अन्तर्राष्ट्रीय विकलांग दिवस 2019: दिव्यांग दिवस मनाने का कारण और Handicap शब्द का वजूद

शारीरिक और मानसिक रूप से अक्षम लोगों के प्रति समाज का व्यवहार बदलने के लिए प्रतिवर्ष 3 दिसंबर को वर्ल्ड डिसेबिलिटी डे मनाया जाता हैं। संयुक्त राष्ट्र आम सभा द्वारा वर्ष 1976 में 1981 को वर्ल्ड

शारीरिक और मानसिक रूप से अक्षम लोगों के प्रति समाज का व्यवहार बदलने के लिए प्रतिवर्ष 3 दिसंबर को वर्ल्ड डिसेबिलिटी डे मनाया जाता हैं। संयुक्त राष्ट्र आम सभा द्वारा वर्ष 1976 में 1981 को वर्ल्ड डिसेबिलिटी डे के रूप में घोषित किया गया।  1992 से इसे अन्तर्राष्ट्रीय स्तर पर मनाया जाने लगा। दिव्यांगों के लिए संयुक्त राष्ट्र ने 2030 तक के लिए एजेंडा तैयार किया है, जिसमें उनकी कोशिश है कि रफ्तार भरी ज़िंदगी में कोई भी पीछे न छूटे। यूएन की तरफ से इस दिन खास कार्यक्रमों का आयोजन किया जाता है। 

15 वीं-16 वीं शताब्दी में इंग्लैंड के किंग Henry VII के दौर में पुराने सैनिक जो युद्ध में लड़ने की वजह से शारीरिक रूप से अक्षम हो गए थे के लिए हैंडीकैप शब्द वजूद में आया। शारीरिक अक्षमता की वजह सैनिक रोज़मर्रा की ज़रुरतें पूरी नहीं पाते थे। जिस कारण वह गलियों में भीख मांगते थे और उनके हाथ में कैप (cap in hand)हुआ करती थी। जिसे किंग हेनरी VII ने वैध करार कर दिया था। राजा के अनुसार, वह सैनिक कोई दूसरी नौकरी करने योग्य नहीं थे। 

अलग अलग समय में हैंडीकैप शब्द का कई अलग चीज़ो के लिए इस्तेमाल किया गया। वर्ष 1653 में यह शब्द एक खेल के लिए इस्तेमाल में लाया गया था। साल 1754 से इसे घोड़ों की रेस में इस्तेमाल किया गया। 1833 में भी स्पोर्टिंग वर्ल्ड में इस्तेमाल किया गया। पहली बार सन 1915 में हैंडीकैप शब्द का उपयोग  शारीरिक रूप से अपंग बच्चों के लिए किया गया था। 1950 से हैंडीकैप को व्यस्क और दिमागी रूप से अक्षम लोगों के लिए भी इस्तेमाल किया गया। 1980 के दशक में अमेरिका की डेमोक्रेटिक नेशनल कमेटी ने विकलांगो के लिए Handicapped की जगह Differently Abled शब्द के इस्तेमाल पर जोर दिया। ऑक्सफोर्ड डिक्शनरी में शब्द disabled 20वीं शताब्दी के आखिर में आया। 

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने दिसंबर 2015 में अपने शो ‘मन की बात’ में विकलांग को दिव्यांग नाम दिया था। जिसके बाद हिंदी भाषा में विकलांग की जगह ‘दिव्यांग’ शब्द का इस्तेमाल किया जाने लगा। 2001 की जनगणना के मुताबिक, भारत में लगभग 21 मिलियन (2.1 करोड़) से ज्यादा दिव्यांग थे। जिसमें से 12.6 मिलियन पुरुष व 9.3 मिलियन महिलाएं थी। उस समय ये तादाद देश की कुल आबादी की 2.1 फीसद बताई गई थी।