आत्महत्या के लिए क्या डिप्रेशन है मुख्य कारण, जानें इससे जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारी

    Coach Orpita

    नई दिल्ली : हर साल 10 सितंबर को पुरे विश्व में ‘विश्व आत्महत्या रोकथाम दिवस’ (World Suicide Prevention Day) मनाया जाता है। हाल ही में इस 10 सितंबर को विश्व आत्महत्या रोकथाम दिवस के रूप में मनाया गया। यह विषय केवल एक दिन का नहीं है। और नाही यह केवल एक दिन की बात है। हम सबको हमेशा यह याद दिलाते रहना चाहिए की हर एक जीवन बेहद कीमती है, कहे जीवन में कितना बुरा क्यों न हो रहा है, समय के साथ चीजें बेहतर  होते जाती है। 

    आम तोर पर ज्यादातर लोग आत्महत्या तब करते है, जब उन्हें लगता है की जीवन जीने का आगे का रास्ता बंद हो चुका है, या जीवन में आगे कुछ नहीं बचा है। यह सभी नकारात्मक भावनाएं व्यक्ति को तेज डिप्रेशन की वजह से उत्पन्न होती है, डिप्रेशन बिलकुल भी ठीक नहीं रहता। मानसिक स्वास्थ्य एक ऐसी समस्या है, जिसके बारें में हम बात नहीं करते।

    कम से कम भारत में मानों मानसिक स्वास्थ्य पर बात करना वर्जित है। हम सभी लोग अपने शारीरिक स्वास्थ्य को लेकर बेहद जागरूक रहते है। हर साल बॉडी चेकअप करना, डॉक्टर की सलाह लेना यह सभी काम हम करते है। लेकिन हम अपने मानसिक स्वास्थ्य को कभी महत्व नहीं देते।  

    आम तोर पर लोगों का यह कहना होता है कि मानसिक स्वास्थ्य की जांच तब कराई जाए जब आप डिप्रेशन के लक्षणों को महसूस कर सके। लेकिन सच बात तो यह है कि हम सभी लोग आमतौर पर रोजाना होने वाली छोटी-मोटी घटनाओं की वजह से उदास हो जाते है। एक स्कूल का छात्र भी बुरा महसूस करता है या उदास हो जाता है जब उसे कक्षा में स्वीकारा नहीं जाता, जब उसे लगता है कोई वो अपने पढ़ाई के साथ कही नहीं जा रहा है, या किसी बच्चे को अच्छे अंक प्राप्त हुए हो और वो बेहतर अंक हासिल ना कर पाया हों। 

    इन सभी चीजों की वजह से वो उदास हो जाता है क्योकि वो उम्मीद रखता है। हम सभी को सभी परिस्थिति का सामना करना पड़ता है। एक गृहिणी अपने पति या ससुराल वालों के साथ संबंधों के बारे में उदास महसूस कर सकती है। वैसे ही एक पति को अपने पत्नी के साथ संबंधों के बारे में बुरा लग सकता है, वैसे ही किसी को अपने दोस्तों  के साथ या अपने ऑफिस में छोटी- मोटी घटनाओं के बारे में बुरा लग सकता है।

     

    डिप्रेशन के कई वजह हो सकती है, ऐसी कोई भी घटना हो जो हमारे आत्मविश्वास को झकझोर देती है। वह घटना या भावना हमें अपने बारे में बुरा महसूस करा सकती है। हम सभी लोग अपने जीवन में समस्याए किती भी रो हसते है और जीवन को आगे बढ़ते है और हम सभी लोग दिखावा करते है  की सबकुछ एकदम ठीक है।

    लेकिन यह सभी भावनाएं ऐसा करने से थमती नहीं है बल्कि यह एक के बाद एक और भी बढ़ती जाती है। और ये डिप्रेशन को जन्म देती है। हम सब अपने आप में विश्वास खो देते है। और जब यह डिप्रेशन हमारे अंदर पूरी तरह घर बना लेता है, तब हम उस घर के तले जिंदा  दफन हो जाते है। इसके बाद हम एक अच्छा दिन या जीवन जीने के योग्य नहीं रहते। 

    तो डिप्रेशन के ऐसी स्थिति का क्या उपाय है ? इस विषय पर किसी से जरूर बात करें।लेकिन क्या वे इस बात को समझेंगे कि आप अपनी विचारों की दुनिया में कहां जा  रहे है ? ऐसे में आपने ने अपनी बात बताने की कोशिश की लेकिन कोई इस बात पर हंसे या उन्होंने कुछ ऐसी चीजों की सलाह दी जिनसे आप बिल्कुल भी संबंधित नहीं हो सकते। इसके अलावा आप  मनोवैज्ञानिक या चिकित्स्क के पास जाते है तो आपकी जीभ लड़खड़ाने लग जायेगी और आप अपनी बात अच्छी नहीं बोल पाएंगे। और यह सब निश्चित रूप से सहीं नहीं है। 

    आपको बता दें कि ऐसे पेशेवर उपलब्ध है, जीने कोच के रूप में जाना जाता है। प्रशिक्षक आपको यह कभी नहीं बताते कि क्या करना चाहिए या आपको कोई सुझाव नहीं देते। प्रशिक्षकों का यह माना है कि आपके अंदर शक्ति का स्त्रोत है और अनंत क्षमता है। वही आपको अपने आपको सकरात्मकं और शक्तिशाली आप से जोड़ने के लिए मार्गदर्शन करते है। 

    एक बार आप अपने सर्वोच्च “स्व” से जुड़ जाते है, तो आप अपना मार्ग स्वयं खोज लेंगे। कोच से कोई भी बात कर सकता है और सबसे अच्छी बात यह है कि यह प्रक्रिया बिलकुल भी महंगी नहीं है।, लेकिन इसके परिणाम अभूतपूर्व है, क्योकि इससे आप एक बहुत नए और शक्तिशाली व्यक्ति की खोज करते हैं । इसलिए आपको किसी भी बात का बुरा लग रहा है, या आप उदास महसूस कर रहे है, तो इस डिप्रेशन को बढ़ावा ना दें। आज ही किसी पेशेवर से बात करें