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  • राजस्व का हो रहा भारी नुकसान
  • 28 स्थानों की रेती नीलामी के लिए प्रस्ताव भेजा

जलगांव. एक वर्ष के बाद भी रेत की नीलामी ठप है, जिससे जिला प्रशासन को करोड़ों रुपए के राजस्व का नुकसान हो रहा है. जिले में बालू की नीलामी एक साल से रुकी हुई है. यह नीलामी पिछले साल 30 सितंबर 2019 को बंद कर दी गई थी. 

नीलामी प्रक्रिया के दौरान कोरोना संक्रमण हुआ. जब नदी में पानी होता है तो स्थानीय पर्यावरण समिति सर्वेक्षण करती है. इस बार भी हुआ और 28 स्थानों के रेत समूहों की नीलामी के लिए प्रस्ताव भेजे हैं. हालांकि, राज्य सरकार की पर्यावरण समिति ने अभी तक रेत की नीलामी को मंजूरी नहीं दी है.

ब्लैक मार्केट में बेच रहे रेत माफिया

नतीजतन रेत की नीलामी अभी भी रुकी हुई है. दूसरी तरफ तस्करी चल रही है और रेत माफिया रेत की चोरी कर उसे ब्लैक मार्केट में बेच रहे हैं. जिला प्रशासन ने रेत नीलामी के संबंध में पर्यावरण समिति को दो बार प्रस्ताव भेजे.राज्य स्तरीय समिति ने एक ऑनलाइन बैठक की और जिला प्रशासन को फिर से प्रस्ताव भेजने का निर्देश दिया.तदनुसार प्रस्ताव भेजे गए हैं.

नदियों पर लगाया पहरा

रेत चोरी के कारण विभिन्न नदी क्षेत्रों में कर्फ्यू लगा दिया गया है और वाहनों पर प्रतिबंध लगा दिया गया है, फिर भी रेत माफिया रात के समय रेत चोरी करते हुए संबंधित स्थलों पर सुबह तक पहुंचाते हैं. रेत ढुलाई सुबह 4 बजे से शुरू होती है. ये वाहन राजमार्ग पर गति बढ़ाते हैं और संबंधित स्थानों पर जाकर रेत को नीचे गिरा देते हैं.

रेत नीलामी से ही रुकेगी चोरी

रेत की चोरी को रोकने के लिए रेत की नीलामी करने का विकल्प है. लेकिन सरकार इसकी अनुमति नहीं दे रही है. परिणामस्वरूप जिला प्रशासन को करोड़ों का राजस्व का नुकसान हो रहा है. नागरिकों की मांग है कि रेत की नीलामी जल्द आयोजित की जाए और आम जनता को रेत उपलब्ध कराई जाए.

 

बालू घाटों की नीलामी के लिए दो बार प्रस्ताव सरकार को भेजा जा चुका है. पर्यावरण समिति ने अभी तक उन्हें मंजूरी नहीं दी है.नीलामी की प्रक्रिया तुरंत शुरू की जाएगी. -अभिजीत राउत, कलेक्टर