Jyeshtha Gauri Puja
Jyeshtha Gauri Puja

    10 सितंबर गणेश चतुर्थी के दो दिन बाद षष्ठी यानि 12 सिंतबर को ज्येष्ठ गौरी स्थापना की जाएगी और अष्टमी के दिन यानि 14 सितंबर को गौर विसर्जन किया जाएगा। कथाओं के अनुसार, भगवान गणेश को सभी देवी-देवताओं से परम पूज्य मनाया जाता है। सबसे पहले गणेश जी की पूजा की जाती है। गणेश चतुर्थी के 10 दिन के उत्सव में माता गौरी की भी पूजा की जाती है। माता गौरी की स्थापना 2 दिन बाद यानि 12 सितंबर को किया जायेगा और 4 सितंबर को गौर विसर्जन किया जाएगा। 

    ज्येष्ठ गौरी का महत्व 

    मान्यताओं के अनुसार राक्षसों के अत्याचार से तंग आकर महिलाओं ने मां गौरी का आवाहन किया है और  माता गौरी के अपने सौभाग्य की रक्षा के लिए प्रार्थना की। तब माता मौरी ने राक्षसों का वध कर पृथ्वी पर सभी के दुखों का अंत किया। इसलिए महिलाएं अष्टमी को ज्येष्ठ गौरी का व्रत करती हैं। माता गौरी की प्रतिमा को साड़ी से सजाया जाता है। माता को सजाने के बाद शुभ मुहूर्त पर उनकी स्थापना की जाती है। ज्येष्ठ गौरी पर्व का महाराष्ट्र और कर्नाटक में विशेष महत्व है।

    शुभ मुहूर्त

    अखंड सौभाग्य के लिए महिलाएं भादो के महीने में मां गौरी की आराधना करती हैं। तीन दिनों तक की जाने वाली ये पूजा भाद्रपद शुक्ल पक्ष की छठी को मां गौरी के आह्वान के साथ शुरू होती है। दूसरे दिन मां का पूजन और नैवेद्य के बाद तीसरे दिन यानी अष्टमी को विसर्जन होता है।

    – सुबह 9.49 के पश्चात् गौरी स्थापना कभी भी की जा सकती है।

    – 14 सितंबर को अष्टमी के तिथि के दिन प्रात: 7.04 पश्चात् गौरी विसर्जन का मुहूर्त है।

    पूजा की विधि

    ज्येष्ठ गौरी के दिन माता गौरी की प्रतिमा शुभ मुहूर्त में स्थापना की जाती है। दूसरे दिन नैवेद्य को 16 सब्जियां, 16 सलाद, 16 चटनी, 16 व्यंजन माता गौरी को चढ़ाए जाते हैं। इसके बाद 16 दीपक के साथ मां की आरती करने की मान्यता है।