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    -सीमा कुमारी

    सनातन हिन्दू धर्म में ‘ग्रहण’ (Grahan) का विशेष महत्व है। ज्योतिष-शास्त्र के अनुसार, सूर्यग्रहण की तरह चंद्र ग्रहण (Lunar Eclipse 2022) का भी ख़ास महत्व है। सूर्यग्रहण के ठीक 15 दिन बाद यानी कि 16 मई को पहला चंद्रग्रहण लगने जा रहा है।

    धार्मिक मान्‍यताओं के अनुसार, ग्रहण का विशेष महत्‍व होता है। इस वजह से देश में ग्रहण काल को अशुभ माना जाता है। सूतक की वजह से इस दौरान कोई भी धार्मिक या फिर शुभ कार्य नहीं किया जाता है इसलिए इस दौरान कुछ विशेष बातों का ध्यान रखना बहुत ही जरूरी होता है। आइए जानें आखिर वो बातें क्या हैं ? विश्व प्रसिद्ध वास्तुविद पंडित रमेश भोजराज द्विवेदी जी से कि चंद्र ग्रहण के समय क्या करें और क्या न करें।

    वास्तुविद पंडित रमेश भोजराज द्विवेदी जी के अनुसार, गर्भवती महिलाओं को ग्रहण काल में काटने, छीलने या सिलने का काम नहीं करना चाहिए।

    कहते हैं कि, इस दौरान किसी भी तरह के शुभ कार्य न करें, और न ही भगवान की मूर्तियों को स्पर्श किया जाता है। इसके अलावा, इस दौरान तेल लगाना, जल पीना, बाल बनाना, कपड़े धोना और ताला खोलना जैसे कार्य भी नहीं करने चाहिए।

    घर में पके हुए भोजन में सूतक काल लगने से पहले ही तुलसी के पत्ते डालकर रख देने चाहिए। इससे भोजन दूषित नहीं होता है। ग्रहण ख़त्म होने के बाद पूरे घर में गंगाजल से छिड़काव करें।

    शिवलिंग पर जल चढ़ाएं और ऊँ नम: शिवाय मंत्र का जाप करें। इससे चंद्र ग्रहण के बुरे प्रभावों का असर नहीं पड़ेगा।

    ग्रहण-काल में तुलसी के पौधे को नहीं छूना चाहिए। सूतक लगने से पहले ही तुलसी के पत्ते तोड़ लें।

    गर्भवती महिलाओं को ग्रहण-काल में घर से बाहर नहीं निकलना चाहिए और सोना भी नहीं चाहिए। साथ ही साथ ग्रहण काल के समय भोजन भी नहीं करना चाहिए, क्योंकि ये शरीर के लिए नुकसानदायक माना गया है।