बीमा घोषणा के बाद आंदोलन का निर्णय

  • केला फसल बीमा पॉलिसी को लेकर पसोपेश में किसान

जलगांव. दो दिनों में केला फसल बीमा पर सरकार की नीति की घोषणा होगी. इस घोषणा के बाद ही किसानों की एक समिति बनाने का निर्णय लिया जाना चाहिए, ताकि यह तय हो सके कि केले की फसल बीमा के लिए आंदोलन करना है या नहीं.यह कहना है, रावेर के विधायक शिरीष चौधरी का.

केला फसल बीमा के परिवर्तित मानदंडों को लेकर रावेर कृषि उपज मंडी समिति में एक महत्वपूर्ण बैठक हुई. इस अवसर पर तहसील के किसान बड़ी संख्या में उपस्थित थे. बैठक में विधायक चौधरी ने कहा कि बीमा कंपनी जल्द ही अपनी रिपोर्ट सरकार को सौंपेगी.एनडीआरएस फंड से किसानों को मदद करने को लेकर मुख्यमंत्री सकारात्मक दिखाई दे रहे हैं. इस दरमियान तहसील के किसानों ने केला फसल बीमा नहीं लेने की इच्छा बैठक में रखी.

इसके साथ ही सर्वसम्मति से इसका बहिष्कार करने का निर्णय भी लिया गया. इस समय राजीव पाटिल, अमोल पाटिल, विकास महाजन, रामदास पाटिल, भागवत पाटिल ने अपने विचार व्यक्त किए.यहां विधायक शिरीष चौधरी के साथ ही मुक्ताईनगर के विधायक चंद्रकांत पाटिल, जिला परिषद अध्यक्षा रंजना पाटिल,पूर्व विधायक अरुण पाटिल,जिप सदस्य नंदकिशोर महाजन, मार्केट कमेटी के चेयरमैन श्रीकांत महाजन, पीएनएस के चेयरमैन जीतू पाटिल, पूर्व शिक्षा सभापति सुरेश धनके, भाजपा जिला उपाध्यक्ष पद्माकर महाजन, जिला बैंक के पूर्व उपाध्यक्ष राजीव पाटिल, पूर्व जेड.पी. सदस्य विनोद तराल, भाजपा जिला युवा मोर्चा उपाध्यक्ष अमोल पाटिल, शिवसेना तालुका प्रमुख योगराज पाटिल, राकां तालुका अध्यक्ष नीलकंठ चौधरी, किसान संघ के अध्यक्ष पी आर चौधरी, सुनील कोंडे, डॉ.राजेंद्र पाटिल, राजेश वानखेड़े, राजन लासुरकर, पीताम्बर पाटिल, राजीव पाटिल उपस्थित थे.

किसानों ने क्या कहा बैठक में

तथ्य यह है कि अधिकारियों को केला फसल बीमा की परवाह नहीं है. इसलिए हितों का उपयोग करने के अलावा कोई विकल्प नहीं है. सरकार दो दिनों में नीति की घोषणा करेगी, अगर किसान इससे संतुष्ट नहीं हुए तो हम किसानों के साथ आंदोलन में हिस्सा लेंगे.

चंद्रकांत पाटिल, विधायक, मुक्ताईनगर

जिले के अभिभावक मंत्री गुलाबराव पाटिल ने भी बड़े प्रयास किये हैं. मुख्यमंत्री ने हमें बताया कि फसल बीमा को लेकर सरकार ने मानदंड नहीं बदले तो एनडीआरएस किसानों को एक और विकल्प देने में मदद करेगा. केला फसल बीमा को लेकर किसानों के हित में निति जाहिर नहीं हुई तो किसानों के साथ हम भी आंदोलन में उतर जाएंगे”.

-शिरीष चौधरी, विधायक, रावेर

फसल बीमा के संबंध में जिले के 2700 किसानों ने फसल बीमा लिया है. इससे किसानों को संदेश जाता है कि बीमा को लेकर सरकारी मापदंड किसानों को स्वीकार्य हैं. यही वजह है कि कुछ किसान भ्रमित हैं.किसानों का भ्रम दूर करने के लिए यह बैठक बुलाई गई है.

-श्रीकांत महाजन, सभापति कृषि उपज मंडी समिति

फसल बीमा के मामले में हम राज्य स्तर पर गए हैं. राज्य और केंद्र के बीच तालमेल की कमी के कारण किसान चिंतित हैं. बीमा को लेकर बैंक भी ठीक से जानकारी नहीं दे रहे हैं.

-सुनील कोंडे, किसान, निंबोरा

एक प्रस्ताव पारित किया जाना चाहिए कि तालुका में कोई भी किसान फसल बीमा नहीं करे. इसके लिए किसानों के प्रतिनिधिमंडल को राज्य और केंद्रीय कृषि मंत्रियों से मिलना चाहिए.

-सुरेश धनके, अध्यक्ष, भाजपा उत्तर महाराष्ट्र किसान सभा

फसल बीमा के मामले में जनप्रतिनिधियों का आक्रामक होकर किसानों का पक्ष लेना चाहिए. जब तक कि राज्य सरकार केंद्र को विस्तार से नहीं लिखती तब तक किसानों के हित में फसल बीमा नीति की घोषणा असंभव लगती है”.

-नंदकिशोर महाजन, पूर्व उपाध्यक्ष, जेडपी जलगांव