन ने शहर के प्रति अपनी कटिबध्दता दिखाते हुए अदालत की लड़ाई लड़ी। इसके बाद यह काम जैन को  मिला। काम शुरू होने के बाद भी बीते तीन साल में नहीं हो सका। इसमें ठेकेदार एजेंसियों को यांत्रिकी इजाजतें, करार की खामियां समेत कई खामियां हैं। यह दूर करने का काम मजिप्रा और मनपा का है। पर खामियों एक दूसरे की और से आरोप प्रत्यारोप ही लगाए जा रहै.

साप्ताहिक बैठक में आरोप

काम का ब्यौरा लेने के लिए और काम के अगले नियोजन के लिए महानगर पालिका में आयुक्त की उपस्थिति में हर सप्ताह बैठक का आयोजन किया जाता है। सप्ताह में दो बार महानगर पालिका और महाराष्ट्र जीवन प्राधिकरण (MJP) तो शेष दो सप्ताह में मजिप्रा और ठेकेदार एजेंसी और एक बार तीनों यंत्रणाओं की संयुक्त बैठक होती है।यहां यह बैठकें हो भी रही है पर यह बैठकों में एक दूसरे पर आरोप लगाने से ज्यादा कुछ भी नहीं हो रहा है।यह देखते हुये स्पष्ट हो रहा है कि अमृत योजना का काम राम भरोसे ही चल रहा है।

ठेकेदार की लापरवाही

इस योजना के कारण शहर के विभिन्न इलाकों में जलापूर्ति लाइन बिछाने के लिए सड़कों को उधेड़ कर रख दिया है पहले से खराब सड़कें और भी बदहाल हो गई हैं. सड़कों को ठेकेदार ने जलापूर्ति लाइन डालने के बाद मरम्मत किए बिना छोड़ दिया है, जिसके चलते नागरिकों के लिए अमृत योजना विष बनकर रह गई हैं। लोगों को गड्ढे मय सड़कों से गुजने विवश होना पड़ रहा है।