कोरोना से हुआ स्वास्थ्य विभाग का कायापलट, जिला अस्पताल को 80 वेंटिलेटर उपलब्ध

बीमार अस्पताल धीरे-धीरे हो रहा स्वस्थ

जलगांव. कई वर्षों से जिला अस्पताल अपनी बदकिस्मती पर आंसू बहा रहा था. मरीजों का इलाज करने वाला अस्पताल खुद ही बीमार पड़ा हुआ था. अस्पताल की बिल्डिंग और मूलभूत सुविधाएं मुहैया नहीं होने के कारण जिला अस्पताल किसी भूतिया महल से कम नहीं था.कोरोना महामारी ज़िला अस्पताल के लिए वरदान साबित हुई है. आधुनिक तकनीक से लैस 80 वेंटिलेटर जिला अस्पताल को प्राप्त हुए हैं. जिसके चलते भविष्य में जलगांव के नागरिकों को उच्च स्तरीय चिकित्सा सुविधाएं जिला अस्पताल में उपलब्ध होंगी.गत वर्षों से मात्र 57 वेंटिलेटर से मरीजों का इलाज किया जा रहा था. 

मरीजों में जगी आस

अब एक ही समय में 80 वेंटीलेटर मिलने से जिला अस्पताल प्रशासन में मरीजों में खुशी का माहौल है. ग्रामीण प्रणालियों के लिए पीएम केयर योजना से 80 वेंटिलेटर प्राप्त हुए हैं.  इसके साथ ही, तीनों उप-जिला अस्पतालों में 10 बेड की गहन देखभाल इकाई शुरू की जाएगी, यह जानकारी जिला सर्जन डॉ एन.एस. चौहान ने बताया है. वर्षों से सुधार की प्रतीक्षा कर रही स्वास्थ्य प्रणाली पिछले 2 महीनों से कोविड काल में परिवर्तन के दौर से गुजर रही है.

चकाचक हुआ अस्पताल

जिला अस्पताल में पिछले कई वर्षों से 6 वेंटिलेटर और एक गहन देखभाल इकाई थी, लेकिन अब इसमें 74 वेंटिलेटर और 4 गहन देखभाल इकाई का इजाफा हुआ है.सभी कमरे चकाचक हो गए और अस्पताल ने एक कॉर्पोरेट रूप धारण कर लिया है. अस्पताल में आधुनिकता होने के बावजूद चिकित्सा स्वास्थ्य कर्मियों की कमी से जूझना पड़ रहा है जिसके कारण मरीजों को घंटों इलाज की कतार में लगे रहना पड़ता है. ग्रामीण स्वास्थ्य प्रणाली में भी सुधार किया जा रहा है. जामनेर, चोपडा और मुक्तेनगर उप-जिला अस्पतालों में प्रत्येक में 10 बिस्तरों की गहन देखभाल इकाइयां और प्रत्येक ग्रामीण अस्पताल में 2 बिस्तरों की स्थापना की जाएगी.

एंटीजन किट होंगी उपलब्ध 

जिले में एंटीजन किटों की कमी है और हाल ही में 3,000 किट प्राप्त हुई हैं.इसके साथ ही निजी स्तर पर, ICMR के निर्देश के अनुसार, एक निजी कंपनी से 8,000 किट की मांग दर्ज की गई. अगले कुछ दिनों में उपलब्ध हो जाएंगे. अब तक 15,500 किट उपलब्ध कराए गए हैं और उनके माध्यम से त्वरित जांच की गई .डॉ चव्हाण ने कहा कि वर्तमान में अधिक किट उपलब्ध कराने की योजना पर काम चल रहा है. जन भागीदारी का एक बेहतरीन उदाहरण ज़िले में देखने मिला है.

जन सहयोग से मिली सुविधा

कहा जाता है कि यह राज्य का पहला उदाहरण है जहां जन भागीदारी के माध्यम से जिले में बड़ी संख्या में अस्पतालों में सेंट्रल ऑक्सीजन पाइपलाइन का निर्माण किया गया है. नागरिकों ने सभी स्तरों से 50 लाख से 1 करोड़ रुपये एकत्र करके स्वास्थ्य प्रणाली को मजबूत करने की पहल की है.ग्रामीण क्षेत्रों के कई अस्पतालों में इस सुविधा की उपलब्धता के साथ मरीजों के समय और पैसों की बचत होगी. 

परीक्षण का बढ़ेगा दायरा

एक मरीज के पीछे 20 मरीजों की जांच की जाएगी. तीन-सदस्यीय केंद्रीय समिति द्वारा दिए गए निर्देशों के अनुसार, परीक्षण अब जिले भर में बढ़ाए जाएंगे, कम जोखिम वाले संदूषण की जांच की जाएगी और नियोजन प्रशासन प्रति रोगी बीस जांच कर रहा है. अभी और अधिक रोगियों के सामने आने की संभावना है. अतीत में परीक्षणों की संख्या कम हो गई थी. यह प्रति मरीज एक के पीछे 15 रोगियों की जांच करने की योजना बनाई गई थी. केंद्रीय 3 सदस्य समिति में जिला प्रशासन को निर्देश दिए थे. 

मृत्यु दर कम करने आगे आएं लोग

यदि मृत्यु दर कम करना है तो नागरिकों ने सामने आकर स्वयं जांच में मदद करना होगा और उनका समय पर इलाज किया जाए ताकि कोरोना संक्रमण काबू में कर सकें. इस तरह के विचार सदस्यों ने व्यक्त किया था, जबकि उस समय 5 से 7 मरीजों की जांच की जा रही थी. तदनुसार, जुलाई में बड़ी संख्या में जांच का विस्तार किया गया है. इसे और बढ़ाया जाएगा. जांच के बढ़ते दायरे से मरीज सामने आए. इसके चलते संक्रमण वह गंभीर मरीजों पर काबू पाया गया.इस तरह की प्रतिक्रिया जिला शल्य चिकित्सक डॉ़ चव्हाण ने बताया है.