चाय बनाने के बाद बची हुई चायपत्ती से ऐसे उठाएं बेहतरीन फ़ायदे

    -सीमा कुमारी

    आमतौर पर ज्यादातर घरों में चाय बनाने के बाद लोग चाय पत्ती फेंक देते हैं। क्योंकि, उन्हें यह नहीं पता होता कि चाय बनाने के बाद बची हुई चायपत्ती का क्या किया जाए। इसलिए अक्सर लोग चाय की पत्तियों को कूड़ेदान में डाल देते हैं। क्या आप जानते हैं दोबारा इन चाय की पत्तियों का इस्तेमाल किया जा सकता है, जो न केवल आपकी हेल्थ के लिए फायदेमंद है, बल्कि आपके घर के अन्य कामों में भी आसानी से इस्तेमाल में लाई जा सकती है। आइए जानें बची हुई चायपत्ती का दोबारा इस्तेमाल कैसे करते हैं।

    एक्सपर्ट्स के मुताबिक, चायपत्ती चोट और घावों को जल्दी ठीक करने और उन्हें भरने का काम करती है। क्योंकि, चाय की पत्ती एंटीआक्सीडेंट होती है। यदि आपके घाव या चोट लगी हो, तो उस पर चायपत्ती लगाते ही वे जल्दी ठीक हो जाते हैं।

    सबसे पहले आप चायपत्तियों को उबाल लें और इसे चोट के ऊपर लगा दें। या फिर आप चायपत्ती के पानी से चोट और घावों को धो सकते हैं। यह संक्रमण से भी आपको बचाती है।

    एक्सपर्ट्स बताते हैं कि, बालों में चमक लाने के लिए आप बची हुई चायपत्ती का इस्तेमाल कर सकते हैं। ये एक तरह का प्राकृतिक कंडीशनर का काम करती है। इसके लिए आप चाय की बची हुई पत्ती को बाद में धोकर साफ पानी से निकाल लें और इसके बाद इसे दोबारा उबाल लें। इसे ठंडा करें और इससे अपने बालों को धोएं। ऐसा करने से बालों में शाइन आती है।

    बची हुई चाय पत्ती दोबारा पानी में डाल कर उबालें। उस पानी से घी और तेल के डब्बे साफ करें। इससे डिब्बे की दुर्गंध जाती रहेगी।

    गमले में पौधों को समय-समय पर खाद की जरूरत होती है। ऐसे में आप बची हुई चायपत्ती को साफ कर लें और गमले में डाल दें। इससे आपके पौधे स्वस्थ रहेंगे।

    आप चायपत्ती का इस्तेमाल काबुली चना बनाने के लिए भी कर सकते हैं। इसके लिए आप चाय बनाने के बाद छनी हुई चायपत्ती को सुखा लें, और काबुली चना बनाते समय उबलते हुए पानी में चायपत्ती की पोटली को उसमें डाल दें। ऐसा करने से काबुली चनों का रंग अधिक आकर्षक दिखता है।