मानव अधिकारों के बारे में करें जागरूक

  • जिलाधिकारी अभिजीत राऊत ने दिया निर्देश

जलगांव. समाज के अंतिम व्यक्ति तक मानव अधिकारों के बारे में जागरूकता जरूरी है और प्रत्येक नागरिक को अधिकार देते समय, सभी को अपने कर्तव्यों के बारे में पता होना भी उतना ही महत्वपूर्ण है। मानवाधिकार दिवस पर उपस्थितों को जिलाधिकारी अभिजीत राऊत सम्बोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि मानवाधिकार आयोग की स्थापना 10 दिसंबर 1948 को सुनिश्चित करने के लिए की गई थी कि कोई भी व्यक्ति भारतीय नागरिक संविधान के मूलभूत अधिकारों से वंचित न रहे। तब से 10 दिसंबर को मानवाधिकार दिवस के रूप में मनाया जा रहा है। मानवाधिकारों के प्रति समाज के अंतिम व्यक्ति को जागरूक कराने के लिए सभी को पहल करनी चाहिए। इस तरह के निर्देश डीएम राऊत ने दिया है।

ईमानदारी से न्याय देने का करें प्रयास

कलेक्टर अभिजीत राऊत ने अधिकारियों को सम्बोधित करते हुए कहा कि जब नागरिक किसी काम से हमारे पास आते हैं और वे बिना देर किए काम होने की अपेक्षा करते हैं तो हमें ईमानदारी से न्याय देने का प्रयास करना चाहिए।  जिला कलेक्टर अभिजीत राऊत ने यह भी कहा कि अगर ग्रामीण स्तर पर काम का निपटारा किया जा सकता है तो इसका प्रयास किया जाना चाहिए, ताकि नागरिकों को हर काम के लिए जिला स्तर पर आने की नौबत नहीं आनी चाहिए।उन्होंने कहा कि यदि ग्रामीण स्तर पर काम किया जाता है, तो यह कहा जा सकता है कि उन्हें सच्चे अर्थों में न्याय पाने की संतुष्टि के साथ मानव अधिकारों का लाभ दिया गया है।

कोरोना काल में मानवता के हुए दर्शन

कोरोना अवधि के दौरान, प्रशासन द्वारा कोरोना प्रभावित और संबंधित एजेंसियों को मानव अधिकार प्रदान किए गए थे। पीड़ितों को चिकित्सा के साथ-साथ मानवता के इस समय साक्षात दर्शन हुए। मानव दृष्टिकोण से भविष्य में सभी को मानव अधिकार देने और पहुंचाने की अपील जिला कलेक्टर अभिजीत राऊत ने किया है।

इस अवसर पर ज़िला परिषद मुख्य कार्यकारी अधिकारी डॉ. बी.एन. पाटिल, सरकारी अभियोक्ता एड।चेतन ढाके, जिला विधि सेवा सचिव एड. के.एच. ठोंबरे, एङ दि लीप बोरसे, तहसीलदार सुरेश थोरात, महिला व बाल विकास अधिकारी विजय सिंह परदेशी, पी. गायकवाड़ तथा पुलिस और शिक्षा विभाग के अधिकारी उपस्थित थे।