Aadhaar registration of stuck children, delay in registration of 19,000 children
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  • शिक्षा विभाग ने दी विद्यालयों को चेतावनी

साक्री. आधार कार्ड से नहीं जोड़े गए छात्रों को शिक्षा विभाग स्वीकार नहीं करेगा, साथ ही अगर यह काम अधूरा रहता है तो स्कूलों के शिक्षकों की मान्यता भी खतरे में पड़ने की परिस्थिति पैदा हो सकती है। यह मान्यता हर वर्ष लेनी पड़ती है। जो कि छात्र संख्या और पढ़ाए जानेवाले विषय तथा उक्त विषय के लिए छात्र आदि मानदंडों पर आधारित रहती है।

शिक्षकों के पदों को हर वर्ष मान्यता लेना अनिवार्य है, जिसके चलते शिक्षा विभाग के इस कदम से हड़कंप मच गया है। स्कूलों में क्लास टीचरों में अपनी-अपनी छात्र सूचना और आधारकार्ड को जोड़ने की आपाधापी शुरू है। दूसरी ओर शिक्षा विभाग द्वारा यह सूचना की जांच हेतु तारीखों की घोषणा कर दी है।

शिक्षकों के पदों की मान्यता के लिए जांच शिविर

माध्यमिक और उच्च माध्यमिक स्तर पर शिक्षा विभाग द्वारा शिक्षकों के पदों को मान्यता हेतु हर स्कूल में जांच शिविर लगाए जा रहे हैं। छात्रों की संख्या पर शिक्षकों के पदों को सुनिश्चित किया जाता है। चूंकि हर एक छात्र की सूचना स्टूडेंट पोर्टल पर ऑनलाइन रखी गई है, उनकी सही पहचान के लिए हर एक छात्र की सूचना में आधारकार्ड को जोड़ना अनिवार्य किया गया है। इसी के मद्देनजर शिक्षा विभाग द्वारा आधारकार्ड से नहीं जोड़े गए छात्रों को मानने से इंकार कर दिया है। गौरतलब है कि ऐसे छात्रों की गिनती भी पोर्टल पर नहीं हो पाती है। बावजूद अगर छात्रों का आधारकार्ड छात्रों की सूचना को जोड़ने का काम अधूरा रखनेवाले स्कूलों के शिक्षकों की मान्यता का प्रमाणपत्र भी नहीं देने की चेतावनी भी सभी प्रधानाध्यापकों को दी गई है।

लाकडाउन से लटके संबंधित कार्य

लॉक डाउन के चलते स्कूल बंद रहे, साथ ही आधारकार्ड से संबंधित काम भी लटक गए। पांचवीं कक्षा से माध्यमिक स्कूल में भर्ती होनेवाले बच्चों के आधारकार्ड के काम नहीं होने से सबसे ज्यादा दिक्कत इन्हीं कक्षाओं की है। दूसरे, आधारकार्ड में पंजीयन के समय गलत वर्तनी, जन्म तारीख, पता आदि की सूचनाओं की गड़बड़ियां भी एक मसला है। स्कूल के रिकार्ड में अलग और आधारकार्ड में अलग सूचना दर्ज होने से उक्त छात्र का पंजीयन नहीं होता। सुदूर गांवों और बस्तियों के अभिभावकों द्वारा भी अपने बच्चों के आधारकार्ड लिंक नहीं किए गए हैं, वहीं राजस्व विभाग उनकी बस्तियों तक नहीं पहुंचा है। ऐसी कई अड़चनें शिक्षकों को पेश आ रही हैं।

स्कूलों में जाकर अधिकारी करते हैं जांच

शिक्षकों के पदों की मान्यता का काम हर वर्ष किया जाता है। शिक्षा विभाग के अधिकारी हर स्कूल में जाकर छात्रों और उनसे जुड़ी आवश्यक सूचना की जांच करते हैं। छात्रों की घटती-बढ़ती संख्या, शिक्षकों की रिटायरमेंट, उनके कामकाजी वर्ग तथा समयसारिणी आदि का मेल किया जाता है। कोरोना प्रकोप के चलते वर्ष के शुरुवात में होनेवाली जांच विगत वर्ष टल गई थी। इस वर्ष विगत और विद्यमान दोनों वर्षों की जांच की जा रही है। इसी जांच पर स्कूलों में शिक्षकों के पद, छात्रों की संख्या और पंजीयन, सरकारी सुविधा और अनुदान, शिक्षा बोर्ड की परीक्षाएं, कार्यालयों में कर्मचारियों के पदों को मंजूरी आदि सुनिश्चित होती है। इसलिए इस जांच और मंजूरी प्रमाणपत्र स्कूलों को मायने रखता है।