रिश्तेदारों ने नीलकमल अस्पताल में किया हंगामा

  • लापरवाही के कारण महिला की मौत का आरोप
  • स्थिति गंभीर होने के बावजूद नहीं लगाया वेंटिलेटर
  • 29 सितंबर को अस्पताल में किया गया था भर्ती
  • 10 अक्टूबर को लिया गया था मरीज का स्वैब

जलगांव. नीलकमल अस्पताल में वेंटिलेटर का उपयोग नहीं करने के कारण कोरोना संदिग्ध मरीज की मौत हो गई. यह घटना रविवार सुबह करीब 12 बजे हुई. मृतक महिला के गुस्साए रिश्तेदारों ने अस्पताल में हंगामा करते हुए भारी तोड़फोड़ की और इलाज में लापरवाही बरतने वाले डॉक्टरों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की. जब तक डॉक्टरों के खिलाफ मामला दर्ज नहीं किया जाता, शव को कब्जे में नहीं लेंगे, इस भूमिका पर परिवार अड़ा रहा. पुलिस ने बीच-बचाव कर मामला शांत किया. 

सूत्रों से प्राप्त जानकारी के अनुसार संगीता पांडुरंग पाटिल (50 निवासी जिला बैंक कॉलोनी) को 29 सितंबर को  कोविड निमोनिया के कारण नीलकमल अस्पताल में भर्ती कराया गया था. 10 अक्टूबर को स्वैब लिया गया. रिपोर्ट कोरोना की कल आना थी.

अचानक बिगड़ी महिला की तबीयत

इसी बीच, रविवार को संगीता पाटिल की तबीयत बिगड़ने लगी. इसके बाद इसकी सूचना उनके बेटे महेंद्र पाटिल को दी गई.जैसे ही महेंद्र पाटिल अस्पताल पहुंचे, उनकी मां की मौत हो गई.इस पर पाटिल ने आक्रोश किया और मां की मौत की खबर परिजनों को दी. परिजनों का आरोप है कि मरीज कोरोना पॉजिटिव होने के साथ ही उसमें निमोनिया लक्षण पाए गए. 

आज पड़ा दिल का दौड़ा

आज उसे  दिल का दौरा पड़ा. रिश्तेदारों ने मांग की थी कि वेंटिलेटर लगा कर इलाज जारी रखें, लेकिन डॉक्टरों ने लापरवाही बरती और केवल ऑक्सीजन के साथ उपचार जारी रखा, जिसके चलते रविवार 12 बजे महिला की मौत हो गई.

एक व्यक्ति गंभीर रूप से घायल

मृतक आश्रित परिजनों ने अस्पताल में जमकर हंगामा किया और उत्पात मचाते हुए अस्पताल में तोड़फोड़ कर दी. ऑक्सीजन सिलेंडर को इधर से उधर फेंका, जिसमें एक व्यक्ति गंभीर रूप से घायल हो गया. परिजनों ने अस्पताल पर लापरवाही का आरोप लगाते हुए कहा है कि उत्तर महिला को अस्पताल में भर्ती करने से पहले अस्पताल प्रशासन ने 35 हजार रुपये जमा कराया था. रविवार को फिर 50 हजार रुपये जमा कराया. इसके बावजूद मरीज के इलाज में कोताही बरती गई. बिना  वेंटिलेटर से इलाज जारी रखा. जिसके कारण महिला की मौत हो गई.

डाक्टरों पर मामला दर्ज करने अड़े रहे रिश्तेदार

मृतक के बेटे महेंद्र पाटिल सहित रिश्तेदारों ने कहा कि जब तक संबंधित डॉक्टरों के खिलाफ मामला दर्ज नहीं किया जाता है, तब तक शव को कब्जे में नहीं लिया जाएगा. वे इस भूमिका पर अड़े रहे. घटना की खबर मिलते ही एमआईडीसी पुलिस स्टेशन के पुलिस कर्मी घटनास्थल पर पहुंचे.  पुलिस इंस्पेक्टर विनायक लोकरे अस्पताल का दौरा किया और मामला दर्ज करने के आश्वासन पर हंगामा शांत हुआ.