Lord Ganesh
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    -सीमा कुमारी

    भादो महीने की ‘गणेश चतुर्थी’ (Ganesh Chaturthi) इस साल 10 सितंबर, शुक्रवार को है। इस साल गणेशोत्सव का महापर्व 19 सितंबर तक मनाया जाएगा।  पौराणिक मान्यता के मुतबिक, विघनहर्ता भगवान गणेश का जन्म इस माह की चतुर्थी तिथि को हुआ था, इसलिए इस दिन को गणेश चतुर्थी तिथि या विनायक चतुर्थी के नाम से जाना जाता है।

    10 दिनों तक चलने वाले  महापर्व गणेशोत्सव में भगवान गणेश अपने भक्तों के बीच ही रहते हैं। गणपति के जन्मदिवस पर के रूप में मनाई जाने वाली ‘गणेश चतुर्थी’ पर कई बातों का विशेष ध्यान रखना बहुत ही जरूरी होता है। आइए जानें ‘गणेश चतुर्थी’ पर क्या करना अशुभ है।

    • ज्योतिष-शास्त्र के मुताबिक, ‘गणेश चतुर्थी’ के दिन चंद्रमा के दर्शन नहीं करने चाहिए। यदि आप भूलवश चंद्रमा का दर्शन कर भी लें तो जमीन से एक पत्थर का टुकड़ा उठाकर पीछे की तरफ फेंक दें। ऐसा न करने पर जातक कलंक का भागी बनता है।
    • गणपति की पूजा करते वक्त कभी तुलसी के पत्ते नहीं चढ़ाने चाहिए। मान्यता है कि, तुलसी ने भगवान गणेश को लम्बोदर और गजमुख कहकर शादी का प्रस्ताव दिया था। भगवान गणेश ने नाराज होकर उन्हें श्राप दिया था।
    • ज्योतिष-शास्त्र के अनुसार, गणेश उत्सव के दिनों में सात्विक आहार ही करना चाहिए। इस काल में मांस, मदिरा आदि तामसिक भोजन का सेवन नहीं करना चाहिए। ऐसा करने से गणेश पूजन सफल नहीं माना जाता है।
    • कहा जाता है कि, भगवान गणेश के पूजन में नीले और काले रंग के कपड़े नहीं पहनना चाहिए। उन्हें लाल और पीला रंग प्रिय है। इस रंग के कपड़े पहन कर पूजन करने से गणपति बप्पा शीघ्र प्रसन्न होते हैं।
    • भगवान गणेश की बैठी हुई मुद्रा की प्रतिमा स्थापित करना शुभ माना जाता है तथा प्रतिमा स्थापित करने से पहले घर में रोली या कुमकुम से स्वास्तिक का चिन्ह बनाएं।
    • भगवान गणेश की स्थापना करने बाद उन्हें अकेला नहीं छोड़ना चाहिए।
    • ज्योतिष बताते हैं कि, भगवान गणेश की पीठ में दरिद्रता का वास माना जाता है। इसलिए प्रतिमा इस तरह स्थापित करें की उनकी पीठ का दर्शन न हो।

    इन सभी बातों का ध्यान रखकर भगवान गणेश की पूजा-अर्चना करें।