performing Shradh, shepherd community warns

  • भेंड़ चराने के लिए स्वीकृत क्षेत्र दिखाने की मांग

धुलिया. वन विभाग (Forest Department) चरवाहा समुदाय को भेंड़ चराने के लिए स्वीकृत क्षेत्र दिखाने से इंकार कर रहा है। अधिकारी केवल जुबानी आश्वासन देकर समय बरबाद कर रहे हैं। सभी वन अधिकारी कुंभकर्णी नींद में सोए हुए हैं।  मेंढपाल ठेलारी समाज (चरवाहा) और महाराष्ट्र ठेलारी फेडरेशन के प्रदेश अध्यक्ष शिवदास वाघमोड़े (Shivdas Waghmode) ने बताया कि 30 तारीख को मुंडन आंदोलन होगा। 

इस अवसर पर रामदास करांडे, गोविंद रूपनार, नाना पॉलकर, ज्ञानेश्वर सुले, समाधान ठोंबरे, रामचंद्र पॉलकर आदि उपस्थित थे। जिले में 168 गांव चरवाहा ठेलारी समुदाय के बसे हुए हैं। भेंड़ चराने वालों की खिलाफ बार-बार शिकायतें होती रहती हैं। सरकार ने वन विभाग के माध्यम से भेंड़ चराने के लिए 68,000 हेक्टेयर भूमि स्वीकृत की है। लेकिन वन अधिकारी समुदाय को स्वीकृत जमीन दिखाने से कतरा रहे हैं। जंगल में चरने पर भेंड़ों को दंडित किया जाता है। 

वरना 15 को लगाएंगे वन विभाग के दफ्तरों में ताला

कई बार अपराध भी दर्ज होते हैं। इसलिए यदि चरवाहा भेंड़ को खेतों के किनारे पर चराने के लिए ले जाता है, तो भेड़ के खेत में प्रवेश करने पर विवाद उत्पन्न हो जाता है। इसलिए चरवाहों को कष्ट होता है। भेंड़ चराने के लिए स्वीकृत जगह दिखाने के लिए 2 साल से आंदोलन चल रहा है, लेकिन वन अधिकारियों ने केवल मौखिक आश्वासन देने में समय बर्बाद किया है,  इसलिए, इन जीवित वन अधिकारियों का श्राद्ध करके मुंडन कराने का आंदोलन करने की चेतावनी चरवाहा समाज के रामदास करांडे ने दी है। इसके बाद भी अगर ध्यान नहीं दिया गया तो 15 जुलाई को वन विभाग के दफ्तरों में ताला लगाने की भी चेतावनी दी है।