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    सीमा कुमारी

    शक्ति की देवी ‘मां दुर्गा’ को समर्पित ‘शारदीय नवरात्रि’ 7 अक्टूबर यानी अगले गुरुवार से शुरू हो रही है और दशमी तिथि 15 अक्टूबर को समाप्त होगी। ‘नवरात्रि’ का महापर्व मां दुर्गा की पूजा और उपासना का पर्व है।

    माता रानी के भक्तों को ‘शारदीय नवरात्रि’ का इंतजार है। ‘नवरात्रि’ के दौरान मां दुर्गा के नौ स्वरूपों की पूजा-अर्चना की जाती है। ‘नवरात्रि’ में कलश स्थापना का भी विशेष महत्व होता है। नौ दिन तक चलने वाला इस महापर्व को पूरे देशभर में पूरी आस्था और उत्साह के साथ मनाया जाता है।  नवरात्रि पर देवी पूजन और नौ दिन के व्रत का बहुत महत्व है। ‘नवरात्रि’ के नौ दिन तक व्रत रखने को लेकर कुछ नियम और धार्मिक मान्यताएं भी हैं, जिनका पालन किया जाना आवश्यक होता है। नियमों के विपरीत करने पर देवी माता रुष्ठ हो सकती हैं।

    शास्त्रों के अनुसार अगर इन नियमों का पालन करने माता रानी की कृपा मिलती है और मनोकामना पूरी होती है। आइए जानें किन नियमों का पालन करना जरूरी है-

    ज्योतिष-शास्त्र के मुताबिक, यदि आपने घर में कलश स्थापना की है या माता की चौकी या अखंड ज्योति लगा रखी है, तो घर खाली न छोड़ें। यानी, घर में किसी न किसी का होना बहुत जरूरी है। साथ व्रत के दिनों में दिन में सोना भी मना है।

    कहते हैं कि, ‘नवरात्र’ के दौरान व्रत रखने वाले लोगों को बेल्ट, चप्पल-जूते, बैग जैसी चमड़े की चीजों का इस्तेमाल नहीं करना चाहिए।

    ‘नवरात्रि’ के पावन दिनों में सात्विकता का विशेष ध्यान रखना चाहिए। आहार, व्यवहार और विचार में आपके सात्विकता होना बहुत जरूरी है, तभी नवरात्रि के व्रत का पूरा लाभ मिल सकता है। आप इन दिनों प्याज-लहसुन और मांस मदिरा का सेवन भूलकर भी ना करें। नवरात्रि के नौ दिनों तक पूर्ण सात्विक आहार लेना चाहिए।

    ज्योतिषों का मानना है कि, व्रत में नौ दिनों तक खाने में अनाज और नमक का सेवन नहीं करना चाहिए। खाने में कुट्टू का आटा, समा के चावल, सिंघाड़े का आटा, साबूदाना, सेंधा नमक, फल, आलू , मेवे, मूंगफली खा सकते हैं।

    ‘नवरात्रि’ में नौ दिन का व्रत रखने वालों को दाढ़ी-मूंछ और बाल नहीं कटवाने चाहिए।

    ‘नवरात्रि’ में ब्रह्मचर्य का पालन करना चाहिए। इस दौरान शारीरिक संबंध नहीं बनाने चाहिए। ऐसे करने से व्रत के सभी फल नष्ट हो जाते हैं। बेड में न होकर जमीन में सोना चाहिए।

    माना जाता है कि व्रत करने वाले को ‘नवरात्रि’ नौ दिनों तक अपना समय फिजूल की बातों में न लगाकर धार्मिक ग्रंथों का अध्ययन करना चाहिए। इन दिनों ‘दुर्गा चालीसा’ या ‘दुर्गा सप्तसती’ का पाठ कर सकते हैं।